कैट ने दिया फैसला, ब्यूरोक्रेट्स की अभिव्यक्ति की आज़ादी पर प्रतिबन्ध आवश्यक

एक महत्वपूर्ण फैसले में केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की लखनऊ बेंच ने आज आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर द्वारा आईएएस, आईपीएस अधिकारियों के किसी भी सरकारी कार्य की आलोचना करने पर लगे प्रतिबन्ध को समाप्त किये जाने हेतु दायर याचिका को ख़ारिज कर दिया. नवनीत कुमार और ओपीएस मालिक की बेंच ने कहा कि राज्य के कर्मचारियों के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कुछ अपरिहार्य प्रतिबन्ध आवश्यक हैं और चूँकि अखिल भारतीय सेवा के अफसर सरकार में उच्च पदों पर तैनात रहते हैं, अतः उन पर यह प्रतिबन्ध और भी कड़ा होना चाहिए. उन्होंने कहा अनुशासन और नियंत्रित गवर्नेंस के लिए ये प्रतिबंध आवश्यक हैं.

कैट ने कहा कि देश में हजारों आईएएस तथा आईपीएस अफसर हैं और यदि उन्हें मनमर्जी अपने-अपने ढंग से बोलने की आज़ादी मिल जायेगी तो इससे भ्रमात्मक और विरोधाभाषी सन्देश जायेंगे और यह पूरे शासन व्यवस्था को नष्ट करते हुए अराजकता फैला देगा. अतः कैट ने श्री ठाकुर द्वारा अखिल भारतीय सेवा आचरण नियमावली 1968 के नियम 7  में दिए गए प्रतिबंधों को बहुत ही व्यापक और अस्पष्ट होने तथा अनुच्छेद 19(2) में दिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के विरुद्ध होने के कारण निरस्त करने की मांग को ख़ारिज कर दिया.



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