प्रेस कार्ड वितरित करने पर गिरफ्तार करने का कोई अधिकार नहीं!

पत्रकार है किस चिड़िया का नाम?

हिंदुस्तान में किसी को प्रेस कार्ड वितरित करने पर गिरफ्तार करने का कोई अधिकार नहीं है। जहां तक पत्रकार की योग्यता का सवाल है, कानून में इसका कोई उल्लेख नहीं है। कोई पहली पास भी पत्रकार बन सकता है। दरअसल पत्रकार या नेता की कोई सर्व मान्य परिभाषा नहीं है।

आरटीआई के अंतर्गत मैंने सूचना प्रसारण मंत्रालय, प्रेस काउंसिल आदि से पूछा था कि आखिर पत्रकार है कौन? राजस्थान सरकार ने अधिस्वीकरण के लिए स्नातक योग्यता तय कर रखी है। कानूनन यह अवैध है। इसके अलावा जो व्यक्ति अधिस्वीकृत है, राज्य सरकार उसे ही पत्रकार मानती है।

हर बड़े समाचार पत्र में कुछ ही व्यक्ति अधिस्वीकृत होते हैं। डेस्क पर कार्य करने वाले या गैर अधिस्वीकृत रिपोर्टर क्या पत्रकार नहीं हैं? उनको मजदूर माना जायेगा या हॉकर? राजस्थान सरकार ने अनेक गैर अधिस्वीकृत पत्रकारों को भूखण्ड का आवंटन फिर क्यों किया? सरकार को सुस्पस्ट नियम बनाने चाहिए। वरना हर ऐरा गैरा पत्रकारिता के कार्ड बांटने का कारोबार करने लगेगा।

अगर कोई शराब या भू माफिया अखबार निकालता है तो सरकार उसके मालिक को मानद तौर पर ना केवल अधिस्वीकृत कर देती है बल्कि कई कमेटियों के अध्यक्ष भी बना देती है। माफिया के अखबार में काम करने वाले बेचारे……! अधिस्वीकृत करना तो दूर, पत्रकार ही नहीं माना जाता है।

राजस्थान में जब पूर्व में गहलोत ने भूखंडों का आवंटन किया था तब दामाद, बेटी, भानजी, पत्नी, प्रेमिका, बर्तन मांजने वाली, मशीन मैन ने पत्रकार बनकर भूखंड हथिया लिए जबकि वास्तविक पत्रकार आज तक गहलोत सरकार को बद्दुआ दे रहे हैं।

महेश झालानी
जयपुर
jhalani999@gmail.com




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