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दिल्ली

पीएमसी की राह पर दिल्ली सरकार का कोआपरेटिव बैंक

कन्हैया शुक्ला-

दिल्ली स्टेट कोआपरेटिव बैंक के खिलाफ जनहित याचिका दायर
दिल्ली सरकार और कोआपरेटिव बैंक को हाई कोर्ट ने जारी किया नोटिस
तीन हफ़्ते में व्हिस्टलब्लोवर के आरोपों पर काउंटर एफिडेविट फाइल करने का निर्देश

दिल्ली स्टेट कोआपरेटिव बैंक के नरेला शाखा में पांच साल पहले हुए एक गबन मामले में हाल ही में रोहिणी कोर्ट के आदेश के बाद 27 मार्च 2022 को दिल्ली पुलिस ने दफा 420/34 के तहत तीन मैनेजर, एक क्लर्क और एक खाताधारक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। उस वाक्ये को मुश्किल से 15 दिन ही बीते होंगे कि आज दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली स्टेट कोआपरेटिव बैंक में जारी भर्ती घोटाले और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए बैंक और दिल्ली सरकार समेत सभी प्रतिवादियों को तीन हफ़्तों में व्हिसलब्लोअर के आरोपों पर काउंटर एफिडेविट फाइल करने का निर्देश दिया है।

याचिकाकर्ता के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली हाई कोर्ट के एडिशनल चीफ जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस नवीन चावला की बेंच ने सुनवाई की। सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार की तरफ से पेश अधिवक्ता ने माना की दिल्ली स्टेट कोआपरेटिव बैंक के खिलाफ कई घोटाले के आरोपों की जाँच के लिए 20 जुलाई को दफा 61 की जाँच के आदेश हुए थे और फिर दिल्ली के उप राज्यपाल के आदेश पर जनवरी 2021 में फैक्ट फाइंडिंग इन्क्वायरी के आदेश हुए थे। जिसमें एडिशनल रजिस्ट्रार कोआपरेटिव सोसाइटी ने जांच कर रिपोर्ट एलजी ऑफिस को सौंपी थी। एलजी हाउस ने फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट को डायरेक्टरेट ऑफ़ विजिलेंस को जाँच और कार्रवाई को सौंपी थी जोकि अबतक पेन्डिग है।

दिल्ली सरकार की तरफ से पेश अधिवक्ता के जवाब से असंतुष्ट हाई कोर्ट ने कहा की हम इस स्थिति को पूरी तरह अस्वीकार्य मानते हैं। हम दिल्ली सरकार को लंबित पूछताछ के निष्कर्ष में तेजी लाने के लिए / बिना किसी देरी के निरीक्षण पूरी करने का निर्देश देते हैं। अन्य सभी प्रतिवादियों को जिसमें दिल्ली स्टेट कोआपरेटिव बैंक, आरसीएस कार्यालय, दिल्ली सरकार, रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया, नाबार्ड, नैफेड और दिल्ली सरकार का पब्लिक ग्रीविएन्स कमिशन भी शामिल है; को तीन हफ़्ते में जनहित याचिका में लगाये गए आरोपों पर काउंटर एफिडेविट फाइल करने का निर्देश दिया है।

गौरतलब है की दिल्ली स्टेट कोआपरेटिव बैंक के खिलाफ दायर इस जनहित याचिका में बैंक प्रबन्धन खासकर चेयरमैन बिजेन्द्र सिंह और एमडी अनीता रावत द्वारा बैंक में अपने रिश्तेदारों को भर्ती करने, कॉमनवेल्थ खेलगांव में नियमों का उल्लंघन करके करोड़ों के चार फ्लैट्स की खरीद, नैफेड में हुए 1600 करोड़ के घोटाले की जाँच और फिर बिजेन्द्र सिंह के खिलाफ रिकवरी आर्डर पास होने के बाद भी बिजेन्द्र सिंह का चुनाव लड़ना और नैफेड का चेयरमैन बन जाना, दरियागंज मुख्य शाखा की डीजीएम अनीता रावत को बिना सरकार की अनुमति एमडी बनाने समेत अन्य वित्तीय अनियमितताओं को लेकर प्रबंधन पर गम्भीर आरोप हैं।

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