भास्कर ग्रुप के अखबार दिव्य मराठी पर पत्रकारों का 3 करोड़ 7 लाख 34 हजार 168 रुपये पीएफ का बकाया

पत्रकार सुधीर जगदाले

औरंगाबाद : जोखिम लेकर और जान की परवाह किये बिना पत्रकारिता करने वाले प्रिंट मीडिया के पत्रकारों को मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश के अनुसार वेतन ना देने वाले दैनिक दिव्य मराठी को एक तरफ जहां लेबर कोर्ट से लगातार मुंहकी खानी पड़ रही है वहीं अब केन्द्रीय भविष्य निधि कार्यालय (पीएफ कार्यालय) ने लगभग ३ करोड़ सात लाख ३४ हजार १६८ रुपये के बकाया की रिपोर्ट तैयार की है।

दिव्य मराठी के उप समाचार संपादक सुधीर जगदाले द्वारा वर्ष २०१७ में महाराष्ट्र के औरंगाबाद में पीएफ कार्यालय में की गयी एक शिकायत के आधार पर यह खुलासा खुद केन्द्रीय भविष्य निधि कार्यालय महाराष्ट्र ने की है। यह तथ्य सामने आने के बाद केन्द्रीय भविष्य निधि आयुक्त ने इस मामले में ७-ए इन्क्वायरी शुरू की है।

बताते हैं कि दैनिक दिव्य मराठी के उप समाचार संपादक सुधीर जगदाले ने औरंगाबाद में पीएफ कार्यालय में शिकायत की थी कि दैनिक दिव्य मराठी नियमों के तहत पीएफ की कटौती नहीं करती है। शिकायत के बाद इस मामले की जांच शुरू की गयी।

पीएफ आयुक्त ने 7-ए इंक्वायरी लॉन्च की जिसमें मजीठिया क्रांतिकारियों सूरज जोशी और विजय वाखड़े ने भी जांच में भाग लिया और अंत तक इस मामले में संघर्ष किया। बताते हैं कि दिव्य मराठी समाचार पत्र का प्रकाशन करने वाली कंपनी डी बी कार्प अपने पत्रकारों और गैर पत्रकारों की सेलरी स्लिप पर बेसिक, एचआरए, कन्वेंश एलाऊंस, मेडिकल एलाउंस, एजुकेशनल एलाउंस, स्पेशल एलाउंस दिखाती है। कंपनी की ओर से सिर्फ बेसिक पर १२ प्रतिशत पीएफ कटौती किया जाता है। नियमानुसार स्पेशल एलाउंस पर भी १२ प्रतिशत पीएफ कटौती करनी चाहिये।

सुधीर जगदाले ने इस मामले में माननीय सुप्रीमकोर्ट के एक आदेश का हवाला भी दिया। इसमें सुप्रीमकोर्ट ने २८ फरवरी २०१९ को एक लैंडमार्क जजमेंट दिया था कि स्पेशल एलाउंस बेसिक का पार्ट है। इस वजह से दिव्य मराठी दैनिक पर 3 करोड़ 7 लाख 34 हजार 168 रुपये का बकाया निकला।

सभी पत्रकारों / गैर-पत्रकारों को बकाया राशि मिलेगी

3 करोड़ 7 लाख 34 हजार 168 रुपये की बकाया राशि सभी पत्रकारों / गैर-पत्रकारों को मिलेगी जो दिव्य मराठी में है। शिकायत सुधीर जगदाले द्वारा की गई थी, लेकिन इस बकाये राशि का लाभ सभी पत्रकारों / गैर-पत्रकारों को मिलेगा। जिन कर्मचारियों ने अपनी नौकरी छोड़ दी है, वे भी बकाया राशि के लिए पात्र होंगे।

तीन साल की लंबी लड़ाई के बाद मिला न्याय

वर्ष 2017 में एक शिकायत पर शुरू हुई 7-ए जांच का नतीजा अब सामने आ रहा है। लड़ाई करीब 3 साल से चल रही है। यह आगे भी जारी रहेगी। सुधीर जगदाले द्वारा की गई शिकायत के कुछ दिनों बाद, सूरज जोशी, विजय वानखेड़े भी मामले में कूद गए। इसके बाद कई पत्रकारों / गैर-संवाददाताओं ने भी ईमेल के माध्यम से शिकायत की। फिलहाल सुधीर जगदाले कहते हैं कि मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंजिल मगर… लोग साथ आते गए, कारवां बनता गया।

इस मामले में अधिक जानकारी के लिये मजीठिया क्रांतिकारी और निर्भीक पत्रकार सुधीर जगदाले से उनके मोबाईल नंबर ९९२३३५५९९९ पर संपर्क किया जा सकता है।

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