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जीपीएस लोकेशन के जरिये अपने रिपोर्टर्स की निगरानी!

दैनिक भास्कर ग्रुप के नक्शे कदम पर अब राजस्थान पत्रिका समाचार पत्र समूह भी चलने लगा है। दैनिक भास्कर की तर्ज पर संपादकीय विभाग और फील्ड में काम करने वाले रिपोर्टरों पर अब जीपीएस लोकेशन के जरिये निगरानी रखी जा रही है। इससे रिपोर्टरों की निजता का हनन तो हो ही रहा है, काम को लेकर तनाव भी बढ़ने लगा है।

रिपोर्टरों को साप्ताहिक अवकाश जैसी सुविधाएं देना तो दूर अकुशल मजदूरों को मिलने वाली न्यूनतम मजदूरी दर से भी कम मासिक वेतन पर काम लिया जा रहा है, जो 10000 से भी कम है, जिससे परिवार चला पाना तो दूर, मोबाइल, इंटरनेट और पेट्रोल पर ही अधिकांश राशि खर्च हो जाती है।

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ऊपर से मजीठिया वेज बोर्ड के पचड़े से बचने उन्हें पत्रिका ग्रुप की बजाय राजकमल कंसल्टेंसी नामक आउट सोर्सिंग कंपनी का कर्मचारी बनाया गया है। ये बात और है कि ग्रुप के बड़े ओहदेदार हवाई यात्रा और पांच सितारा सुविधाओं का उपभोग करते हैं, और आए दिन नैतिकता और पूरे ब्रह्मांड का ज्ञान अपने लेखों से बखान करते दिखते हैं।

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2 Comments

2 Comments

  1. Hanuman Singh

    May 26, 2023 at 4:05 pm

    Playing the game with employes is the habit of Rajasthan Patrika. This not first time when patrika has open Rajkamal Consultancy after getting defeat from M.P. Court Patrika has closed the Agence name was given FORTE FOLIAGE and this agency was opened 6-7 years before and all the employes who were not in grade were working on lam sam payment on voucher were shifted into FORTE FOLIAGE and after getting defeat from M.P. court they terminate all the employes from the agency are wandering hither or theither for serving and dr. gulab kothari still preaching in public that they are the only generous and honest person of this universe on other hand employes who asked wage board immediately terminated by the partika or transferred either in south or west bengal and Chhattisgarh. Gulab kothari one very honest g.m. is fighting for life in hospital because god has given him punishment of their good work and behaviour with employees . finally this is not matter of surprise of rajasthan patrika started first time list is very long.

  2. N Ramesh

    September 19, 2023 at 7:00 pm

    भड़ास में इस खबर के प्रकाशन के बाद समूह ने अपने रिपोर्टरों को ठिकाने लगाना शुरू कर दिया है। समूह के इस रुख का सबसे ज्यादा फायदा सर्कुलेशन विभाग वालों ने उठाना शुरू कर दिया है।
    पूरे छत्तीसगढ़ में लिखने-पढ़ने वाले रिपोर्टरों की जगह अखबार वितरण करने वाले एजेंट्स और हॉकरों को जिलों के समाचार भेजने के लिए अधिकृत किया जा रहा है, जो आम तौर पर लिखना-पढ़ना तो दूर सम्पादकीय विभाग का ककहरा तक नहीं जानते।
    अब अखबार में ज्यादातर वही खबरें छप रही हैं, जो न्यूज़ पोर्टल या दूसरे अखबारों में छपी हुई होती हैं। सिर्फ विज्ञप्तियों और सरकारी खबरों के भरोसे अखबार चल रहा है।

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