संपादक तो फ़िज़ूल में गिरफ़्तार हो गया, गिरफ़्तारी गुप्ता बंधुओं की होनी चाहिये : देवेंद्र सुरजन

Devendra Surjan : एक्ज़िट पोल छापने वाले जागरण परिवार की पूर्व पीढ़ी के दो और सदस्य सांसद रह चुके हैं. गुरुदेव गुप्ता और नरेन्द्र मोहन. यह परिवार सत्ता की दलाली हमेशा से करता आ रहा है. वर्तमान में जागरण भाजपा का मुखपत्र बना हुआ है. सत्ताधीशों का धन इसमें लगा होने की पूरी सम्भावना है. हर राज्य में किसी न किसी नाम से और किसी न किसी रूप में संस्करण निकाल कर सरकार के क़रीबी बना रहना इस परिवार को ख़ूब आता है. एक्ज़िट पोल छाप कर सम्पादक तो फ़िज़ूल में गिरफ़्तार हो गया जबकि गिरफ़्तारी गुप्ता बंधुओं की होनी चाहिये थी.

Arun Maheshwari : यह भारतीय पत्रकारिता का संभवत: सबसे काला दौर है। अख़बारों और मीडिया की मिल्कियत का संकेंद्रण, हर पत्रकार पर छटनी की लटकती तलवार और ट्रौल का तांडव – इसने डर और आतंक के एक ऐसे साये में पत्रकारिता को ले लिया है, जिसके तले इसके स्वस्थ आचरण की सारी संभावनाएँ ख़त्म हो रही हैं। सोशल मीडिया तक को नहीं बख़्शा जा रहा है। हमारे देश का संभवत: अब तक का सबसे जघन्य घोटाला व्यापमं, जिसमें सत्ता के घिनौने चरित्र का हर पहलू अपने चरम रूप में उजागर हुआ है, उस पर न सिर्फ सरकारी जाँच एजेंसियाँ कुंडली मार कर बैठी हुई है, बल्कि अबखबारों में भी इसकी कोई चर्चा नहीं है। बीच-बीच में सुप्रीम कोर्ट की तरह की संस्थाओं के फैसले भी इसको चर्चा में लाने में असमर्थ रह रहे हैं। चारों और एक अजीब सा संतुलन करके चलने का भाव पसरा हुआ है। इसमें जो लोग मोदी जी को अपने को सौंप दे रहे हैं, उनके सिवाय बाक़ी सभी तनाव में रह रहे हैं । ऐसा तो शायद आंतरिक आपातकाल के दौरान भी इतने लंबे काल तक नहीं हुआ था। यह भारतीय पत्रकारिता को पूरी तरह से विकलांग बना देने का दौर चल रहा है।

Urmilesh इस परिवार के एक सेठ को मुलायम सिंह यादव ने राज्य सभा में भेजा था।

Indra Mani Upadhyay ‘महेंद्र मोहन गुप्त’ को सपा ने राज्यसभा में भेजा था।

Om Thanvi इस बार इनकार कर दिया।

Situ Sharma आपने तो पोस्ट में बीजेपी का जिक्र किया है! फिर इनकार से सपा का क्या ताल्लुक..? सर

Om Thanvi ताल्लुक़ बहुत साफ़ है। सपा ने मना किया तो उन्हें फ़र्ज़ी पोल से सबक़ दिया जाएगा, भाजपा ख़ुश होगी, आगे भला करेगी जैसे अतीत में किया था।

Aneesh Rai दोबारा नहीं भेजा, इसीलिए तो नाराज हैं ।

Atul Tiwari अवसरवादी बिजनेसमैन हैं।

वरिष्ठ पत्रकार देवेंद्र सुरजन, अरुण माहेश्वरी, उर्मिलेश आदि के ये कमेंट जिस फेसबुक पोस्ट पर आए हैं, उसे पढ़ने के लिए नीचे दिए शीर्षक पर क्लिक करें :

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Comments on “संपादक तो फ़िज़ूल में गिरफ़्तार हो गया, गिरफ़्तारी गुप्ता बंधुओं की होनी चाहिये : देवेंद्र सुरजन

  • Arun Maheshwari :- Haमारे देश का संभवत: अब तक का सबसे जघन्य घोटाला व्यापमं, जिसमें सत्ता के घिनौने चरित्र का हर पहलू अपने चरम रूप में उजागर हुआ है, उस पर न सिर्फ सरकारी जाँच एजेंसियाँ कुंडली मार कर बैठी हुई है….:
    Bhai Maheshwari ji, aap Congress ke zamaney ke “Coal Ghotala, 2G/3G etc. etc. shayad bhool gaye itni jaldi…!!! Lagta hai aap bhi “Dhur Modi Virodhi” hain ya Congressi Hawabaaz…!;);););)

    Hamarey Om Thanvi ji to lagta hai Modi ji se kabhi Kushti khele thhe aur buri tarah “Pachhaad Maarey” gaye. Issiliye unka shuru se “Modi Virodh” uchit jaan padta hai….:):):)

    Bhai sab, thoda politics se hat kar bhi batein kiya karein aur likha karein. Aapki lekhni dekh kar hi koi bhi samajh sakta hai ki aap log “Anti-Modi” hain aur Congress, Communist, SP, Mamta etc etc se miley hue hain aur har jagah aap bhi ek “Kshadm Paid News” jaisa kaam kar rahey hain…
    Aaplog badey-2 Patrakar rahey hain. Thoda sa to desh-hit sochiye. Congress aur SP ne kaun sa teer maar kar Janta ko Malamal kar diya.? sabhi ne to sirf apna “Parivar, Rishtedar aur Khud” ka pet bhara hai. Desh ki Janta ki to sabon ne durgati ki hai….
    Dhanyawad…

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