कृपा शंकर सिंह और अरविंद केजरीवाल : एक ही देश में दो अलग-अलग नेताओं के लिए दो विधान क्यों?

Yashwant Singh : महाराष्ट्र में अरबों रुपये अवैध तरीके से उगाहने के आरोपी कांग्रेसी नेता कृपा शंकर सिंह के खिलाफ इसलिए मुकदमा नहीं चलता और वो कोर्ट से बरी हो जाते हैं कि उनके खिलाफ जांच कर रही एजेंसियों को आरोप पत्र दाखिल करने की अनुमति विधानसभा अध्यक्ष ने नहीं दी.

दूसरी तरफ दिल्ली के मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए अरविंद केजरीवाल के खिलाफ एक सिपाही मुकदमा दायर करने और उसे अंजाम तक पहुंचाने में सफल रहता है जिसमें बस मुख्यमंत्री ने एक इंटरव्यू में सिपाही को ठुल्ला कह दिया था… हां, यह बात अलग है कि केजरीवाल को कोर्ट ने इस मामले में किसी किस्म का दोषी नहीं पाते हुए बरी कर दिया… तो ऐसा क्यों है कि देश में एक ही सिस्टम में दो अलग अलग दलों के व्यक्तियों के लिए अलग-अलग पैमाना अपनाया जाता है…

Sanjaya Kumar Singh : किसी मुख्यमंत्री के खिलाफ मुकदमा, वो भी सिपाही की ओर से और “ढुल्ला” कहने के लिए – देश के दुर्लभतम मामलों में होगा। इसमें कोई शक नहीं है कि ऐसे मुकदमे कानून का दुरुपयोग करते हैं पर ऐसा होता रहता है। आम आदमी तो ऐसे मामले भुगतता ही रहता है पर देश के कानून और केंद्र की सरकार ऐसी है कि आम आदमी पार्टी नाम के राजनीतिक दल का मुख्यमंत्री भी ऐसे मुकदमे का शिकार बना।

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल केंद्र की भाजपा सरकार और उसके प्रतिनिधि उपराज्यपाल के खिलाफ यूं ही नहीं बोलते रहते हैं। ऐसे मुकदमे आम आदमी को भले परेशान करें पर मुख्यमंत्री को कितना परेशान कर पाएंगे फिर भी यह मुकदमा हुआ। सुना है – सरकारी पदों पर रहने वालों के खिलाफ मुकदमा करने के लिए अनुमति लेनी होती है। पता नहीं, इस मामले में क्या स्थिति रही पर एक राज्य के मुख्यमंत्री तो अपने खिलाफ मुकदमे ही हटा लेते हैं और दूसरी ओर यह मामला। न्यू इंडिया का आधुनिक रामराज्य शायद यही है।

वरिष्ठ पत्रकार यशवंत सिंह और संजय कुमार सिंह की एफबी वॉल से.

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