कुणाल कामरा और सुप्रीम कोर्ट की जंग में कौन जीतेगा?

-मुकेश कुमार-

सुप्रीम कोर्ट को थोड़ा आलोचना झेलने की आदत डालनी चाहिए। वह राज्य सरकारों को नसीहत देकर खुद उनका पालन न करके कोई अच्छी मिसाल नहीं बना रहा है। कुणाल कामरा ने चुभने वाली चीज़ें ज़रूर कही हैं, मगर उनमें सचाई भी है।

अवमानना कानून का आतंक पैदा करके जज लोगों को चुप नहीं करवा सकते, बल्कि इससे आवाज़ें और तेज़ होती जाएंगी।

बेहतर हो कि सुप्रीम कोर्ट पिछले छह सालों में दिए गए अपने फ़ैसलों की समीक्षा करे और देखे कि चूक कहाँ हो रही है या ग़लती क्यों की जा रही है।

इन छह सालों में आम आदमी का न्याय व्यवस्था पर से विश्वास जितना हिला है, कभी नहीं हिला। दूसरों को छोड़ दीजिए, जजों के बयान ही इसकी तस्दीक करते हैं।

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