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मंदिरमय अखबारों में आज ढूंढ़ने से मिली खबरें

मणिपुर के मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री से मिलने की कोशिश में, न्याय यात्रा पर हमला, बिलकिस बानो के दोषियों को जेल जाना पड़ा – खबर आज ही, और प्रधानमंत्री को राष्ट्रपति का ‘सर्टिफिकेट’!

संजय कुमार सिंह

आज की खबरों और अखबारों में जो छपा है वह दिलचस्प और विडंबनापूर्ण दोनों है। मणिपुर के मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री से मिलने की कोशिश करेंगे क्योंकि विधायक इस्तीफे की चर्चा कर रहे हैं (द हिन्दू)। आप जानते हैं कि मई से मणिपुर जल रहा है और मणिपुर जाना तो दूर प्रधानमंत्री उसकी चर्चा भी नहीं करते हैं। काफी समय से मंदिर और तीर्थ में व्यस्त हैं, छुट्टी नहीं लेते सो अलग। ऐसे में राज्य के विधायक प्रधानमंत्री से मिलने का इंतजार करके निराश हो चुके हैं और अब मुख्यमंत्री मिलने का प्रयास कर रहे हैं। मंदिर की खबरों में इसे जगह नहीं मिली है। प्रधानमंत्री की व्यस्तता सबको मालूम है और आज ही उनके काम की तारीफ राष्ट्रपति ने की है ऐसा प्रचार माफ कीजियेगा खबर है। मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह ने राज्य के विधायकों को यह आश्वासन दिया है कि वे आज प्रधानमंत्री से  मिलने की कोशिश करेंगे।

मंदिर के बहाने प्रचार और चुनावी लाभ पाने की कोशिशों के तहत आज के मंदिरमय अखबारों में जो खबरें है उससे महत्वपूर्ण यह है कि आज ही बिलकिस बानो के साथ न्याय होने की खबर है तो आज ही न्याय यात्रा पर हमले की भी खबर है। अखबारों ने इन्हें महत्व नहीं दिया यह अपनी जगह है पर आज ही यह खबर है कि जेल जाने के लिए समय मांग रहे सभी 11 अपराधी जेल पहुंच गये और समय से पहले समर्पण कर दिया (इंडियन एक्सप्रेस)। कहने की जरूरत नहीं है कि यह डबल इंजन की सरकार का काम था और इसके लिए बहुमत का भरोसा था। अब प्रधानमंत्री के पास हर कदम से सभ्यतागत यात्रा होने का सर्टिफिकेट है। न्याय यात्रा की जरूरत और उसपर हमले से पहले असम में अनुमति नहीं देने तथा चुनाव के बाद बंद करने जैसी खबरें आ चुकी हैं। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार भाजपा का झंडा लिये लोगों प्रदर्शन जबकि कुछ अनुचित था तो पुलिस यात्रा रोक सकती थी और भाजपा कार्यकर्ताओं को भिड़ने-भिड़ाने की जरूरत नहीं थी। पर सब हुआ और खबर कई अखबारों में पहले पन्ने पर जगह नहीं पाई।

आज के पहले पन्ने की खबरों के शीर्षक इस तरह हैं। प्राणप्रतिष्ठा आज; प्रधानमंत्री, पुजारी अनुष्ठानों का नेतृत्व करेंगे (दि हिन्दू) । अयोध्या दौरे से पहले प्रधानमंत्री ने राम सेतु पर पूजा की, राम मंदिर आज भव्य उद्घाटन के लिए तैयार है (हिन्दुस्तान टाइम्स)। पूरा अयोध्या आज मोदी के इंतजार में है (द टेलीग्राफ)। लंबा इंतजार खत्म हुआ, नई सुबह के मौके पर अयोध्या पूरे उत्साह में (टाइम्स ऑफ इंडिया)। अयोध्या में त्यौहार जैसा माहौल, राम मंदिर में आज प्राणप्रतिष्ठा समारोह के लिए तैयारियां पूरी (इंडियन एक्सप्रेस)। हिन्दी अखबारों ने हद कर दी है उन्हें छोड़ रहा हूं। इन खबरों में मुझे लगता है कि एक खबर यह भी होनी चाहिये थी कि शंकराचार्यों को मनाया नहीं गया। या वे शामिल नहीं हुए। ऊपर के शीर्षक से साफ है कि अखबार इसे हिन्दुओं के बड़े आयोजन के रूप में पेश कर रहे हैं तो यह तथ्य कम महत्वपूर्ण नहीं है।

खासकर इसलिए कि कांग्रेस ने जब कहा था कि 22 का कार्यक्रम संघ और भाजपा का है तथा वह इसमें शामिल नहीं होगी तो इंडियन एक्सप्रेस ने मूल खबर के साथ एक खबर छापी है जिसका शीर्षक था, भाजपा ने पलटवार किया : (इससे) पता चलता है कि सनातन धर्म के बारे में इंडिया समूह क्या सोचता है। अमर उजाला ने अपने दूसरे पहले पन्ने पर केंद्रीय सूचना व प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर का कहा छापा था, कांग्रेस का चाल, चरित्र और चेहरा कभी नहीं बदल सकता है। ऐसे में प्रधानमंत्री जब अपने विपक्षी राजनीतिक गठजोड़ को घमंडिया कहते हैं और सबको पता है कि यह आयोजन और पूरा ताम-झाम 2024 के चुनावों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है तो यह बहुत महत्वपूर्ण है कि इसमें चारो शंकराचार्य शामिल नहीं हो रहे हैं। और उन्हें इसके लिए राजी नहीं किया जा सके ना उनकी इच्छानुसार इसे टाला गया।  

दूसरी ओर, कार्यक्रम के राजनीतिक लाभ लेने के हर संभव तरीके अपनाये गये हैं। इसमें सीधा प्रसारण देखने-दिखाने की अपील से लेकर आज आधे दिन की छुट्टी और इसमें एम्स का ओपीडी भी बंद कर दिया जाना बड़ी खबरें है। यह अलग बात है कि भारी आलोचना के बाद आदेश वापस लेना पड़ा। ऐसे में सीधा प्रसारण सत्तारूढ़ दल और सरकार के लिए कितना बड़ा मुद्दा है इसका पता इस बात से चलता है कि केंद्रीय वित्त मंत्री और दक्षिण भारत से भाजपा की गिनी-चुनी नेताओं में से एक ने कल ट्वीट कर आरोप लगाया कि तमिलनाडु में सीधा प्रसारण पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। मुझे लगता है कि ऐसा हुआ भी होता तो केंद्रीय वित्त मंत्री को मोर्चा लेने की जरूरत नहीं थी पार्टी यह काम किसी कार्यकर्ता से भी करवा सकती थी। ऐसे में केंद्रीय मंत्री को उतार तो दिया गया पर चाल पिट गई। खबर हिन्दुस्तान टाइम्स में है। खबर के अनुसार उन्होंने कई ट्वीट किये और तमिल अखबार की कतरन साझा की जो गलत थी।

आज के कार्यक्रम और उसके प्रचार से जब यह दिखाने की कोशिश की जा रही है कि देश में सब कुछ ठीक है और प्रधानमंत्री कमाल का नेतृत्व कर रहे हैं तो राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी एक प्रमाणपत्र जारी किया है। इंडियन एक्सप्रेस ने इसे प्रमुखता से छापा है। टाइम्स ऑफ इंडिया में छोटी सी खबर का शीर्षक है, “पुनरुत्थान के नये चक्र की शुरुआत : राष्ट्रपति”। इंडियन एक्सप्रेस में इस खबर का शीर्षक है, “मुर्मू प्रधानमंत्री को : अयोध्या में आपके प्रत्येक कदम के साथ अनूठी सभ्यतागत यात्रा।” बेशक प्रधानमंत्री के लिए राष्ट्रपति द्वारा जारी यह प्रमाणपत्र उनका प्रचार है। राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की तारीफ करें यह एक चीज है और उसका प्रचार दूसरी चीज है। पता नहीं प्रचार कौन कर रहा है और इस प्रचार की जरूरत क्यों महसूस की गई। यहां याद आता है कि सत्यपाल मलिक ने राष्ट्रपति से मिलने का समय रद्द किये जाने पर क्या कहा था।  

सत्तारूढ़ पार्टी या प्रधानमंत्री मोदी के पक्ष में माहौल बनाने या उनके प्रचार के ये प्रयास तब किये जा रहे हैं जब सबको पता है कि उनकी पार्टी के लोग ही उनसे खुश नहीं हैं। मुरली मनोहर जोशी का उदाहरण सामने है। आज जब ज्यादातर अखबार राम मय, भक्तिमय और बेहद हिन्दू लग रहे हैं तो खबर यह भी है और आज द टेलीग्राफ का कोट है, जोशी जी क्यों नहीं जा रहे हैं यह वही बता सकते हैं। मामला मुरली मनोहर जोशी का है और अखबार ने लिखा है कि उनके घर फोन कर यह पूछने पर कि भाजपा के वरिष्ठ नेता प्राण प्रतिष्ठा के लिए अयोध्या क्यों नहीं जा रहे हैं तो किसी अनजाने व्यक्ति ने यह जवाब दिया। वैसे खबर यह तो है कि वे नहीं जा रहे हैं (या नहीं गये हैं)। शंकराचार्यों ने पहले ही मना कर दिया था। इंडिया गठबंधन का आप जानते ही हैं। फिर भी तारीफ में सर्टिफिकेट जारी हुआ है। उसका प्रचार भी है।

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