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सियासत

मोदी सरकार ने जनता के हिस्से के 6000 करोड़ रुपये हड़प लिए!

Anil Singh : बेशर्मी की हद है…. इस सरकार ने एक झटके में लूट लिए 6000 करोड़ रुपये… महंगाई खत्म करने के वादे के साथ सत्ता में आई मोदी सरकार को इतनी भी शर्म नहीं है कि अंतरराष्ट्रीय वजहों से सस्ते हुए पेट्रोल व डीजल का पूरा लाभ अवाम तक पहुंचने दे। मौका ताड़कर उसने अनब्रांडेड पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 1.20 से बढ़ाकर 2.70 रुपए, ब्रांडेड पेट्रोल पर 2.35 से बढ़ाकर 3.85 रुपए, अनब्रांडेड डीजल पर 1.46 रुपए से बढ़ाकर 2.96 रुपए और ब्रांडेड डीजल पर 3.75 से बढ़ाकर 5.25 रुपए कर दिया। इससे उसे अभी से लेकर मार्च 2015 तक के साढ़े चार महीनों में ही 6000 करोड़ रुपए मिल जाएंगे।

Anil Singh : बेशर्मी की हद है…. इस सरकार ने एक झटके में लूट लिए 6000 करोड़ रुपये… महंगाई खत्म करने के वादे के साथ सत्ता में आई मोदी सरकार को इतनी भी शर्म नहीं है कि अंतरराष्ट्रीय वजहों से सस्ते हुए पेट्रोल व डीजल का पूरा लाभ अवाम तक पहुंचने दे। मौका ताड़कर उसने अनब्रांडेड पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 1.20 से बढ़ाकर 2.70 रुपए, ब्रांडेड पेट्रोल पर 2.35 से बढ़ाकर 3.85 रुपए, अनब्रांडेड डीजल पर 1.46 रुपए से बढ़ाकर 2.96 रुपए और ब्रांडेड डीजल पर 3.75 से बढ़ाकर 5.25 रुपए कर दिया। इससे उसे अभी से लेकर मार्च 2015 तक के साढ़े चार महीनों में ही 6000 करोड़ रुपए मिल जाएंगे।

चरका पढ़ाया जा रहा है कि सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियां बढ़े टैक्स का बोझ खुद उठा लेंगी। एक तो ऐसा कभी होता नहीं। दूसरे अगर हो भी गया तो तेल कंपनियों की वित्तीय सेहत के नाम पर सरकार ने डीजल को जो डिकंट्रोल किया है, उस कदम पर तो इससे पटरा फिर जाएगा। यह भी कहा जा रहा है कि खजाने के घाटे को भरने के लिए टैक्स बढ़ाना ज़रूरी था। तो, जेटली साहब ने जब बजट पेश किया था, तब इस टैक्स का प्रावधान तो नहीं था। बिना इसके उन्होंने राजकोषीय घाटे को जीडीपी का 4.1% करने का लक्ष्य रखा है। क्यों नहीं करते वे बजट में की गई घोषणाओं पर अमल! आखिर बीच में ही जनता को मिले अप्रत्याशित लाभ में क्यों सेंधमारी कर रहे हैं? इस चाल से मोदी सरकार का चेहरा और चरित्र दोनों साफ हो गया है। फिर भी उनके भक्त भ्रम में रहें तो उनका राम ही मालिक है।

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कई कम जानकार लोग कहते हैं कि मोदी ने आने के बाद अब तक 13 रुपये कम कर दिए हैं… पर सच्चाई ये है कि 13 रुपए मोदी सरकार ने कम नहीं किए, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल के दाम घटने हुए हैं। कांग्रेस सरकार बहुत खराब थी लेकिन तब डीजल को डिकंट्रोल नहीं किया गया था। अब तो इनके दाम बाज़ार भरोसे हैं जहां सरकार का कोई दखल नहीं। मोदी सरकार तो बाज़ार का लाभ भी लोगों तक नहीं पहुंचने दे रही, दुख इसी बात का है।

अमर उजाला समेत कई बड़े अखबारों और स्टार न्यूज समेत बड़े न्यूज चैनलों में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके वरिष्ठ पत्रकार अनिल सिंह के फेसबुक वॉल से. अनिल सिंह काफी समय से मुंबई में रहते हुए अर्थकाम डाट काम का संचालन कर रहे हैं.

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0 Comments

  1. RAJESH KUMAR

    November 16, 2014 at 2:47 am

    oil price has been drooped also in 2012 but rate has never be reduced in that time..if you require i can sent you the graph….

  2. shravan Tiwari

    November 16, 2014 at 9:04 am

    😮 😕 😡 😡 😡 oooo…bhadas walk kyo utarne par lge ho….bhadas ki bhadas 2 mujhe banana padega….
    .
    jai ho namo namo…

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