दीपक चौरसिया मोदी सरकार के हर काम के पक्ष में बैटिंग करते हैं?

Sheetal P Singh : ये लोग इस देश के तथाकथित शीर्ष पत्रकार हैं! संपादक प्रबंध संपादक सीईओ वग़ैरह वग़ैरह! भारत में इन दिनों ट्रैफिक चालान की असाधारण वृद्धि लोगों में बहस का विषय है! इन्हें और आज की पत्रकारिता को चूँकि सरकार के हर काम के पक्ष में बैटिंग करने की ख़ुदमुख़्तारी है तो ये तुलना के लिये अमरीका को ले आये कि वहाँ चालान की रक़म कितनी है?

मित्र यह तो बताओ कि वहाँ प्रति व्यक्ति आय कितनी है ? साठ हज़ार डालर के आस पास , और तुम्हारे यहाँ दो हज़ार डालर भी नहीं , कोई तीस गुने का सीधा अंतर! वहाँ सड़कों की दशा क्या है और तुम्हारे यहाँ? वहाँ ड्राइविंग लाइसेंस कैसे जारी होता है? कुछ बुनियादी तर्क सामने नहीं रक्खोगे और सीधे अमरीका से तुलना करने पहुँच जाओगे?

यानि हद है!!!!

Manish Singh : अमेरिका में सीट बेल्ट न लगाने पर इतने लाख जुरमाना, आस्ट्रेलिया में फोन पर बात करने से उतने लाख जुरमाना, इंग्लैण्ड में सिग्नल तोड़ने पर ऐसा जुरमाना… दरअसल हम नामाकूल इंडियंस को हमारी संवेदनशील सरकार मार-मार कर अम्ररीका, ब्रिटेन या आस्ट्रेलिया बनाना चाहती है. हमई नहीं बनना चाहते.

बदले में हम खोज खोज कर दूसरी कहानी निकाल लाते हैं. जैसे कि ये कहानी…कि ब्रिटेन में खड्डे में कार डेमेज होने के कारण नगर पालिका ने कार वाले को डेढ़ लाख पाउंड का जुरमाना दिया.

स्काट निकोलस नाम का एक गरीब व्यक्ति, अपनी फरारी पर सवार होकर पीटरबरो नाम के गाँव में घूम रहा था. रस्ते में छोटा सा खड्डा आया, झटका लगा. कार का चक्का बेंड हो गया, और एयरबैग फट गया. गरीब आदमी तीन माह फरारी चला नहीं सकता था. क्योंकि फरारी के पार्ट सीधे कम्पनी से आते हैं. टाइम लगता है भइय्या.

तो स्कॉट भैया को आया गुस्सा … अपनी नगरपालिका पर केस ठोक दिया. न सिर्फ कार रिपेरिंग डेमेज बल्कि मानसिक यन्त्रणा का भी… कोर्ट ने उसकी बात सुनी, सिटी काउंसिल को अपनी जिम्मेदारी को पूरा न करने का दोषी पाया. पुरे डेढ़ लाख पाउंड, मने रुपिया में गिनो तो कोई एक करोड़ तीस लाख का जुरमाना.

भाई ख़ुशी ख़ुशी सिग्नल, हेलमेट, मोबाइल, स्पीड के नियम पालन करता है. कब्बी जुरमाना देना पड़े तो उसी पैसे की एफडी से निकाल के दे सकता है. अब वो ब्रिटेन में रहता है. इंडिया होता तो कालर पकड़वा के चालान भरना भरता, गाड़ी भी अपने बेरोजगारी भत्ते से बनवाता.

है की नई? कोई चौरसिया को टैग कर दो भाई … वो चाँद से लौट आया है.

वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी सिंह और मनीष सिंह की एफबी वॉल से.

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Posted by Bhadas4media on Thursday, September 12, 2019
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