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वेब-सिनेमा

१२वीं में फिजिक्स में 75+ नंबर बग़ैर नक़ल पाने वालों के लिए है ‘ओपनहाइमर’ मूवी!

नितिन त्रिपाठी-

आप किसी छोटे बच्चे को कैंडी स्टोर में ले जाइए. वह इतना प्रशन्न हो जाएगा उसे समझ ही न आएगा कि वह कौन सी कैंडी उठाये.

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ओपनहाइमर वही मूवी है हर उस व्यक्ति के लिए जिसने बारहवीं में फिजिक्स में 75+ नंबर बग़ैर नक़ल पाये हैं.

मॉडर्न फ़िज़िक्स और इसके किरदार हैं. मूवी तो ख़ैर है ही ओपनहायमर पर, जिनका नाम सुना ही होता है सबने एज फादर ऑफ़ एटम बम, आइंस्टीन हैं तो हैजनबर्ग के सिद्धांतों का भी ज़िक्र है. क्वांटम फ़िज़िक्स है तो प्रोजेक्ट ट्रिनिटी है.

यदि फ़िज़िक्स में 60 नंबर आये थे तो भी सदी के सबसे बड़े खलनायक वैज्ञानिक जिसने हिरोशिमा नागासाकी का बम बनाया था उसकी आत्म कथा के रूप में पसंद आयेगी. देखने से पहले विकिपीडिया पर पढ़ लीजियेगा.

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चूँकि यह बायोग्राफ़ी है एक वैज्ञानिक की तो क्रिस्टोफ़र नोलन की उन गिनी चुनी फ़िल्मों में है जो सब देख सकते हैं. तीन घंटे से ज्यादा बड़ी फ़िल्म है और पता ही नहीं चलती. हॉलीवुड के बड़े बड़े सितारे हैं सबने बस इस लिये काम किया कि नोलन की मूवी है.

फ़िल्म देखने समय से पहुँच जाइएगा. आरंभ से ही बहुत जल्दी जल्दी सीन चेंज होते हैं.

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फ़िल्म देखने का क्लू दे देता हूँ – फ़िल्म में दो कहानियाँ चलेंगी. एक कहानी होगी कलर में – वह ओपनहैमर के ऐंगल से होगी. दूसरी जो ब्लैक एंड वाइट में कहानी है वह है लेविस स्ट्रॉज़ के ऐंगल से. अंत में दोनों कहानियाँ एक में मिल जायेंगी.

थोड़ी बहुत आलोचना करनी हो तो की जा सकती है, पर लार्जली फ़िल्म काफ़ी अच्छी है. फ़िल्म तभी देखें जब अमेरिकन इतिहास, वहाँ के राष्ट्रपतियों की थोड़ी पॉलिटिक्स पता हो और बग़ैर जजमेंटल हुवे किसी दूसरे के ऐंगल से चीजों को देखना समझना आता हो. अन्यथा बार्बी मूवी आई हुई है वह देखिए, जल्द ही जवान फ़िल्म रिलीज़ होने वाली है वह देखिए.

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फ़िल्म की कहानी आदि गूगल पर पढ़ सकते हैं. एक्टर लिस्ट बड़ी लंबी है. सबने शानदार काम किया है. वैज्ञानिकों की भूमिका में असल वैज्ञानिक हैं. और ये क्रिस नोलन ही कर सकते हैं कि तीन घंटे की बायो पिक एक ऐसे वैज्ञानिक की बनाई जाये जिसके हाथ लाखों लोगों के खून से रंगे हों पर अंत तक आते आते उससे सहानुभूति हो जाये.

थोड़ा सा डायरेक्टर का अपना पोलिटिकल एजेंडा है. पर इस टाइप की मूवी को देखने वाले मैच्योर होते हैं, उन्हें विशेष फ़र्क़ नहीं पड़ता.

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अगर आपके घर में टीनएजर बच्चे हों तो उनके साथ देख सकते हैं. दो तीन सीन हैं पर हॉलीवुड मूवी है इतना तो यूनिवर्सल मूवी में होता है.

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