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दिल्ली

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने BBC की इस महिला पत्रकार को ठगा, लूटा या उल्लू बना दिया?

दिल्ली में ट्रैफिक पुलिस का आचरण किस तरह का है, उसका ताजा उदाहरण बीबीसी की महिला पत्रकार सर्वप्रिय सांगवान हैं. वे दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की चार सौ बीसी की भुक्तभोगी हैं. उन्होंने अपने साथ हुआ ये घटनाक्रम शेयर करने के साथ ही लोगों से इसकी कमप्लेंट करने न करने को लेकर राय भी मांगी है. आप उनकी ही जुबानी पढ़िए और कमेंट कर अपनी प्रतिक्रिया दीजिए….

सर्वप्रिय सांगवान-

दिल्ली ट्रैफ़िक पुलिस dtptraffic के कुछ लोग जनता को किस तरह से डराकर पैसा उगाह रहे हैं, वो मैंने आज खुद देखा.

आज दोपहर को मूलचंद रेड लाइट पर जैसे ही मैंने लेफ़्ट टर्न लिया तो ट्रैफ़िक पुलिस ने मुझे रोका. उन्होंने कहा कि आपने रेड लाइट जंप की है. मैंने कहा कि मुझे नहीं पता था कि लेफ़्ट टर्न फ़्री नहीं है.

ख़ैर, नियम के मुताबिक़ उन्हें मेरा हज़ार रुपए का चालान काट कर जाने देना चाहिए था. पर उन्होंने कुछ और किया.

उन्होंने मुझे कहा कि आपका लाइसेंस पहले एक बार सस्पेंड भी हो चुका है. लेकिन मेरी जानकारी में तो ऐसा कभी नहीं हुआ है. न जाने उन्होंने कैसे अपनी मशीन में दिखाया कि मेरा लाइसेंस सस्पेंड हुआ है. मैंने बार-बार उन्हें समझाने की कोशिश की क्योंकि ऐसा कभी नहीं हुआ.

उन्होंने कहा कि आपका पाँच हज़ार रुपए का चालान बनता है लेकिन आप तीन हज़ार दे दो. रेड लाइट जंप पर पाँच हज़ार का चालान?

मैंने कहा कि आप कोर्ट का चालान बना दीजिए. तो उन्होंने मेरा लाइसेंस लेकर कहा कि फिर आपका लाइसेंस मैं ज़ब्त करूँगा. मैंने कहा कि ऐसा कैसे हो सकता है. आज तक तो किसी ने रेड लाइट जंप पर लाइसेंस ज़ब्त नहीं किया. तो उन्होंने कहा कि मैं तो आपके लाइसेंस को बचाना चाह रहा था, इसलिए कोर्ट का चालान नहीं बना रहा.

मैंने कहा कि तीन हज़ार मेरे पास नहीं हैं तो कोर्ट का ही बनवाऊँगी. तो उन्होंने कहा कि आप अपनी मर्ज़ी से दे दीजिए जितना देना है. मैंने हज़ार रुपए उन्हें दिए जितने का चालान होता है. उन्होंने कहा कि ‘पर्ची में लपेट कर दीजिए.. ऐसे अच्छा नहीं लगता.’ मैं समझ ही नहीं पाई कि हो क्या रहा है. उन्होंने पैसे लिए लेकिन चालान की पर्ची नहीं दी. पैसा लेते ही वो जल्दी से चले गए, मैं बोलती ही रह गई कि पर्ची दे दीजिए.

आप सब समझ सकते हैं कि उन्होंने रिश्वत ली और वो भी सामने वाले को गुमराह करके, डराकर. इन ट्रैफ़िक पुलिस वाले का नाम मैं सोशल मीडिया पर नहीं लिख रही हूँ और ये नहीं जानते थे कि मैं पत्रकार हूँ.

मैं शिकायत भी करने को तैयार हूँ लेकिन कहीं मुझे ही घुमा फिरा कर परेशान तो नहीं कर दिया जाएगा!

क्या पुलिस एक लड़की को देख कर लाइसेंस ज़ब्त करने की धमकी दे रही थी ताकि कोर्ट के चक्कर काटने के डर से रिश्वत दे दे?

बहुत सारी नई जगह पर लोग जाते हैं. उन्हें वहाँ की स्पीड लिमिट की जानकारी नहीं होती, रेड लाइट में कहाँ लेफ़्ट टर्न फ़्री है या नहीं, ये सब बोर्ड पर लिखा नहीं होता. तो क्या उनकी छोटी सी गलती पर लाइसेंस ज़ब्त करने की धमकी दी जा सकती है? पाँच हज़ार का चालान काटने की धमकी दी जा सकती है. डराने के लिए झूठी जानकारी दी जा सकती है कि लाइसेंस सस्पेंड हुआ है?

ये सब अधिकारियों को तो पता ही है कि हो रहा है. लेकिन सोचा लोगों तक भी पहुँचा दूँ कि आजकल ये चल रहा है.

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