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साहित्य

प्रभा ठाकुर के काव्य संग्रह ‘देहरी का मन’ का लोकार्पण

पूर्व सांसद एवं कवि डॉ. प्रभा ठाकुर के काव्य संग्रह ‘देहरी का मन’ का लोकार्पण दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब  में हुआ. पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार, जदयू नेता शरद यादव, केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली, साप्ताहिक हिंदुस्तान की पूर्व संपादक शीला झुनझुनवाला, न्यूज 24 चैनल की निदेशिका अनुराधा प्रसाद, राजकमल प्रकाशन समूह के प्रबंध निदेशक अशोक महेश्वरी सहित राजनीति और साहित्य के कई प्रमुख लोगों की कार्यक्रम में उपस्थिति उल्लेखनीय रही।  

पूर्व सांसद एवं कवि डॉ. प्रभा ठाकुर के काव्य संग्रह ‘देहरी का मन’ का लोकार्पण दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब  में हुआ. पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार, जदयू नेता शरद यादव, केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली, साप्ताहिक हिंदुस्तान की पूर्व संपादक शीला झुनझुनवाला, न्यूज 24 चैनल की निदेशिका अनुराधा प्रसाद, राजकमल प्रकाशन समूह के प्रबंध निदेशक अशोक महेश्वरी सहित राजनीति और साहित्य के कई प्रमुख लोगों की कार्यक्रम में उपस्थिति उल्लेखनीय रही।  

कार्यक्रम की शुरुआत में राजकमल प्रकाशन समूह के प्रबंध निदेशक अशोक महेश्वरी ने स्वागत उद्बोधन किया । पुस्तक लोकार्पण के उपरान्त पुस्तक की लेखिका डॉ. प्रभा ठाकुर ने अपनी पुस्तक से कुछ कविताएं सुनायीं, साथ ही अपनी रचनाशीलता को लेकर विचार साझा किये। शीला झुनझुनवाला ने प्रभा ठाकुर के रचना संसार से साहित्य प्रेमियों को अवगत कराया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय वित्त मंत्री, भारत सरकार, अरुण जेटली ने अपने उद्बोधन में कहा कि, “प्रभा ठाकुर जैसे कवि- मन सांसद की जरूरत संसद में है। उन्हें पुनः संसद में आना चाहिए।“ जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने कहा कि, “हम भाषाई संग्राम के दौर से गुजर रहे हैं।”

समारोह की अध्यक्षता कर रहीं लोकसभा की पूर्व अध्यक्षा मीरा कुमार ने कहा कि, “आए दिन यह कहा जाता रहा है कि संसद में जाने वाले सांसदों की योग्यता कम से कम स्नातक होनी चाहिए। इस बात पर तो मैं कुछ नहीं कह सकती लेकिन इतना जरूर कह सकती हूं कि संसद में जो आएं, वो कवि हों या कवि-मन हों। कवि हमेशा से संवेदनशील होता है। यदि कवि-हृदय सांसद संसद में होंगे तो निश्चित रूप से संसद का स्वरूप बदल जायेगा।” इस मौके पर मीरा कुमार ने अपनी कविता ‘रोपनी’ की कुछ पंक्तियां पढ़ीं। इस कविता में ग्रामीण गरीब खेतिहर मजदूरों की व्यथा को उन्होंने उकेरा है। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन करते हुए भाषा सहोदरी-हिन्दी के मुख्य संयोजक जय कांत मिश्र ने कहा कि, “हमारी संस्था हिन्दी साहित्य की उन्नति के लिए आगे भी इस तरह के आयोजन करती रहेगी।”

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