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सुख-दुख

इंदौर के कथाकार, चित्रकार और पत्रकार प्रभु जोशी नहीं रहे

अभिषेक तिवारी-

इंदौर से बेहद दुःखद खबर आ रही है कि चित्रकार, कहानीकार, पत्रकार … प्रभु जोशी जी नहीं रहे. इंदौर में प्रभु दा का अपार स्नेह मुझे मिलता रहा. वो अक्सर कहते थे. जब रंग खरीद कर लाओ तो उसमें से सफेद और काला रंग निकालकर खिड़की से बाहर फेंक दो …

जयदीप कार्णिक-

कोरोना जैसे बस चुन-चुन कर हमले कर रहा है। एक खबर का सदमा पूरा तो क्या शुरु भी नहीं हो पाता और दूसरी ख़बर आ जाती है। गोया मन को दुखाने की होड़ सी लगी हो। आँखों पर मानो पत्थर बरस रहे हों। आँख खोल कर देखने का मौका भी नहीं है कि ये हो क्या रहा है। अब तो केवल आंसू ही नहीं, श्रद्धांजलि के लिए शब्द भी सूख गए हैं…

अब ये कोरोना प्रभु दा को भी ले गया। शब्दों और रंगों का ऐसा चितेरा जिसने खुद को इंदौर के कैनवास तक ना समेटा होता तो उनका आसमान कहीं बड़ा होता, इसके बाद भी उन्होंने अपनी कला का इंद्रधनुष पूरी दुनिया तक पहुँचाया, देश दुनिया में अपनी प्रतिभा के रंग बिखेरे। उस इंद्रधनुष का एक सिरा हमेशा इंदौर की धरती पर ही टिका रहा।
अभी और शब्द नहीं हैं प्रभु दा, आपके साथ सुनहरी यादों के बायस्कोप से चुनने और बताने के लिए। आप ही ने सबसे पहले आकाशवाणी पर बोलने का मौका दिया। बहुत लंबी है यादों की फेहरिस्त। अभी संभव नहीं। पर ये भरोसा जरूर है कि आप जहां भी रहेंगे शब्द और रंग का मेला लगता रहेगा। और हां, मुझ पर विशेष स्नेह और आशीर्वाद भी जहां हैं वहीं से बनाए रखेंगे।

आपको शत शत नमन, विनम्र श्रद्धांजलि। ॐ शांति।

कृष्ण कल्पित-

अद्भुत कथाकार/गद्यकार
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त जलरंग चित्रकार
बड़े ब्रॉडकास्टर
हिन्दी भाषा के सच्चे हितैषी
आकाशवाणी में मेरे सहकर्मी और बड़े भाई Prabhu Joshi आज सुबह नहीं रहे । ओह । हृदयविदारक ।

‘न हाथ थाम सके, न पकड़ सके दामन
बड़े क़रीब से उठकर चला गया कोई !’

अजय तिवारी-

प्रभु जोशी भी…. अब सहनशक्ति जवाब दे रही है। शानदार मनुष्य, ज़िंदादिल दोस्त, श्रेष्ठ कथाकार, विवेकवान विचारक और साहसी चित्रकार प्रभु जोशी अभी दोपहर को चले गये। सुबह उन्होंने दोस्तों से कहा कि लगता है, अस्पताल से लौटूँगा नहीं…

इंदौर के अख़बार ‘नई दुनिया’ ने तत्काल उनपर लिखा है:
“इंदौर, Prabhu Joshi। इंदौर के प्रसिद्ध साहित्यकार, चित्रकार और पत्रकार प्रभु जोशी का मंगलवार दोपहर निधन हो गया। उनका पाजिटिव होने के बाद उनका इलाज चल रहा था। वे करीब तीन दशक तक नईदुनिया से भी जुड़े रहे। उनके निधन की खबर सुन साहित्य जगत में शोक की लहर छा गई है। प्रभु जोशी के व्यक्तित्व में एक चित्रकार, कहानीकार, संपादक, आकाशवाणी अधिकारी और टेलीफिल्म निर्माता समाहित था। इनके चित्र लिंसिस्टोन तथा हरबर्ट में आस्ट्रेलिया के त्रिनाले में प्रदर्शित हुए थे। प्रभु जोशी को गैलरी फॉर केलिफोर्निया (यूएसए) का जलरंग हेतु थामस मोरान अवार्ड मिला। ट्वेंटी फर्स्ट सैचुरी गैलरी, न्यूयार्क के टॉप सेवैंटी में वे शामिल रहे। भारत भवन का चित्रकला तथा मध्य प्रदेश साहित्य परिषद का कथा-कहानी के लिए अखिल भारतीय सम्मान भी उन्हें प्राप्त हुआ। साहित्य के लिए मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा गजानन माधव मुक्तिबोध फेलोशिप दिया गया था।”

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