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नए संपादक से पटरी नहीं बैठी तो दैनिक जागरण बनारस को अलविदा बोल गए रत्नाकर दीक्षित

वरिष्ठ पत्रकार रत्नाकर दीक्षित ने दैनिक जागरण को गुडबाय कह दिया है. वे दैनिक जागरण की बनारस यूनिट में करीब बीस वर्षों से कार्यरत थे.

रत्नाकर हाल-फिलहाल बनारस आफिस में आउटपुट डेस्क के हेड थे. इसके पहले वे दैनिक जागरण बनारस से संबद्ध कई जिलों में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्यरत रहे. रत्नाकर को प्रतिभावान पत्रकार माना जाता है.

सूत्रों का कहना है कि दैनिक जागरण बनारस में नए संपादक बसंत भारतीय के आने के बाद से उथल-पुथल मची हुई है. बसंत भारतीय से रत्नाकर दीक्षित का समीकरण नहीं बैठ पाया. बसंत ने बनारस यूनिट में आते ही रत्नाकर को आउटपुट डेस्क के इंचार्ज पद से हटाकर डाक डेस्क का प्रभारी बना दिया. सूत्र बताते हैं कि इस बदलाव से खफा होकर रत्नाकर दीक्षित ने इस्तीफा दे दिया. बताया जाता है कि वे आउटपुट या इनपुट इंचार्ज से कम पर नौकरी करने को तैयार नहीं थे.

उधर रत्नाकर के करीबियों का कहना है कि रत्नाकर दीक्षित करीब बीस साल से संस्थान के साथ कार्यरत रहे. वे चेंज चाहते थे. ब्रेक चाहते थे. इसलिए उन्होंने इस्तीफा दिया. वे कुछ समय तक आराम करने के बाद आगे की नई पारी के बारे में फैसला करेंगे. संभव है रत्नाकर कुछ अपना मीडिया प्रोजेक्ट शुरू करें. ये भी संभव है कि वे किसी दूसरे संस्थान के साथ जुड़ जाएं.

ज्ञात हो कि रत्नाकर दीक्षित ‘शहरनामा’ नामक एक साप्ताहिक कालम दैनिक जागरण बनारस के सिटी एडिशन में लिखते थे जो काफी चर्चित था. यह कालम रत्नाकर की तस्वीर और बाइलाइन के साथ प्रकाशित किया जाता था. माना जा रहा है कि रत्नाकर के हटने से दैनिक जागरण को क्वालिटी कंटेंट के लेवल पर नुकसान होगा.

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