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जाम लड़ाने के बदले अभियुक्त बाप-बेटों की साजिशों में भागीदार रहता है अंग्रेजी दैनिक का रिपोर्टर

अब नहीं जलता ‘शरद’ ऋतु का ‘दीप’…

लखनऊ। देश को लगातार गौरवान्वित करने वाले, ओलंपिक और अन्य अंतराष्ट्रीय स्पर्धाओं में मेडल दिलाने वाले और लगातार ऊंचाइयां छू रहे बैडमिंटन खेल को कुछ स्वार्थी तत्व और बिकाऊ कलमें प्रायोजित स्टोरियों के सहारे बदनाम करने की साजिश रच रही हैं। दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि स्वार्थी-साजिशकर्ताओं का शिकार देश का एक प्रतिष्ठित अंग्रेजी समाचार पत्र भी हो रहा है।

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अब नहीं जलता ‘शरद’ ऋतु का ‘दीप’…

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लखनऊ। देश को लगातार गौरवान्वित करने वाले, ओलंपिक और अन्य अंतराष्ट्रीय स्पर्धाओं में मेडल दिलाने वाले और लगातार ऊंचाइयां छू रहे बैडमिंटन खेल को कुछ स्वार्थी तत्व और बिकाऊ कलमें प्रायोजित स्टोरियों के सहारे बदनाम करने की साजिश रच रही हैं। दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि स्वार्थी-साजिशकर्ताओं का शिकार देश का एक प्रतिष्ठित अंग्रेजी समाचार पत्र भी हो रहा है।

इस समाचार पत्र की मालकिन स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं सुविख्यात समाजसेवी परिवार से हैं। उनके अथक परिश्रम एवं संपादकीय कौशल से आज इनका पब्लिकेशन देश के प्रतिष्ठित मीडिया समूहों में शुमार होता है और देश की सेवा कर रहा है। लेकिन इस अंग्रेजी दैनिक में एक रिपोर्टर ऐसा भी है जो अपनी करतूतों और षडय़ंत्र से इस अखबार की छवि में बट्टा लगा रहा है।

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इस पत्रकार के पास शौकनुमा कई लत भी हैं। अपनी गलत आदतों के कारण ये पत्रकार, बैडमिंटन एसोसिएशान के निष्कासित पदाधिकारी और यौन शोषण व गबन के आरोपी विजय सिन्हा और उनके पुत्र निशान्त सिन्हा के हर गलत काम में भागीदार रहता है। हालांकि आजकल यौन शोषण और गबन के अभियुक्त ये पिता-पुत्र भी खासे परेशान हैं, क्योंकि विजय सिन्हा गिरफ्तार होकर जेल में है और उनके पुत्र निशान्त सिन्हा की गिरफ्तारी के लिए पुलिस पीछे पड़ी है, जगह-जगह छापेमारी कर रही है। अभियुक्त निशान्त के बंगलुरू या फिर  दिल्ली में छिपे होने की संभावना जतायी जा रही है क्योंकि इनको खेल जगत के कई लोग इन शहरों में देख चुके हैं।

इन अभियुक्त  पिता-पुत्र के साथ बीबीडी यूपी बैडमिंटन अकादमी को जाम लड़ाने का अड्डा बनाने वाला अंग्रेजी दैनिक का पत्रकार भी आजकल बहुत परेशान है क्योंकि अब  यहां  ‘शरद’ ऋतु में इनकी हरकतों का ‘दीप’ नहीं जलता। पुलिस सूत्रों के अनुसार इस रिपोर्टर को भी पूछताछ के पुलिस कभी भी उठा सकती है।

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गिरफ्तार अभियुक्त विजय सिन्हा व उनके पुत्र निशान्त सिन्हा के हर षडय़ंत्र और गलत काम में सहभागी यह पत्रकार आजकल  ‘अड्डे’ की तलाश में भटक रहा है। पहले इसका अड्डा बीबीडी यूपी बैडमिंटन अकादमी हुआ करता था। अकादमी से अभियुक्त बाप-बेटों (विजय सिन्हा व निशान्त सिन्हा)के तड़ीपार होने के साथ ही इस पत्रकार का भी हुक्का-पानी बंद हो गया। अब बीबीडी यूपी बैडमिंटन अकादमी में न ‘शरद’ ऋतु आती है न ही इनकी हरकतों का ‘दीप’ जलता है।  …सो परेशानी समझी जा सकती है। आखिर जाम लड़ाने के लिए कोई पनाहगाह तो चाहिए।

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अड्डा बंद होने का असर इस पत्रकार की कलम व मनोदशा पर भी पड़ा है, ऐसे में ये अपनी बेसलेस लेखनी से अपने ही संस्थान की बदनामी करा रहा है। जरा सोचिए! जिस संस्थान की सर्वेसर्वा देश के प्रतिष्ठित औद्योगिक घराने की महिला हों, उस संस्था का पत्रकार दो ऐसे अपराधियों (विजय सिन्हा व निशान्त सिन्हा)का हमसफर/हमकदम बन जाये जिनके घृणित कृत्य से पूरा खेल जगत शर्मसार हुआ हो, तब आश्चर्य होता है कि कैसे यह पत्रकार इस प्रतिष्ठित संस्थान में है|

मैं और हमारा संस्थान इस अंग्रेजी दैनिक अखबार और इसकी चेयरपर्सन/मालकिन का बहुत सम्मान करते हैं। लेकिन जब इस अखबार के पत्रकार की कारस्तानी हमारे सामने आयी, तो हम अपना कर्तव्य समझकर इसे प्रकाशित कर रहे हैं ताकि इस सम्मानित अंग्रेजी दैनिक और इसकी मालकिन को पता चल सके यह रिपोर्टर कहां…कहां और कब-कब अपनी हरकतों का ‘दीप’ जलाता है।

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(लखनऊ से प्रकाशित हिंदी अखबार ”वायस आफ लखनऊ” से साभार)

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