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संपादक ने प्रबंधन के साथ मिल कर्मचारियों के साथ किया धोखा

महाराष्ट्र के दूसरे सबसे बड़े समाचार पत्र समूह अंबिका पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित हिन्दी दैनिक ‘यशोभूमि’ के संपादक ने प्रबंधन साथ मिलकर कर्मचारी के साथ शर्मनाक छल किया है। बता दें कि समूह के कर्मचारी कंपनी से लंबे समय से मजीठिया वेज बोर्ड को लागू करने की मांग कर रहे थे। परन्तु कंपनी उन्हें हर बार झूठे आश्वासन देकर बहला देती थी। कंपनी के इस रवैये को देखते हुए कर्मचारियों ने कमगार आयुक्त की शरण ली। जहां से कंपनी जैसे-तैसे करके कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि कर दी।

महाराष्ट्र के दूसरे सबसे बड़े समाचार पत्र समूह अंबिका पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित हिन्दी दैनिक ‘यशोभूमि’ के संपादक ने प्रबंधन साथ मिलकर कर्मचारी के साथ शर्मनाक छल किया है। बता दें कि समूह के कर्मचारी कंपनी से लंबे समय से मजीठिया वेज बोर्ड को लागू करने की मांग कर रहे थे। परन्तु कंपनी उन्हें हर बार झूठे आश्वासन देकर बहला देती थी। कंपनी के इस रवैये को देखते हुए कर्मचारियों ने कमगार आयुक्त की शरण ली। जहां से कंपनी जैसे-तैसे करके कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि कर दी।

ये अलग बात है कि वेतन वृद्घि के बाद बावजूद भी अधिकांश कर्मचारियों का वेतन सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्देशित तथा मजीठिया वेज बोर्ड द्वारा सुझावों से काफी कम है। इतना ही नहीं कर्मचारियों ने एरियर दिलाने के लिए कामगार आयुक्त के यहां हस्ताक्षरित पत्र दिया तो बौखलाए प्रबंधन ने यशोभूमि के संपादक के साथ उनके घर पर जाकर गुप्त मीटिंग की और अगले ही दिन संपादक ने अपने विश्वस्त कर्मचारियों जिनमें से अधिकांश उनके भाई एवं रिश्तेदार है को धमकाते हुए साधे कागज पर हस्ताक्षर कराकर प्रबंधन को सौंप दिया। फिर भी कामगार आयुक्त एरियर के बारे में पूछे जाने पर कंपनी 25 फरवरी, 10 मार्च, 20 मार्च एवं 30 चार किश्तों में एरियर देने का लिखित में आश्वासन दिया।

अपनी बात को सच दिखाने के कंपनी ने कुछ कर्मचारियों के एकाउंट में रुपए तो डाले ये अलग बात है कि 2011 में 8000-9000 रुपये वेतन पाने वाले कर्मचारियों को 479, 780, 2000, आदि रुपए जमा किए हैं। हां कुछ कर्मचारियों के खाते में जरुर 25000-26000 आएं वहीं जिनके खाते में पैसा नहीं आया उनके पूछने पर कहा कि आपका एरियर बनता ही नहीं है, जबकि उन कर्मचारियों का वेतन भी 2014 के अंत तक 15000 के आस-पास था। वहीं कर्मचारियों ने जब इस मामले में संपादक से हस्तक्षेप करने एवं हस्ताक्षरित पेपर वापस दिलाने की मांग की तो उसने उल्टे कर्मचारियों को ही डाट कर भगा दिया। इससे इस बात की संभावना जताई जा रही है कि संपादक ने प्रबंधन से मिल यह सारा गेम खेला है। क्योंकि संपादक महोदय तो पहले से ही कर्मचारियों के उत्पीड़न, उत्तर भारती एकता मंच नाम संस्था चलाने के लिए बदनाम है। अत: इस बात की पूरी गारंटी है कि इस मामले में उसने कंपनी से जोरदार सौदा किया है।

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