राज्य संरक्षित यौन हिंसा के खिलाफ देश भर में प्रदर्शन, निष्पक्ष जांच के लिए नीतीश का इस्तीफा जरूरी

नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन विमेन (एनएफआईडब्लू), स्त्रीकाल, राइड फॉर जेंडर फ्रीडम और अखिल इण्डिया प्रोग्रेसिव वीमेन असोसिएशन, तथा टेढ़ी उंगली द्वारा के संयुक्त आवाहन से राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन के तहत दिल्ली में आज दोपहर बिहार भवन में विभिन्न संगठनों के सैकड़ों इक्क्ठे हुए और मुजफ्फरपुर के शेलटर होम में बच्चियों से बर्बर यौन शोषण का विरोध किया. प्रदर्शन की खबरें देश के विभिन्न हिस्सों से आ रही हैं. प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में गॉड लिए गए गांव ‘परचुर ‘ में भी प्रदर्शन की खबर है.

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह महिलाओं के खिलाफ राज्य संरक्षित यौन हिंसा का एक उदाहरण है। राज्य में 14 अन्य शेलटर होम में इसी तरह के शोषण पहले ही टीआईएसएस के शोधकर्ताओं द्वारा खोजे जा चुके हैं। लेकिन पटना के उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद भी उनके खिलाफ कार्रवाई की गति बहुत धीमी थी। ऐसी खबरें हैं कि इन शेल्टर होम का प्रबंधन और प्रशासन राजनीतिक प्रतिष्ठानों से बहुत अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे की मांग की।

प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए एनएफआईडब्ल्यू की महासचिव एनी राजा ने कहा कि “महिलाओं को 50% आरक्षण देना, लड़कियों के लिए छात्रवृति वितरित करना अलग बात है लेकिन सरकार द्वारा ऐसे क्रूर अपराधों को शेलटर होम्स में समर्थन देना खतरनाक है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसे नारों पर करोड़ों पैसे खर्च करना एक बात है और शेलटर होम की लड़कियों पर ऐसे क्रूर यौन अपराधों को समर्थन कुछ भी नहीं बल्कि सामंती, पितृसत्तात्मक और मनुवादी मानसिकता का परिणाम है। जब तक नीतीश कुमार सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं, तब तक जांच निष्पक्ष नहीं हो सकती है। उन्हें तुरत हटना चाहिए।”

राइड फॉर जेंडर फ्रीडम के राकेश सिंह ने कहा कि शेल्टर होम का प्रबंधन और प्रशासन राजनीतिक रूप से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है, यही कारण है कि उन्हें कोई डर नहीं है और वह शेल्टर होम के कैदियों के साथ संगठित यौन बर्बरता का प्रबंधन कर सकता है। सत्तारूढ़ गठबंधन के कुछ राजनेताओं के नाम पहले ही जुड़ हो चुके हैं, इसलिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को तुरंत इस्तीफा देना होगा अन्यथा आरोपी के खिलाफ कोई पूछताछ आईवाश होगी।

एआईपीडब्ल्यूए प्रतिनिधि सुचेता डी ने भी इस घटना पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा, जब तक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस्तीफा नहीं देंगे तब तक सीबीआई जांच ढंग से नहीं होगी।

आरजेडी संसद के प्रोफेसर मनोज झा और जयप्रकाश यादव भी प्रदर्शनकारियों के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त करने आए। प्रो। मनोज झा ने कहा कि मुजफ्फरपुर शेल्टर होम में जो भी हुआ है वह जघन्य और बर्बर है। उनके पार्टी के व्यक्तियों के नाम मामले में आने के बाद मुख्यमंत्री कैसे अपने कार्यालय में रह सकते हैं। नीतीश कुमार तुरंत जाना चाहिए।

घटना पर बोलते हुए प्रो रतन लाल ने कहा कि मामले में मुख्य आरोपी ‘हेवीवेट’ है और उन्हें राज्य मशीनरी का पूर्ण समर्थन है। इसलिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए अन्यथा मुजफ्फरपुर आश्रय घर के कैदियों के लिए न्याय नहीं होगा। घटना के विरोध में पूर्व राज्यसभा सदस्य अली अनवर भी बिहार भवन आए थे।

60 से अधिक शहरों से इसी तरह के विरोध प्रदर्शन की रिपोर्ट है-प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, द्वारा संसदीय क्षेत्र वाराणसी के गोद लिए गांव हरपुर में भी प्रदर्शन हुआ.अन्य शहरों में पटना, जमुई, लखीसराय, भागलपुर, कटिहार, नवादा, मधुबनी, शेखपुरा, गया, मुंगेर, मोतीहारी, वाराणसी, आजमगढ़, गोरखपुर, इलाहाबाद, जौनपुर, लखनऊ, बुलंदशहर, वर्धा, हल्दवानी, नैनीताल, कुल्लू, जयपुर, रायपुर शामिल हैं। , रायगढ़, कोंडागांव, महासामुंड, रांची, भोपाल, अनुपपुर और बिलासपुर।

मेमोरेंडम की कॉपी यूं है…

To
The government of Bihar
Through the Resident Commissioner
Bihar Bhawan, Chankyapuri, New Delhi

The barbaric sexual exploitation of inmates of Muzaffarpur girls’ shelter home is an example of state protected sexual violence against women. Similar exploitations in 14 other shelter homes in the state have already been unearthed by researchers of TISS. The management and administration of these shelter homes are very well connected with political establishments. This is why the pace of action against them is very slow even after the intervention of High Court of Patna.

This case came to fore two months ago but the law enforcing agencies tried to evade the investigation in this regard. They provided ample time and opportunity to the accused to affect the process of investigation. The main accused is a proprietor and editor of one of the oldest news daily of Muzaffarpur and well connected with the political establishments from Patna to Delhi. Thus the government’s laxity towards the investigation in this matter is evident. On one hand, after the arrest of the director of the shelter home, the police could not take him on remand. Even after appearing the name of a minister’s husband in it, the government is giving a sense of doing something, especially when the opposition brought pressure on the government.

The matter was raised in the Lok Sabha and later the leaders of the Opposition raised the issue in both the houses of Bihar. While the Patna High Court’s stand was also stern, CBI inquiry was recommended. This is a matter of state-protected sexual abuse. This is the first case in itself, in which huge organised sexual violence has taken place under the purview of the government.

We the undersigned demand:

1. CBI must investigate the case under the supervision of the High Court
2. In this case, the investigation should not be limited to Muzaffarpur rather extended to all the shelter homes of the state.
3. Chief Minister should not only dismiss his minister but must resign himself.

मूल खबर…

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