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उत्तर प्रदेश

खबर को Fake बताने पर इस पत्रकार ने सूचना विभाग को ही फर्जी करार दिया, देखें वीडियो

लखनऊ में सांध्य दैनिक 4पीएम के एडिटर इन चीफ संजय शर्मा इन दिनों तहलका मचाए हुए हैं. योगी सरकार के अफसरों की लाख कोशिशें के बाद भी ये ‘सुधर’ नहीं रहे हैं और लगातार योगी सरकार की पोल खोलने के काम में जुटे रहते हैं. सांध्य अखबार तो सरकार के लिए बवाल था ही, अब ये यूट्यूब चैनल भी 4पीएम नाम से खोल दिए हैं जिसमें लाइव डिबेट से लेकर सम-सामयिक मुद्दों पर वीडियो अपलोड करते रहते हैं. देखते ही देखते 4पीएम यूट्यूब चैनल पूरे देश में चर्चित हो गया क्योंकि योगी सरकार की असली खबरें, यूपी की सियासत की असली बहसें यहीं मिलती हैं. इस चैनल पर दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार लगातार लाइव आते रहते हैं और यूपी का हाल-ए-दिल सुनते-सुनाते रहते हैं.

पिछले दिनों संजय शर्मा ने यूपी के विभाजन को लेकर एक खबर अपने डिजिटल चैनल पर अपलोड की. यूपी सरकार के सूचना विभाग ने इस खबर पर Fake का मोहर मार कर ऐसी खबरें दिखाने पर कार्रवाई करने की चेतावनी दे डाली.

जवाब में संजय शर्मा ने फिर एक नया वीडियो अपलोड किया और सिलसिलेवार ढंग से बताया कि उन्होंने तो आधा दर्जन मीडिया हाउसों द्वारा चलाई गई खबरों के आधार पर यूपी के बंटवारे की चर्चाओं को लेकर वीडियो अपलोड किया पर योगी सरकार का सूचना विभाग उन आधा दर्जन बड़े वाले मीडिया हाउसों की खबरों का संज्ञान लेने की बजाय 4पीएम की खबर से हिल जाता है और फौरन सक्रिय हो जाता है.

वीडियो में संजय शर्मा ने यूपी में योगी सरकार के प्रबंधन का काम देखने वाले उनके खास अफसरों शिशिर और नवनीत सहगल का आभार जताया कि वे लोग 4पीएम का खबरों का संज्ञान लेकर 4पीएम को एक बड़ा ब्रांड बनाने के काम में जुटे हुए हैं. साथ ही संजय शर्मा ने सूचना विभाग के बाबूओं द्वारा खबर की पड़ताल कर फेक या सही का सर्टिफिकेट देने की नई परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि आखिर ये सरकारी बाबू कबसे सच और झूठ के जज बन गए. ये सरकारी बाबू तो सच को झूठ और झूठ को सच बनाने के काम के उस्ताद होते हैं. पर जब ये अगर किसी खबर को फेक का सर्टिफिकेट जारी करने लगें तो समझ जाइए कि खबर में वाकई दम है.

संजय यहीं नहीं रुकते हैं. वे कहते हैं कि दरअसल सूचना विभाग में जो खबरों की पड़ताल का विंग है, वह ही फर्जी है क्योंकि वहां सरकारी बाबू बैठे हैं जो झूठ के प्रबंधन के उस्ताद होते हैं. इसी सूचना विभाग में कार्यरत एक युवा कर्मी सुसाइड करता है और लिखित में आरोप लगाता है लेकिन उसे ही न्याय नहीं मिलता है.

देखें संजय का क्रांतिकारी वीडियो-

Sanjay Fake True Video

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