केंद्र सरकार ने मीडिया को दिए 998 करोड़ से ज्यादा के विज्ञापन

दिल्ली : नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने अब तक के कार्यकाल में मीडिया के लिए विज्ञापनों पर 998.34 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। 

राज्यसभा में सूचना एवं प्रसारण मंत्री अरुण जेटली ने पिछले दिनो बताया कि इसमें से 473.67 करोड़ रुपए टीवी, रेडियो, इंटरनेट, डिजिटल सिनेमा आदि क्षेत्रों में कार्यरत मीडिया घरानों को और 424.84 करोड़ रुपए प्रिंट मीडिया को दिए गए। इसके अलावा 81.27 करोड़ रुपए आउटडोर प्रचार पर खर्च हुए हैं। 

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केजरीवाल ने किया विज्ञापन के बजट में कई गुना इजाफा

दिल्ली : आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार ने विज्ञापन के बजट को कई गुना बढ़ाते हुए 526 करोड़ कर दिया है। टेलिविजन ऐड पर विवाद के बाद इन दिनों रेडियो पर केजरीवाल सरकार का 76 सेकंड का एक विज्ञापन भी चल रहा है। सूत्रों के मुताबिक, ‘जो कहा, सो किया’ टैगलाइन के साथ यह विज्ञापन दिन भर में 40 बार चलता है।

अलग-अगल मीडिया रिपोर्ट्स में शीला सरकार के दौरान 2013-14 में दिल्ली सरकार का विज्ञापन और सूचना के लिए बजट करीब 25 से 30 करोड़ रुपये बताया गया है। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी विज्ञापनों में प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और चीफ जस्टिस की तस्वीर के अलावा किसी के भी फोटे के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी थी। इसके तोड़ निकालते हुए ‘आप’ सरकार ने एक टीवी ऐड जारी किया था जिसमें 11 बार केजरीवाल का नाम लिया गया था। 

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गोबर के विज्ञापन के लिए क्रिकेटर, नेताओं-अभिनेताओं में घमासान

आपको पता ही होगा कि दारू से लेकर सीमेंट, मैगी, सरिया आदि के विज्ञापन में परेश रावल, सनी देओल, अक्षय कुमार, अमिताभ बच्चन, ऐश्वर्या राय, ओम पुरी, सलमान खान, हेमा मालिनी, विराट कोहली, शाहरूख खान से लेकर धोनी तक सब दिखायी देते हैं. परेश रावल और हेमा मालिनी तो माननीय सदस्य हैं.

इन लोगों के लिये पैसा सर्वोपरी हैं, उत्पाद नहीं. ऐश्वर्या ने जिन्दगी मॆ भले ही लक्स साबुन नहीं लगाया होगा, लेकिन विज्ञापन में ऐसे दिखाई देती हैं मानो यह उसकी फेवरिट डिश हो. सलमान, अक्षय और शाहरुख दारु का विज्ञापन करते हुए अपने गौरवान्वित महसूस करते हैं. विद्या बालन शौचालय का विज्ञापन करने में बिज़ी हैं.

अब सुनने में आ रहा है कि एक मल्टी नेशनल कम्पनी अपने गोबर का विज्ञापन कराने का प्लान बना रही हैं. नेता, अभिनेता और क्रिकेटर इस विज्ञापन को हथियाने के लिये जोरदार लॉबिंग कर रहे हैं. देखते हैं, सकी किस्मत खुलती हैं. अभी गोबर के लिये लड़ाई हो रही है. हो सकता है कि कुछ दिनो बाद मानव-मल के विज्ञापन के लिये इनमें हाथापाई हो जाये. 

आखिर पैसा बड़ी कुत्ती चीज हैं. इनमें से कई लोगों के पास तो अरबों रुपये हैं, चूंकि इन्हे अपने साथ दौलत ऊपर ले जानी है, इसलिए बेचारे दिन रात पसीना बहाकर फुटपाथ पर सोये हुए लोगों को कुचलने में सक्रिय हैं. भारत माता की जय हो.

महेश झालानी के एफबी वाल से

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जुआ खेलकर रक़म जीतने का लालच देता ये विज्ञापन भड़ास को शोभा नहीं देता!

यशवंत सिंह जी

संपादक, भड़ास4मीडिया

भड़ास को हम सब पत्रकार बहुत गंभीरता से लेते हैं… पर एक ऐसा विज्ञापन देखा कि आपको पत्र लिखने को मजबूर हुआ.. लिखने को तो दस पेज भी लिख सकता हूँ.. मगर आप बुद्धिजीवी हैं… इसलिए पूरा यकीन है कि कम लिखे को ज़्यादा ही समझेंगे… इस मेल के साथ में एक तस्वीर अटैच की है, उसे देखिए… इसमें जो ऑफर है, वो किसी भी नज़रिये से स्वस्थ नहीं कहा जा सकता… जुआ खेलने का ऑफर देकर रक़म जीतने की उम्मीद या लालच देता ये विज्ञापन भड़ास को शोभा नहीं देता… आशा करता हूं कि आप इस पर ध्यान देंगे.

धन्यवाद.

आसिफ खान

Asif Khan

kasif.niaz@gmail.com

आसिफ भाई,

आपने बिलकुल सही प्वाइंट की ओर ध्यान दिलाया है.  हम भड़ास के लोग खुद भी दूसरे न्यूज पोर्टल्स के गंदे विज्ञापनों के खिलाफ छापते रहे हैं. ये जो विज्ञापन भड़ास पर चलते हैं, वह गूगल की तरफ से चलाए जाते हैं. गूगल बहुत ही सोच समझ कर विज्ञापन देता है. जब भी आप क्लिक करते हो तो गूगल नए किस्म का विज्ञापन दिखाता है. ज्यादातर विज्ञापन यूजर की पसंद या सर्च या रुझान के हिसाब से होते हैं. मान लीजिए आप अगर सर्वर तलाश रहे हों और इस बारे में गूगल या जीमेल पर सर्च कर रहे हों, मेल कर रहे हों, तो गूगल के पास फीडबैक पहुंच जाता है कि आप सर्वर की तलाश में है. आपको तब यह सर्वर के विज्ञापन ही दिखाएगा.

इसी तरह जो लोग सेक्स आदि ज्यादा सर्च करते हैं उन्हें गूगल सेक्स रिलेटेड विज्ञापन दिखाता है. मेरे कहने का आशय ये है कि आप को जो विज्ञापन दिखाया गया गूगल द्वारा, जरूरी नहीं कि वह दूसरों को भी दिखाया जा रहा हो. फिर भी, ये जुवे का विज्ञापन बिलकुल गलत है. इसके खिलाफ हम लोग गूगल को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति जताएंगे और ऐसे विज्ञापन न दिखाने को लेकर अनुरोध करेंगे. आपके लेटर को हम भड़ास पर प्रकाशित कर रहे हैं ताकि भड़ास अपनी खुद की आलोचना को भी सुन और छाप सके, साथ ही इसके जरिए हम खुद को सुधार सकें.

आभार

यशवंत सिंह

एडिटर

भड़ास4मीडिया

 

 

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