Shubhranshu Choudhary झूठा व्यक्ति, झूठ की बुनियाद पर खड़ी इमारत का सच जानिए : Smita Choudhary

Smita Choudhary : मेरी इस फेसबुक पोस्ट को कृपया पढें और share करें. साथ ही Shubhranshu Choudhary से प्रश्न करें. इतने झूठे व्यक्ति को अवार्ड मिलने का आधार ही यह है कि वे इंटरनेट का दुरुपयोग कर रहे हैं. यूँ तो किसी को अवार्ड मिले तो वह बधाई का पात्र होता है, लेकिन आधारभूत रूप से झूठ की बुनियाद पर खड़ी इमारत को बधाई नहीं दी जा सकती. झूठ की बुनियाद पर खड़ी इमारत तभी तो ढहेगी जब लोग सच को समझने का प्रयत्न करेंगे. मेरी पोस्ट ये है…

शुभ्रांशु चौधरी


 

Smita Choudhary : It is interesting to note that two of the nominees are known to have cases of domestic violence pending against them. They are known to have disregarded the people, the law and all that they say they stand for. I am learning the politics behind the awards. There was a time when we ( as in the CGNet Swara that I co founded) said that Awards were given to crush possibilities that were not convenient. And then our friends said that we had sold out for the growth of CGNet- actually what they meant was that the founder had sold out. They were right.

I can see that the name and fame game went to my husbands head and the person who could stand up for injustice done by his friends is now being feted for making CGNet a voluntary platform which stands for cheap technology which can grown like temples- after accepting 400,000 dollars in foreign funds and not being able to account for it? And that too by the way was not the idea of the man who claims to be the sole founder – it was the idea of a young Ashoka Fellow- Arjun Venkatraman,
And what is the credibility? The divorce petition filed by my husband in which he acknowledges both our contributions to CGNet albeit in a manner which was that of a bully. And yet, he fails to acknowledge me as co founder in any award winning ceremony. And he takes credit for Hacker Gram, and did all he could to damage both of us. Do I mind- Like Hell I do !

The idea and its implementation was mine- He was the face. Did I mind? No. Because I could say I was his wife. Proudly. Then I see that in spite of being such a horrible husband he is one of the top 100 thinkers. Then I wonder if the world is thinking at all. And then I don’t wonder. I know. And what can one mind about mindlessness. They say that people with the personality disorder he has cannot think beyond themselves. I wait for him to get insight- unlikely he will turn up at the psychiatrists or the courts.

स्मिता चौधरी के फेसबुक वॉल से.

पूरे प्रकरण को जानने-समझने के लिए इन्हें भी पढ़ें…

शुभ्रांशु चौधरी ग्लोबल थिंकर सूची में शामिल

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शुभ्रांशु पर ‘सीजी नेट’ की को-फाउंडर स्मिता चौधरी ने लगाए कई आरोप

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सीजीनेट वाले शुभ्रांशु चौधरी को एक्सपोज करेंगी उनकी पत्नी स्मिता चौधरी, पढ़िए मेल

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ग्लोबल थिंकर सूची में शुमार शुभ्रांशु चौधरी पर ‘सीजी नेट’ की को-फाउंडर स्मिता चौधरी ने लगाए कई आरोप

Dear Yashwant ji,

I have been doing what I can, and I would like you to consider writing about this professionally. Clearly I am not going to be a more successful journalist than Shubhranshu, but the alternate platform which I have co founded with Shubhranshu CHoudhary, has been completely taken over by him. He has removed anyone who is able to think- and now he has got this award for being a thinker.

I am not a romantic enough to see this award as a certificate- but I cannot also let each award pass by without seeing any effect on Shubhranshu or CGNet. He is disregarding every law and has forgotten all the wonderful ethical stuff that was the basis of CGNet as a concept. So many young journalists have taken training and done internship and got jobs with CGNet- I am really distressed that only two people have bothered to enquire about this issue.

I do think this satisfies every criteria for good journalism as a story. CGNet was set up to be alternate media- and now one person is controlling it totally and in a most non democratic manner. I have been posting on my blog and page- and I am only an engineer by training. It is sad to see so many journalists on my page and in my life- and be told that this is my personal problem. So then why do you want to write about a woman being raped?

Why should a woman have the courage to report domestic violence? Why have mahila Thana and counselling centers? Why have a page called Patrakar Praxis? I mean, what is your agenda? To cover up for anyone who gets awards? At least have the courtesy to call and ask for proof of what I am saying. I expect you to share this on your wall- and for a team to be put together- because I know that SHubhranshu has threatened people – and like I said, the two people who have taken this up are trying to be brave and SHubhranshu CHoudhary is still bullying them.

Smita Choudhary

मूल खबर…

शुभ्रांशु चौधरी के बारे में सूचना

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हिन्दी दैनिक जन माध्यम के मुख्य सम्पादक और पूर्व आईपीएस मंजूर अहमद का फर्जीवाड़ा

: जन माध्यम के तीन संस्करण चलाते हैं मंजूर अहमद : दूसरे की जमीन को अपने गुर्गे के जरिए बेचा, खुद बने गवाह : ताला तोड़कर अपने पुत्र के मकान पर भी कराया कब्जा, पुलिस नहीं कर रही मुकदमा दर्ज : लखनऊ, पटना व मेरठ से प्रकाशित होने वाले हिन्दी दैनिक समाचार पत्र जन माध्यम मुख्य सम्पादक, 1967 बैच के सेवानिवृत्त आई0पी0एस0 अधिकारी एवं लखनऊ के पूर्व मेयर एवं विधायक प्रत्याशी प्रो0 मंजूर अहमद पर अपने गुर्गे के जरिए दूसरे की जमीन को बेचने व खुद गवाह बनने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। प्रो0 मंजूर अहमद के इस फर्जीवाड़े का खुलासा खुद उनके पुत्र जमाल अहमद ने किया।

जमाल अहमद ने बताया कि अपनी नौकरी के दौरान मंजूर अहमद ने अरबों रूपयों की नामी-बेनामी सम्पत्ति बनाई है। लखनऊ के नजदीक जनपद बाराबंकी, कुर्सी रोड के ग्राम गुग्गौर में मंजूर अहमद ने अपने सगे भांजे मों0 निजामुद्दीन पुत्र एनुलहक निवासी खालिसपुर जिला सीवान बिहार, जो ड्रग्स बेचने का धंधा करते थे, कई साल तिहाड़ जेल में बंद रहे, के नाम ग्राम गुग्गौर में गाटा सं0 385 क्षेत्रफल 1.481 हेक्टेयर भूमि खरीदी। मों0 निजामुद्दीन का लोकल पता सी-189, इन्दिरानगर लखनऊ यानि मंजूर अहमद के अपने घर का पता लिखाया। इसी बेशकीमती करोड़ों-अरबों  की जमीन पर अब प्लाटिंग की जा रही है। इस जमीन को दिनांक 27.08.2013 को बही सं0 1, जिल्द सं0 3099, पृष्ठ सं0 347 से 400 क्रमांक 5881 पर रजिस्टर्ड किया गया है।

श्री मंजूर अहमद ने इस जमीन को धोखे से बेचा है एवं जालसाजी की है, जिस व्यक्ति को मंजूर अहमद ने मों0 निजामुद्दीन निवासी बिहार बताया है, वह कोई बहुरूपीया है एवं मंजूर अहमद का गुर्गा है, क्योंकि रजिस्ट्री में गवाह मंजूर अहमद स्वयं हैं। मों0 निजामुद्दीन ने स्वयं रजिस्ट्री नहीं की है, बल्कि उनके नाम से किसी फर्जी आदमी को खड़ा करके रजिस्ट्री की गई है। उप निबंधक कार्यालय में इस फर्जी निजामुद्दीन की डिजिटल फोटो व डिजिटल अंगूठे के निशान मौजूद हैं।  जमाल अहमद ने बताया कि उनके पिता ने तीन शादियां की एवं तीनों पत्नियां जीवित हैं, वह उनकी पहली पत्नी के पुत्र हैं। जमाल ने बताया कि उनके सगे नाना स्व0 खुर्शीद मुस्तफा जुबैरी बिहार कैडर के 1953 बैच के आई0ए0एस0 अधिकारी थे, उनकी मौत एक किराए के मकान में हुई थी, आज भी उनकी नानी, मां एवं उनकी अविवाहित बहन किराए के मकान (गौतम कालोनी, आशियाना नगर फेस-2, पटना) में ही रहते हैं।

जमाल ने बताया कि मंजूर अहमद अपनी हवस के चलते गैंग बनाकर आदतन अपराध करते हैं। दूसरे की सम्पत्ति पर कब्जा करना, व्यवधान डालना इनकी आदत है। जमाल ने बताया कि उनके मकान 1/140 विश्वास खण्ड, गोमती नगर, लखनऊ पर भी मंजूर अहमद की नीयत खराब है। मकान का ताला तोड़कर श्री मंजूर अहमद, श्री यूसुफ अयूब व अन्य लोगों ने कब्जा कर लिया, जिसके खिलाफ वह लगातार दिनांक 14.05.2014 से एफ़0आई0आर0 दर्ज कराने का प्रयास कर रहा है।

इसी क्रम में उन्होंने दिनांक 28.10.2014 को महामहिम राज्यपाल महोदय, से मिलकर न्याय की गुहार लगाई थी। महामहिम जी ने अपने ए0डी0सी0 श्री गौरव सिंह, आई0पी0एस0 के माध्यम से एस0एस0पी0 लखनऊ को फोन कराकर जमाल के साथ न्याय करने के लिए कहा था। एस0एस0पी0 लखनऊ ने दिनांक 31.10.2014 को थानाध्यक्ष गोमती नगर, जहीर खान को फोन पर निर्देश दिए कि प्रकरण में एफ़0आई0आर0 दर्ज की जाए। थानाध्यक्ष गोमतीनगर ने उनके प्रार्थना पत्र को देखते ही कहा कि मंजूर साहब तो अच्छे अधिकारी रहे हैं, एफ़0आई0आर0 दर्ज होने से साहब की बड़ी बदनामी हो जाएगी। थानाध्यक्ष ने कहा कि वह एस0एस0पी0 साहब से बात कर लेंगे। एफ़0आई0आर0 दर्ज नहीं होने पर ही जमाल ने दिनांक 03.11.2014 को मुख्य सचिव उ0प्र0 से मुलाकात की, जिस पर उन्होंने प्रमुख सचिव गृह को कार्यवाही के निर्देश दिए। प्रकरण पर प्रमुख सचिव गृह ने स्वयं दिनांक 03.11.2014 को ही एस0एस0पी0 लखनऊ से वार्ता कर उनको न्याय देने की बात कही।

जमाल ने बताया कि अभी तक एफ0आई0आर0 इसलिए दर्ज नहीं हो सकी क्योंकि  उनके पिता मंजूर अहमद, आई0पी0एस0, ए0डी0जी0 उ0प्र0 के पद से रिटायर अधिकारी हैं, मंजूर अहमद लखनऊ से मेयर एवं विधायक का चुनाव लड़ चुके हैं, कई विश्व विद्यालयों के कुलपति रह चुके हैं एवं वर्तमान में शुभार्ती वि0वि0 मेरठ के कुलपति हैं। उनके पिता के खास गुर्गे यूसुफ थाना क्षेत्र गोमतीनगर लखनऊ में ही जीरो डिग्री बार, रेस्टोरेन्ट व डिस्कोथेक चलाते है। इनकी दबंग छवि व बार आदि के चलते स्थानीय पुलिस से उनके अच्छे संबंध जगजाहिर हैं।

मंजूर अहमद किस हद तक सम्पत्ति के भूखे हैं, इसका अंदाजा इसी से होता है कि इन्होंने अपनी एक कोठी शेरवानी नगर, मडि़यांव, लखनऊ से ठीक सटे एक प्लाट दस हजार वर्ग फीट पर लिखा दिया कि प्लाट बिकाऊ नहीं है, ताकि लोग विवादित समझकर प्लाट न खरीदें। इनके पास एक मकान बी-102, वसुन्धरा इन्क्लेव दिल्ली में है। सी-189, इन्दिरा नगर, लखनऊ में मकान है, इसके अलावा कई सम्पत्तियां हैं। मंजूर अहमद के खास गुर्गे यूसुफ के पास लखनऊ में ही करोड़ों रुपये की अपनी सम्पत्ति है। यूसुफ का लखनऊ में ही नाका क्षेत्र में जस्ट 9 इन नाम का होटल, गोमतीनगर, लखनऊ में जीरो डिग्री बार व रेस्टोरेन्ट है, अपना स्वयं का मकान 107 गुरू गोविन्द सिंह मार्ग, लालकुआं, लखनऊ के साथ ही और भी कई सम्पत्तियां हैं। साथ ही यूसुफ लगभग पांच कम्पनियों के मालिक भी हैं।   जमाल ने बताया कि वह पुनः दिनांक 08.11.2014 को एस0एस0पी0 से मिले तो एस0एस0पी0 ने पूरे मामले को समझने के बावजूद कहा कि प्रकरण सिविल नेचर का है, वह जांच करवा लेंगे, जबकि सबको पता है कि ताला तोड़कर जबरन कब्जा किया गया है।  जमाल के अधिवक्ता विनोद कुमार ने एस0एस0पी0 से मांग की है कि तत्काल एफ0आई0आर0 दर्ज करके जमाल के साथ न्यायोचित कार्यवाही की जाए।

दिनांक 15.11.2014

(जमाल अहमद)
पुत्र श्री मंजूर अहमद
निवासी- 1/140, विश्वास खण्ड,
गोमतीनगर, लखनऊ
09654871990 (मो0)

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जी न्यूज मेरी इज्जत के साथ खेल रहा है : जिंदल

जी न्यूज चैनल के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सांसद व जिंदल स्टील एंड पॉवर लिमिटेड के चेयरमैन नवीन जिंदल ने बृहस्पतिवार को पुलिस आयुक्त भीमसेन बस्सी से मुलाकात की। करीब 20 मिनट की मुलाकात में जिंदल ने बस्सी को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की प्रति भी सौंपी, जिसमें दिल्ली पुलिस को जांच आगे बढ़ाने को कहा गया है। जिंदल का आरोप है कि कोल ब्लाक आवंटन घोटाला मामले में जी न्यूज ने जानबूझकर लगातार उनके खिलाफ गलत खबरे प्रसारित कर उनकी छवि खराब की।

कांग्रेस सांसद नवीन जिंदल दोपहर करीब 12 बजे पुलिस मुख्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने भीमसेन बस्सी से और क्राइम ब्रांच के विशेष आयुक्त ताज हसन से मुलाकात की। पत्रकारों से बातचीत में नवीन जिंदल ने कहा कि जी न्यू उनकी इज्जत के साथ खिलवाड़ कर रहा है। पुलिस आयुक्त से मिलकर कार्रवाई में तेजी लाने का अनुरोध किया है। मामले में पुलिस पूरक आरोप पत्र दाखिल करेगी। बस्सी ने पत्रकारों को बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को वह पहले पढ़ेंगे, उसके बाद आरोपियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। पूरक आरोप पत्र के बारे में उन्होंने कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया। गौरतलब है कि इससे पूर्व 8 अप्रैल को नवीन जिंदल ने पुलिस आयुक्त से मुलाकात कर मामले में कार्रवाई की मांग की थी। उस दौरान जी न्यूज व जी बिजनेस के संपादकों के खिलाफ पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल नहीं किया था।

कोल आवंटन घोटाला मामले में जी न्यूज में अपने खिलाफ कई दिनों तक खबरें दिखाए जाने पर पिछले साल नवीन जिंदल ने पुलिस आयुक्त से मिलकर चैनल के दो संपादकों सुधीर चौधरी व समीर अहलुवालिया के खिलाफ सरकारी दस्तावेजों से छेड़छाड़ करने संबंधी शिकायत की थी। क्राइम ब्रांच ने मामला दर्ज कर दोनों संपादकों को गिरफ्तार भी किया था, लेकिन बाद में उन्हें जमानत मिल गई। जिंदल ने अपने दावे के पक्ष में एक स्टिंग भी सौंपा था। इसमें दिखाया गया कि दोनों संपादक कैसे उनसे खबरें न प्रसारित करने की एवज में 10 करोड़ रुपये की मांग कर रहे हैं। जी न्यूज के खिलाफ दर्ज मामले में क्राइम ब्रांच ने जो आरोप पत्र दायर किया था, उस पर मुख्य महानगर दंडाधिकारी अदालत (सीएमएम कोर्ट) ने 4-5 तथ्यों पर सवाल उठाते हुए जवाब देने का आदेश दिया था। इस पर दिल्ली पुलिस सेशन कोर्ट चली गई। सेशन कोर्ट ने मुख्य महानगर दंडाधिकारी कोर्ट को अपने दायरे में रहकर पहले मामले में संज्ञान लेने का आदेश दिया। इसी दौरान आरोपी संपादकों ने दिल्ली उच्च न्यायालय में पुलिस कार्रवाई के खिलाफ याचिका दायर की। उच्च न्यायालय ने सेशन कोर्ट के फैसले को सही ठहराया। इसके बाद आरोपी सुप्रीम कोर्ट चले गए। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि पहले दिल्ली पुलिस मामले में निष्पक्ष जांच करे फिर पूरक आरोप पत्र दायर कर कार्रवाई करे। बता दें कि इस मामले में जी न्यूज समूह के मालिक तथा उनके बेटे से भी पूछताछ की गई थी।

नवीन जिंदल ने लिखा पुलिस आयुक्त को पत्र

जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड के चेयरमैन नवीन जिंदल ने जी न्यूज उगाही मामले में सुप्रीम कोर्ट के 10 नवम्बर के आदेश का हवाला देते हुए जल्द पूरक आरोपपत्र दाखिल करने का अनुरोध करते हुए पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखा है। जिंदल ने पुलिस आयुक्त भीमसेन बस्सी को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि वह दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा में दर्ज मामलों की जांच आगे बढ़ाते हुए पूरक आरोप पत्र दाखिल करवाएं। पत्र में नवीन जिंदल ने कहा कि 2012 में दर्ज प्राथमिकी के तहत जी न्यूज के मालिक सुभाष चंद्रा, संपादक सुधीर चौधरी व समीर अहलूवालिया के खिलाफ पटियाला हाऊस स्थित मुख्य महानगरीय मैजिस्ट्रेट की अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है।  अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने 6 जनवरी 2014 को आपराधिक पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए इस आरोपपत्र की वैधता व प्रामाणिकता पर अपनी मुहर लगाई एवं मुख्य महानगरीय मैजिस्ट्रेट की अदालत द्वारा की गई प्रतिकूल टिप्पणियां रद्द कर दीं।

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