दैनिक जागरण कर्मचारी यूनियन पंजाब का गठन

दैनिक जागरण में इन दिनों मजीठिया वेतन आयोग को लेकर जद्दोजहद जारी है। इस बीच दैनिक जागरण लुधियाना व जालंधर यूनिट के कर्मचारियों ने एकजुटता दिखाते हुए अपनी यूनियन भी गठित कर ली है। दैनिक जागरण कर्मचारी यूनियन पंजाब का रजिस्ट्रेशन होने पर शुक्रवार को कर्मचारियों में खुशी का माहौल रहा।

दैनिक जागरण लुधियाना के सभी कर्मचारियों ने कार्यालय में लड्डू बांटकर अपनी खुशी का इजहार किया। इसके अलावा जालंधर में भी यूनियन सदस्यों की ओर से लड्डू बांटे गए। इस दौरान कर्मचारियों से किसी के बहकावे में न आने व एकजुट रहने की अपील की गई।

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None of major newspapers of Punjab has implemented the Majithia says the affidavit of the State Labour Commissioner

The reports of Special Labour Inspectors appointed by the State Governments on the direction of the Hon’ble Supreme Court of India vide its order of 28.04.2015 to find out the status of the implementation of the Majithia Award in newspapers has now started trickling in. Sikkim has been the first Government, which sent its report through its Chief Secretary almost a month ago.

 

Given the alacrity shown by the Government of NCT of Delhi, it was expected that it would take the lead in filing the report but unfortunately, it is proving to be a laggard. Frankly speaking, all eyes are set on Delhi because most of the important newspapers come out from the national capital and it would interesting to know that how these big newspapers send the law and law enforcers on holiday.

There are four main newspapers in Punjab namely; the Punjab Kesari, Dainik Jagran, Dainik Bhaskar and the Ajit. However, none of these four major newspapers has implemented the Award. This has been stated in the affidavit of the Labour Commissioner of Punjab Harbhupinder Singh Nanda submitted in the Supreme Court of India with an advance copy to the undersigned.

Thus, the Punjab has become the second state, which has filed its report, which provides very revealing and startling information. It says that there are 531 newspaper establishments, which are regularly functioning from the State of Punjab. Out of these 442 are self-managed by the owners, as they do not employ anybody. Out of the rest 89 establishments, only four have implemented and they are H.T. Media Ltd. of Mohali having 94 employees on rolls and the other three are the Chardikala of Patiala, and the Tribune of Jalandhar and Bhatinda with 14, 59 and 18 employees respectively.

One fact is, nevertheless, incontrovertible that almost all newspapers either have withheld the information or have given false information. Surprisingly, the State Government has not initiated any action against any of the erring newspapers so far. As far as the H.T. Media Ltd., the publisher of the important daily, The Hindustan Times, is concerned, it has fed very wrong information to the Inspectors about the number of employees, the revenue of the newspaper and its classification etc; and the state officials have, no wonder, accepted them without any demur.

Now the onerous responsibility has fallen on the journalists and non-journalists working for different newspapers of Punjab to debunk and nail the lies of the newspaper proprietors particularly of the H.T. Media Ltd., which is out to throw dust rather chilli powder in the eyes of all, the workers, the public, the administration and the judiciary. Let the truth prevail. Sikkim has stated that there is no newspaper in the state, where the Majithia Award could be applicable and this appears to be ex facie correct.

Parmanand Pandey

Secy. Gen.

IFWJ

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पंजाब में आतंकी अटैक के लाइव टीवी प्रसारण पर सूचना मंत्रालय ने दी कार्रवाई की चेतावनी

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने न्यूज और करेंट अफेयर्स चैनलों को आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन की कवरेज के संबंध में जारी एक तात्कालिक हिदायत में कहा है कि आज पंजाब के गुरदासपुर में आतंकवाद विरोधी अभियान का कुछ न्यूज और करेंट अफेयर्स चैनलों ने प्रसारण किया। यह प्रसारण वहां नियुक्त अधिकारी के अनुमति के बिना उस समय प्रसारित किया गया, जब ऑपरेशन उस समय चल रहा था।   

गौरतलब है कि केबल टेलिविजन नेटवर्क (संशोधन) नियम, 2015 में कहा गया है कि सुरक्षा बलों द्वारा यदि किसी आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन को अंजाम दिया जा रहा हो तो उसकी लाइव मीडिया कवरेज नहीं की जाएगी बल्कि टेलिविजन चैनल सिर्फ अभियान की समाप्ति के बाद सरकार की तरफ से नियुक्त अधिकारी द्वारा समय-समय पर दी जाने वाली जानकारी को ही दिखा सकते हैं।

मंत्रालय ने कहा है कि इस तरह का प्रसारण केबल टेलिविजन नेटवर्क (संशोधन) नियम, 2015 का स्पष्ट उल्लंघन है। इस आधार पर ये कार्रवाई के लिए उत्तरदायी है। मंत्रालय ने चैनलों से इस तरह की हरकतों को तुरंत प्रभाव से बंद करने को कहा है।

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तीन साल से वेतन न मिलने पर लामबंद हुए मीडियाकर्मी, डिप्टी सीएम से मिलेंगे

कोक कम्पनी के बैनर तले पंजाब में बोटलिंग प्लांट से पानी को कोल्ड ड्रिंक का रूप देकर करोड़ो रुपये के वारे न्यारे करने वाले जसपाल कंधारी पिछले तीन सालों से मीडिया कर्मियों का शोषण कर रहे हैं। इसके खिलाफ अब पंजाब में पीड़ित मीडियाकर्मी मोर्चा खोलने जा रहे हैं और जल्द ही पंजाब के डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल से मिल कर जसपाल कंधारी और उनके चैनल टीम के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग करेंगे.

उद्योगपति जसपाल कंधारी ने अपनी मीडिया कम्पनी कनसन प्राईवेट लिमिटेड के जरिये अगस्त 2010 में ‘डे एंड नाईट चैनल ‘ को बड़े धूमधाम से शुरू किया था। उनको उमीद थी कि 2012 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनावो में अगर कांग्रेस पार्टी की सरकार बन जाएगी तो उनको इस चैनल के जरिये बड़ा व्यापारिक फायदा पहुंचेगा . कांग्रेस नेताओं को अपनी तरफ करने के लिए कंधारी ने अपने चैनल ‘डे एंड नाईट चैनल‘ के जरिये तब की पंजाब की सत्ता पर काबिज अकाली – भाजपा सरकार के खिलाफ अभियान भी चलाया और पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल व डिप्टी मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर केबल माफिया, रेत माफिया, ट्रांसपोर्ट माफिया, भू माफिया के आरोप लगाते हुए निशाने भी साधे।

उन पर लोगों का शोषण करने के भी आरोप लगाये . उस समय चैनल की तरफ से स्टाफरों  और स्ट्रिंगरों को मोटे वेतन भी दिए गये लेकिन 2012 में हुए पंजाब विधानसभा चुनावों में जब पंजाब में कांग्रेस की हार हो गयी तो इस कंधारी की आशाएं धरी की धरी रह गयीं. फिर क्या था, जो कंधारी अपने चैनल के जरिये अकाली – भाजपा सरकार को लोगों का शोषण करने वाली सरकार कह कर सम्बोधित करते थे, अपने चैनल में काम करने वाले मीडिया कर्मियों का शोषण करना शुरू कर दिया। उन्हें उनका वेतन दिए बिना काम करवाते रहे। 

जब मीडिया कर्मी अपने वेतन की मांग करते तो चैनल में बड़े पदों पर काम करते लोग उनको झूठे आश्वासन देते रहे कि उनका पूरा वेतन जल्द ही मिल जायेगा. उन आश्वासनों को आज कई साल से ज्यादा का समय बीत चुका है लेकिन मीडिया कर्मियों को फूटी कौड़ी नही मिली. अब हालात यह हो चुके हैं कि चैनल में ऊँचे पदों पर काम करने वाले तो मौज कर रहे हैं लेकिन छोटे पदों पर काम करने वाले स्ट्रिंगरों की हालत भूखे मरने जैसी हो गयी है. अब चैनल के शोषण से त्रस्त स्ट्रिंगरों ने कंधारी और ऊँचे पदों पर काम करने वाले लोगो के खिलाफ मोर्चा खोलने का फैसला किया है. 

स्ट्रिंगरो ने बादल परिवार के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले चैनल के मालिक और उसके पदाधिकारियों की शिकायत पंजाब की अकाली – भाजपा सरकार में डिप्टी मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल और लोक संपर्क मंत्री विक्रम जीत सिंह मजीठिया से करने का फैसला किया है। वह उनसे मिल कर मीडिया कर्मियों का शोषण करने वालों के खिलाफ मामला दर्ज कर कई सालो से रुकी पड़ी तनख्वाह रिलीज़ करवाने की मांग करेंगे, साथ ही क़ानूनी लड़ाई भी लड़ी जाएगी. बादल सरकार की पोल खोलने का प्रोपेगंडा करने वाले इस चैनल का पर्दाफाश अब इसी चैनल के लोग करेंगे.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

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अदालत ने पंजाब केसरी के पत्रकार से वसूला 10 हजार रुपए जुर्माना

पंजाब के रोपड़ जिले की सी.जे.एम. अदालत ने जिले के क्षेत्र चमकौर साहिब के पंजाब केसरी के एक पत्रकार को गलत खबर प्रकाशित करने के आरोप में 10 हजार रुपए जुर्माना ठोका है और जुर्माने की रकम माननीय अदालत द्वारा आरोपी पत्रकार से मौके पर ही वसूल ली गई है। पता चला है कि गुरमीत सिंह पुत्र गुरमुख सिंह गांव महितोतां जोकि चमकौर साहिब में साइकिल स्टैंड के ठेकेदार थे, के खिलाफ 2009 में पंजाब केसरी के पत्रकार पवन कौशल ने बिना सोचे-समझे एक खबर प्रकाशित कर दी थी। इस संबंध में जब गुरमीत सिंह ने पवन कौशल से पूछा तो वह अपनी पत्रकारिता व अखबार मालिकों तक पहुंच की धौंस दिखाने लगा।

इस पर गुरमीत सिंह ने पत्रकार पवन कौशल पर रोपड़ की माननीय अदालत में मानहानि का केस कर दिया। पवन कौशल ने लाख बचने की कोशिश की लेकिन आज माननीय अदालत ने जो फैसला सुनाया उससे देशवासियों को यकीन हो गया है कि सचमुच देश की अदालत बेगुनाह लोगों की मदद करती है और दोषियों को सजा देती है। इस दौरान अदालत में पहुंचे अन्य केसों से संबंधित सभी लोग पंजाब केसरी के पत्रकार पवन कौशल को देखकर हैरान हो रहे थे कि क्षेत्र का जानामाना पत्रकार पवन कौशल आज सिर झुकाए माननीय अदालत में जुर्माने की रकम अदा कर रहा है। कुछ लोगों ने तो पत्रकार पवन कौशल को फटकार भी लगाई।

लोगों का कहना है कि अपने पत्रकारों को शह देकर विजय चोपड़ा ने पत्रकारिता का सिर झुका दिया है। वह हर झूठी खबर छापने पर अपने पत्रकार को संरक्षण देता है। पंजाब केसरी ग्रुप के पत्रकार पवन कौशल को जुर्माना होने के बाद उन सब लोगों को भी इंसाफ की आस जगी है जिन्होंने पंजाब केसरी के मालिक विजय कुमार चोपड़ा पर मानहानि के केस कर रखे हैं। उल्लेखनीय है कि विभिन्न अदालतों में विजय चोपड़ा पर 500 से ज्यादा मानहानि के केस चल रहे हैं।

विजय चोपड़ा लम्बे समय से इन केसों को किसी न किसी बहाने लटकाता चला आ रहा है। इसके बावजूद बहुत से केस अब फैसले के निकट पहुंच चुके हैं तथा इंसाफ के इंतजार में बैठे लोगों को शीघ्र इंसाफ मिलने की उम्मीद है। कुछ मामलों में विजय चोपड़ा को सजा भी सुनाई जा चुकी है लेकिन उसने ऊपरी अदालतों में अपील कर जमानत ले रखी है लेकिन कानून के माहिरों का कहना है कि, ‘बकरे की मां आखिर कब तक खैर मनाएगी।’

इसके अलावा विजय चोपड़ा पर पेड न्यूज (पैसे लेकर खबरें छापना) के भी कई केस चल रहे हैं। चुनावों के दौरान पंजाब केसरी व जगबाणी में पैसे लेकर बहुत-सी खबरें प्रकाशित की गई थीं। जिस संबंध में चुनाव आयोग ने कड़ा संज्ञान लिया था। (साभार- दैनिक सवेरा)

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शिअद-भाजपा सरकार ने केबल माफिया से मिलकर नहीं लांच होने दिया एबीपी ग्रुप का पंजाबी न्यूज चैनल, विरोध में प्रदर्शन

: ब्लैकआउट के जरिए ‘एबीपी सांझा न्यूज’ चैनल बंद कराने वाले बादल सरकार और केबल माफिया के खिलाफ मीडियाकर्मियों का प्रदर्शन : पंजाब में मीडिया की हालत बहुत खराब है. केबल माफिया का काला साम्राज्य इस कदर फैला और मजबूत है कि अगर कोई नया चैनल सत्ता-प्रशासन के खिलाफ पत्रकारिता करता है तो उसे पूरी तरह ब्लैकआउट कर दिया जाता है जिसके कारण चैनल की पहुंच आम लोगों तक नहीं हो पाती. यही कारण है कि आनंद बाजार पत्रिका समूह के नए आने वाले पंजाबी न्यूज चैनल ‘एबीपी सांझा न्यूज’ को लांच से पहले ही बंद करना पड़ा. इस चैनल के कर्मियों को तीन महीने की सेलरी देकर चैनल बंद किए जाने की सूचना दी गई.

इस कारण करीब 200 कर्मचारियों को बेरोजगार होना पड़ा है जिसमें करीब 100 लोग संपादकीय विभाग के हैं. पंजाब में शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी की मिली जुली सरकार है. इस सरकार की केबल माफिया से मिलीभगत है. इसी कारण किसी स्वतंत्र आवाज को यहां दबा दिया जाता है. इस तानाशाही के खिलाफ सैकड़ों मीडियाकर्मियों ने प्रदर्शन किया और पंजाब के बादल सरकार की निंदा की. इस प्रदर्शन की कुछ तस्वीरें और हिंदुस्तान टाइम्स में छपी खबर की रिपोर्ट यहां दिया जा रहा है…

Channel closure: Protest held against Badal govt, cable ‘mafia’

Chandigarh : Sacked employees of ABP Sanjha News, a Punjabi channel of the Anandabazar Patrika group that closed down on Wednesday after non-access to the cable network in Punjab, held a protest march in Sector 17 here on Thursday against what they termed the “cable network mafia” of the state. The channel management had reportedly cited the virtual blackout of the channel by Fastway Transmissions Private Limited, which covers around 75% of the cable network in Punjab, as the prime reason for closure. The channel’s content was mostly available on video-sharing websites like YouTube but could never be aired at large. The group runs leading channels including ABP News in Hindi.

On Wednesday, the group’s human resources head Satyakki Bhattacharjee had gathered staff at the Sanjha office in SAS Nagar and announced the pack-up. He had also announced three months’ salary for staff to be let off, and added that even if they ran the channel on the digital, direct-to-home (DTH) network, they won’t be able to sustain it. This had left 200 employees, including 100 in the editorial operations, jobless. Many of them gathered in Sector 17 on Thursday and alleged that the SAD-BJP government was hand in glove with the cable mafia and “wants to gag every independent voice in the state”. Holding placards, the around 150 protesters raised slogans of ‘Down with Badal sarkar’ and against the cable mafia, gathered at Sector 17 Plaza. The sacked employees have now formed a Journalist Action Committee to organise Punjab-wide protests against the cable mafia and the Parkash Singh Badal-led government.

“We shouldn’t forget that those who are today shutting down one after another news channel, also aspire to gag every critical voice, be it even in the form of newspapers or magazines,” said Punjab and Haryana high court lawyer Rajwinder Bains who was also part of the protest. Another high court lawyer, Navkiran Singh, said if the political establishment of the state was allowed to go on like this, “soon there will be no independent media voice to report atrocities by the police and the State”.

Under similar circumstances, another private channel, Day and Night News, had had to severely scale down its operations last year. It was alleged then too that the state government was patronising a certain news channel and protecting its turf by virtually blanking out potential competitors on cable TV. Congress leader Sukhpal Singh Khaira was also present to express solidarity and said such moves were destroying the future of many young journalists. “The Badal family wants that the people of the state watch only those channels that it owns,” he remarked.

Among those who addressed the gathering were documentary filmmaker and journalist Daljit Ami, Aam Aadmi Party (AAP) leaders Manjeet Singh and Rajeev Godara, and NGO Students for Society’s (SFS) representative Arshdeep Kaur. “This closure must be seen as a dark sign of a bleak future,” said Arshdeep. Journalists from some other media organisations that were purported victims of the cable mafia addressed the protesters too.

Even ABP’s HR head Bhattacharjee wrote on social networking website Twitter on Wednesday: “Very Sad And Very Angry At The Same Time. Death of Journalism in Punjab. courtesy local system (sic)”. At the colure announcement, sources had told HT on Wenesday, Bhattacharya had said the top management of the group from Delhi had even approached the SAD-BJP regime for help but nothing had come of that. (साभार- हिंदुस्तान टाइम्स)

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