सृष्टि जायसवाल-
2013 के दिनों की बात है. हम सामान्य तरह से एक-दूसरे को डेट कर रहे थे. यह कोई बहुत गम्भीर नहीं था. मैंने कभी सोचा नहीं था कि वह मेरा साथी बनेगा. 2016 के बाद अचानक हमारी ज़िन्दगी बदल गयी जब उमर का नाम जेएनयू के sedition केस में आया.

उमर को हर तरफ तलाशा जा रहा था. उसके लिए मेट्रो या बस जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट से ट्रेवल करना मुश्किल हो गया था. उसे कैफे या थियेटर जाने में भी संदेह रहता था कि कुछ भी हो सकता था. क्योंकि नेशनल मीडिया पर उमर की फांसी की मांग करने वाले सक्रिय थे. हमारे पास किसी भी तरह का राजनैतिक सपोर्ट तो था नहीं क्योंकि हम ठहरे आम जन. हमारी ज़िन्दगी में 2016 के बाद से सब कुछ बदल गया.
लेकिन एक अच्छा बदलाव यह हुआ कि हमारा रिश्ता और मजबूत होता गाया. उमर और मैं जेल में मिलते हैं और कोशिश करते हैं कि हमारी मुलाकातें खुशनुमा हों. हर मुलाकात से पहले वो अच्छे से तैयार होता है. वो ठीक से नहाता है, अच्छे से ड्रेसअप होता. यह सब वो खासतौर पर हमारी मुलाकात के लिए करता. हम जब मिलते हैं तो एक-दूसरे का हाथ नहीं पकड़ पाते हैं क्योंकि हमारे बीच में शीशे की एक दीवार होती है और हम लैंडलाइन फोन से बात करते हैं. कभी-कभी वह शीशा इतना गंदा होता है कि हम एक-दूसरे को ठीक से देख भी नहीं पाते हैं. और कई बार टेलीफोन जिससे हमें बात करनी होती है वो ठीक से काम नहीं करता. कभी-कभी मुझे बहुत झुंझलाहट होती क्योंकि हमारी मुलाकात का समय बहुत जरा सा होता है.
उमर मेरे मुकाबले ज्यादा शांत होता है शायद इसलिए क्योंकि वो रात दिन इससे ज्यादा अव्यवस्था के बीच में रह रहा है. हम बातें करते हैं. वो पूछता है, बाहर की दुनिया में क्या चल रहा है? हम कुछ मजाकिया बातें भी करते हैं. वो बताता है कि उसने क्या पढ़ा है और मैं उसे बताती कि सोशल मीडिया पर क्या चल रहा है. वो मेरे लिए फूल और चौकलेट लाता है, कभी जूस भी. यह सब वो उसे जेल में मिलने वाली चीज़ों से बचाकर रखता है इस मुलाक़ात में मुझे देने के लिए.
हमारी बातचीत के दौरान ही मैं उस चॉकलेट को खा लेती हूँ और चॉकलेट के रैपर को वहीँ डस्टबिन में डाल देती हूँ. मुझे मालूम है कि लोग कहेंगे कि उस रैपर को नहीं फेंकना चाहिए क्योंकि उसकी भावनात्मक वैल्यू है. मैं यह जानती हूँ लेकिन मैं रैपर नहीं रखती क्योंकि बाद में मुझे वह कमजोर करता. मैं फूलों को उन किताबों में रखकर उसे देती हूँ जो किताबे मैं उसे मुलाकातों के दौरान देती हूँ.
मुलाकात के वो लम्हे हमारे लिए बेहद खुश लम्हे होते हैं. जब मुझे मुलाकात के बाद वापस लौटना होता तब मैं बहुत उदास होती हूँ. उमर नहीं चाहता कि यह मुलाकात खत्म हो. वो गिडगिडाता रहता है, ‘बस दो मिनट और, प्लीज़ बस दो मिनट और.’ मेरे लिए उसकी आखों की उस उदासी और निरीहता को देखना बहुत मुश्किल होता है. मैं बहुत उदास हो जाती हूँ.
अनुवाद- Pratibha Katiyar



आलोक तिवारी
June 15, 2023 at 3:49 pm
अरे भाई, अनुवाद के चक्कर मे अर्थ का अनर्थ न करिये। सृष्टि जसवाल उमर खालिद की प्रेमिका नहीं हैं। उन्होंने उमर खालिद की प्रेमिका बनज्योत्सना का इंटरव्यू किया है।
Arun
June 16, 2023 at 10:39 pm
भड़ास के नाम पर सब जायज़ है, क्या करियेगा