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दैनिक जागरण, हिसार के वरिष्ठ समाचार संपादक विनोद शील ने पीसी ज्वैलर्स के लकी ड्रॉ में कार जीती!

: पत्रकार को इनाम देकर कहीं उसका ईमान तो नहीं खरीदा जा रहा! : ये दीवाली का इनाम है या हरियाणा विधानसभा चुनाव का? यह सवाल है। इस सवाल का उठना भी लाजिमी है क्योंकि यह इनाम किसी आम आदमी को नहीं, किसी खास को मिला है। खास इसलिए कि पुरस्कार पाने वाले दैनिक जागरण, हिसार में बतौर वरिष्ठ समाचार संपादक कार्यरत हैं। नाम है विनोद शील। नोएडा से लेकर कानपुर तक में दैनिक जागरण की सेवा करते-करते हिसार आ गए हैं। इन्हीं के बारे में अभी-अभी खबर मिली है कि विनोद शील यानि दैनिक जागरण, हिसार के वरिष्ठ समाचार संपादक ने पीसी ज्वैलर्स के लकी ड्रॉ में कार जीती है।

: पत्रकार को इनाम देकर कहीं उसका ईमान तो नहीं खरीदा जा रहा! : ये दीवाली का इनाम है या हरियाणा विधानसभा चुनाव का? यह सवाल है। इस सवाल का उठना भी लाजिमी है क्योंकि यह इनाम किसी आम आदमी को नहीं, किसी खास को मिला है। खास इसलिए कि पुरस्कार पाने वाले दैनिक जागरण, हिसार में बतौर वरिष्ठ समाचार संपादक कार्यरत हैं। नाम है विनोद शील। नोएडा से लेकर कानपुर तक में दैनिक जागरण की सेवा करते-करते हिसार आ गए हैं। इन्हीं के बारे में अभी-अभी खबर मिली है कि विनोद शील यानि दैनिक जागरण, हिसार के वरिष्ठ समाचार संपादक ने पीसी ज्वैलर्स के लकी ड्रॉ में कार जीती है।

जनाब! यह कोई मामूली खबर नहीं है। कहने वाले तो कह रहे हैं कि हरियाणा में हाल ही में संपन्न हुए चुनावों में जीएम मुदित चतुर्वेदी ने भरपूर माल-मलाई का लुत्फ उठाया। अखबारी दुनिया से परिचित लोग जानते हैं कि संपादकीय प्रमुख के जरिये ही चुनावों में पेड न्यूज का कारोबार होता है। ऐसे में अपने वनैल, जंगली, हिंस्र अहं को माल-मुद्रा की खातिर ताक पर रखकर अगर आपस में साजबाज कर ली गयी हो तो इसमें ताज्जुब की कौन सी बात है। बताया तो यह भी जाता है कि न्यूज एडिटर साहब कार्यालय के मातहत के समक्ष हमेशा पाक-साफ की दुहाई देते रहते हैं। इसके इतर, पार्टी नेताओं की रैली व जनसंपर्क की खबरों को स्थान देने के लिए रात नौ बजे तक मांडवाली होती रहती थी। सभी डेस्क वालों से कहा जाता था कि फलां नेता का पैसा आ गया है, लगा देना, अमुक नेता का पैसा नहीं आया है, मत लगाना।

जीएम व संपादक की खबरें लगाने में डेस्क वालों के भी पसीने छूट रहे थे, क्योंकि जब ऊपर से किसी दिन समीक्षा होती थी तो बात डेस्क इंचार्जों पर डाल दी जाती थी। इस बीच पेड न्यूज पर अंकुश लगाने के लिए नोएडा से एक न्यूज एडिटर सुनील झा को विशेषकर भेजा भी गया। हालांकि जब नोएडा से आए न्यूज एडिटर सुनील झा ने हस्तक्षेप करना शुरू किया तो उन्हें चुनावी खबरों की मॉनीटरिंग से हटा दिया गया। बताया तो यह भी जाता है कि चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद जब श्री विष्णु त्रिपाठी जी ने पानीपत यूनिट में बैठक बुलाई थी तो वहां भी उन्होंने विनोद शील को यहां तक कह दिया था कि ‘आप भ्रष्ट हो चुके हैं।’  लोग कहते हैं कि ‘चला-चली’ की बेला में विनोद शील ने वर्तमान को कुछ यूं जिया है कि अपना भविष्य सुरक्षित कर लिया। चूंकि विनोद शील पुराने चावल हैं तो उन्होंने कार की सवारी का मजा जरा दूसरे तरीके से लेने की जुगत भिड़ा ली। बहरहाल, इस कार की चाल का तो पता बाद में चलेगा लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि यह वंडर कार है…।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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3 Comments

3 Comments

  1. Rajeev

    November 3, 2014 at 1:39 am

    इनाम में तो दूसरी कार थी।

  2. A.AGNIHOTRI

    November 4, 2014 at 4:28 pm

    Kaun Kahata hai ki yeh harami ka pilla IMANDAR hai.

  3. A.AGNIHOTRI

    November 4, 2014 at 5:53 pm

    कौन बेवकूफ है, विनोद शील जैसे कुत्ते को ईमानदार बता रहा है।

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