एक ऐसी वेबसाइट जो कार से संबंधित सारे कनफ्यूजन दूर कर देती है!

CAR HP अमेरिकी मार्केट की उभरती हुई ऑनलाइन ऑटोमोबाइल और इस सेक्टर की सूचना देने वाली साइट है। यहां अपने ग्राहकों को नई-पुरानी कारों की बेहतरीन और गहराई से रिव्यू, रेटिंग, तुलनात्मक समीक्षा के साथ लोकल लिस्टिंग देख-पढ़ सकते हैं। यहां से आप आसानी से अपनी पसंद की कार का चयन कर सकते हैं। इतना ही नहीं, CARHP साइट आपके सारे कन्फ्यूजन को दूर कर देती है। Continue reading

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

Goibibo Car Service Fail : दो घंटे तक नहीं आई कार, अब दे रहे रिफंड का लॉलीपाप

Yashwant Singh : पिछले कुछ समय में तकनीक ने लोगों का जीवन काफी आसान किया है. ब्ला ब्ला के जरिए कार शेयरिंग, ओयो के जरिए होटल, ओला-उबेर के जरिए रेंट पर कार आदि के विकल्प शुरू हुए. इनके एप्प इंस्टाल करिए स्मार्टफोन में और हो जाइए शुरू. गोइबिबो नामक कंपनी ने जो होटल दिलाने के लिए काम करती है, पिछले दिनों रेंट पर कार की सर्विस शुरू की. मैंने पिछले दिनों कार बुक किया. तय समय से करीब दो घंटे तक कार नहीं आई.

कार के ड्राइवर का पहले तो फोन स्विच आफ / नॉट रीचेबल बताता रहा. बाद में जब उसके मालिक से और फिर ड्राइवर से बात हुई तो पता चला कि कार तो अभी करीब चालीस किलोमीटर दूर है. यानि उसके आने में अभी दो घंटे की देर है. ऐसे में तुरंत दूसरी टैक्सी किया. फिलहाल गोइबिबो वाले रिफंड आदि के लालीपाप दे रहे हैं लेकिन बड़ा सवाल ये है कि आप जब किसी के कीमती वक्त को इस तरह नष्ट करते हैं तो उसकी भरपाई सिर्फ रिफंड से नहीं हो सकती.

मुझे तो पहली ही कार बुकिंग के बाद समझ में आ गया कि गोइबिबो ने कार सर्विस में गलत पांव डाल दिया है, उनकी यह सेवा तो पूरी तरह फेल है. उन्हें सिर्फ होटल किराए पर उठाकर उससे मिलने वाली दलाली से काम चलाना चाहिए. पढ़िए वो चिट्ठी जो गोइबिबो वालों ने मुझे भेजी है….

Dear Yashwant,

Greetings from GoIbibo.com! This is in reference to your query related to a bad experience with the Car owner. Please accept our sincere apology for your experience with this Car owner, we strongly discourage this sort of a behavior. We feel sad for the inconvenience you had with the car owner today, we have advised the Car owner to not to conduct themselves in the same manner again. We take users feedback very seriously and the points that you had mentioned on your discussion with us have been passed to the department that will act on it.

Being a Car sharing platform that focuses on connecting Car owners with users this is the best we can do. As discussed on the phone call, we have initiated full refund against this booking, which will reflect in your paid account within 5-14 working days. Further, we also request you to rate the car owner on GoCars app and mention your experience, this will enable other users to judge the quality of service offered by car owner.

Please feel free to reply in case of any query. We are grateful for the pleasure of serving you and meeting your travel needs.

Regards,
Sujeet Kumar rai
GoCare Support
24×7 Customer Service Number: 09213025552 / 1-860-2-585858

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से. संपर्क : ह्वाट्सएप 9999330099

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

अस्सी हजार रुपये में बिक गई यशवंत की अल्टो कार, अब हुए पूरी तरह पैदल

Yashwant Singh : अस्सी हजार रुपये में बिक गई मेरी दस साल पुरानी अल्टो कार. आजादी थोड़ी सी और बढ़ गई. घुमक्कड़ी में अब आएगा ज्यादा आनंद. दिल्ली का भड़ास आफिस बंद करना और अब कार बेचना… दोनों काम खुद ब खुद हो गए… लेकिन ये दोनों काम और इन दोनों के कम हो जाने के बाद खुद को ज्यादा मुक्त व उदात्त महसूस कर रहा हूं. अगर कार रखने की जगह न हो, एकल परिवार में कोई दूसरा कार चलाने वाला न हो और आफिस वाफिस जाने का कोई झंझट न हो तो कार असल में हाथी की माफिक हो जाया करती है. उस पर भी दिल्ली में केजरीलाल ने आड इवन करके बे-कार जीने के रास्ते जबरन चला दिया था. केजरी भाई साहब के उस प्रयोग से मुझे बड़ा फायदा ये हुआ कि लगातार बस मेट्रो आदि की यात्राएं करने से कार के प्रति मोह आस्था यथास्थितिवाद खत्म हो गया.

कार बेचने के पीछे तात्कालिक कारण भी बता दूं. जहां रहता हूं वहां घर के भीतर कार पार्किंग की सुविधा नहीं है. घर के सामने पार्क के करीब कार खड़ी कर देता हूं. देहाती किस्म के एक चोर महोदय एक रात आए और पेचकस डाल के कार का गेट खोलने वाला छेद और कार स्टार्ट करने वाला छेद दोनों भयंकर रूप से थूर दिए. म्यूजिक सिस्टम व कार से मोबाइल चार्ज करने वाला चार्जर ले गए. कार भी वो ले जाने की कोशिश किए होंगे लेकिन बैट्री डिस्चार्ज मोड में थी इसलिए जो मिला वही ले गए.

ये चौर्य कांड काफी पहले ही हो चुका था. मुझे पता तब चला जब महीने भर से खड़ी कार को एक रोज स्टार्ट कर कहीं जाने की सोचा तो देखा कि इसमें तो कांड हुआ पड़ा है. तब दिमाग में कौंधा कि उपर वाले का आदेश है कि बेटा इसे बेच दे वरना ये जाने वाली है. सो, फौरन फोटो वोटो खींच के olx पर डाला और olx की महिमा देखिए कि फोन काल्स की लाइन लग गई.

अंतत: आगरा के एक भाई साहब नब्बे हजार से बारगेन करते हुए अस्सी पर ले आए और मैंने भी देकर छुट्टी पाई. तो इस प्रकार मैं कार से बे-कार हो गया हूं. हां, ढेर सारे लोग मुझसे पूछे कि अब कौन सी नई बड़ी वाली कार लेंगे. मैंने कहा भइया मैं थोड़ा डाउनग्रेड, डाउनमार्केट, परम देहाती और थेथर बेहया टाइप प्राणी हूं जो अपने गोबर कीचड़ मि्ट्टी पैदल में ही सुकून पाता है इसलिए नो कार. हां, स्कूटी जरूर लेने की सोच रहा हूं ताकि घर वाले द्रुतगामी हो जाएं. मुझे अब किसी वाहन की जरूरत नहीं. मैं तो खुद ही यह देह रूपी वाहन धारण कर इधर उधर हिलता डुलता इस ब्रह्मांड प्रकृति की विशिष्टता विचित्रता अलौकिकता देखकर आनंदित विस्मित चकित होते हुए धन्य-धन्य कहता महसूसता फिरकी माफिक फिरक रहा हूं. जैजै 🙂

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मारुति-सुज़ुकी वाले अक्षरधाम Nexa Showroom का नाम Unfair Deal ज़रूर कर लें

Om Thanvi : मारुति-सुज़ुकी जैसी नामी कंपनी, बड़ा हाइ-फाइ Nexa Showroom, डीलर का नाम – Fair Deal Cars; दिल्ली में अक्षरधाम मेट्रो स्टेशन के ठीक नीचे। अच्छा होता कि नाम रखते – Unfair Deal Cars! हुआ यह कि अक्तूबर 2015 में हमने उक्त शोरूम जाकर ग्यारह हजार रुपये दे एक बलेनो कार बेटे के लिए बुक करवाई। पर चंद रोज बाद और खरीदारों की राय जान बेटे को लगा कि आजमाई हुई श्कोडा ही बेहतर होगी।

कंपनी का वादा था कि बुकिंग रद्द करवाने पर बुकिंग राशि वापस कर दी जाएगी। जिस मैनेजर (नीरज गुप्ता) को पैसा दिया था, हमने उन्हें बुकिंग रद्द करने की सूचना दे दी। सोचा पैसा आ जाएगा। नहीं आया तो फोन किया। बुकिंग रद्द हो गई फोन क्यों उठाएंगे? उलटे स्टाफ से फोन आते रहे, जैसे कि बुकिंग अब भी कायम हो। किसी तरह डीलर का नंबर ढूंढ़ कर गुप्ता से संपर्क साधा तो जवाब मिला, बैंक खाते का ब्योरा भेज दें तब एक हफ़्ते बाद मिल सकेगा।

बेटे ने इ-मेल से बैंक-ब्योरा भेज दिया। फिर लम्बा वक्फा। पैसा नहीं मिला। फिर फोन किया। अब गुप्ताजी बोले, ऐसा करें आप रोज इधर से जाते हैं, जाते हुए रिफंड खुद ही ले लीजिएगा। पर जाने से पहले जब-जब फोन पर बात करनी चाही, एक बार भी फोन नहीं उठाया। एसएमएस का जवाब भी नहीं। कल आखिर उधर जा ही निकला। तो बन्दे ने वाउचर बनाकर कहा, क्या करें कैशियर ही नहीं है।

मैं वाउचर सहित लौट आया, भीतर का पत्रकार जागा, आज सुबह एक फोन ऊपर के एक जिम्मेदार अधिकारी को मिलाया कि क्या अदालत के जरिए होगी इस मामूली धन की धन-वापसी? … अभी पैसा घर दे गए हैं। लेकिन इस अनुभव पर मारुति-सुज़ुकी वालों को मेरा सुझाव कायम रहेगा कि कम-से-कम अक्षरधाम नेक्शा शोरूम का नाम Unfair Deal ज़रूर कर लें। लुच्चे कहीं के।

वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी के फेसबुक वॉल से.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

जोड़ दी दो स्कार्पियो कार, तैयार किया चलता फिरता बीयर बार, अफसर भौचक, देखें तस्वीरें

मुंबई से सटे नवीमुंबई में आरटीओ के अधिकारियों ने गुजरात नंबर प्लेट की दो ऐसी अनोखी कारें बरामद की हैं जिसमें से एक कार में पूरा बीयर बार बनाया गया है। इस कार की लंबाई 21 फीट है।  इसे दो स्कॉर्पियो को जोड़कर बनाया गया है। आरटीओ के अधिकारियों ने इस कार को पकड़ा तो उन्हें लगा कि ये लिमोजिन कार होगी, लेकिन पता चला कि स्कॉर्पियो कार को जोड़कर ये लुक दिया गया है। इस कार में बार के साथ साथ संगीत और टेलीविजन की व्यवस्था भी है।

यहां आराम से पार्टी वगैरह की जा सकती है। इस तरह की कार अब तक विदेशों में या फिर फिल्मों में ही देखने को मिलती थी। फिलहाल कार मालिक से पूछताछ की जा रही है कि उसने इसकी इजाजत ली थी या नहीं। जब अफसरों ने इन कारों को पकड़ा और अंदर का जायजा लिया तो उनके होश उड़ गए। उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि वह किसी कार में बैठे हैं या फिर बीयर बार में।

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

तेज गति कार चलाकर फंसे अर्णब गोस्वामी! (देखें तस्वीरें)

टाइम्स नाऊ के बड़बोले एडिटर इन चीफ अर्णब गोस्वामी इन दिनों एक नए कारण से चर्चा में है. कुछ लोगों का आरोप है कि वे तेज गति से कार चला रहे थे. इसकी शिकायत पुलिस को पहुंची तो मुंबई की ट्रैफिक पुलिस ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए उनकी कार उठवा ली. अर्णब को जुर्माना भरने के बाद छोड़ा गया. वहीं, कुछ अन्य लोगों का कहना है कि कार कोई दूसरा शख्स तेज गति से चला रहा था, अरनब ने तो पुलिस को सूचना देकर इस कार को पकड़वाया. ये पूरा घटनाक्रम असल में इन दो तस्वीरों के कारण चर्चा में है जिसे किसे ने मौके पर क्लिक कर लिया.

कोई कह रहा है कि अर्णब टेस्ट ड्राइव कर रहे थे. किसी का कहना है कि वे नई कार खरीदने के बाद उसका लुत्फ उठा रहे थे. कुछ का कहना है कि अरनब ने तेज गति कार को उठवाकर अच्छा काम किया. जितने मुंह उतनी बातें. सोशल मीडिया पर अरनब फिलहाल उपरोक्त दोनों तस्वीरों के कारण चर्चा में हैं और इस पर प्रतिक्रियाओं टिप्पणियों लाइक शेयर की झड़ी लगी हुई है.

जिगह्वील्स नामक एक वेबसाइट ने भी सचित्र खबर छापकर पूरे प्रकरण के बारे में बताया है कि अरनब ने तेज गति कार के बारे में पुलिस को खबर देकर उसे पकड़वा दिया. इस वेबसाइट में खबर का शीर्षक ”Arnab Goswami and the Lamborghini Huracan – What Really Happened” है. खबर की शुरुआत कुछ यूं है: ”With the social media awash with comments and speculation about a recently clicked picture of Arnab Goswami and a Lamborghini Huracan pulled over at Worli Sea Face in Mumbai, here is what really happened. In the day and age when everything is recorded and a billion people with internet access worldwide can essentially comment on something from any corner of the world, there are often instances where a simple act can be blown out of proportion. Sadly, this is exactly what has happened in what should be termed as ‘The Curious Case of Arnab Goswami and the Lamborghini Huracan’. Although there are several speculation about whether the Times Now Editor-in-Chief owns or was driving the car, the real story is far from the truth. Allegedly, Arnab, while travelling on the sea link was overtaken by the Huracan. The Lamborghini, travelling over the speed limit was then reported to the police by Arnab prompting action by the local traffic police department. The car in question, a demo or test drive car belonging to Lamborghini Mumbai was then pulled over by the traffic police and the driver fined for speeding.”

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

दैनिक जागरण, हिसार के वरिष्ठ समाचार संपादक विनोद शील ने पीसी ज्वैलर्स के लकी ड्रॉ में कार जीती!

: पत्रकार को इनाम देकर कहीं उसका ईमान तो नहीं खरीदा जा रहा! : ये दीवाली का इनाम है या हरियाणा विधानसभा चुनाव का? यह सवाल है। इस सवाल का उठना भी लाजिमी है क्योंकि यह इनाम किसी आम आदमी को नहीं, किसी खास को मिला है। खास इसलिए कि पुरस्कार पाने वाले दैनिक जागरण, हिसार में बतौर वरिष्ठ समाचार संपादक कार्यरत हैं। नाम है विनोद शील। नोएडा से लेकर कानपुर तक में दैनिक जागरण की सेवा करते-करते हिसार आ गए हैं। इन्हीं के बारे में अभी-अभी खबर मिली है कि विनोद शील यानि दैनिक जागरण, हिसार के वरिष्ठ समाचार संपादक ने पीसी ज्वैलर्स के लकी ड्रॉ में कार जीती है।

जनाब! यह कोई मामूली खबर नहीं है। कहने वाले तो कह रहे हैं कि हरियाणा में हाल ही में संपन्न हुए चुनावों में जीएम मुदित चतुर्वेदी ने भरपूर माल-मलाई का लुत्फ उठाया। अखबारी दुनिया से परिचित लोग जानते हैं कि संपादकीय प्रमुख के जरिये ही चुनावों में पेड न्यूज का कारोबार होता है। ऐसे में अपने वनैल, जंगली, हिंस्र अहं को माल-मुद्रा की खातिर ताक पर रखकर अगर आपस में साजबाज कर ली गयी हो तो इसमें ताज्जुब की कौन सी बात है। बताया तो यह भी जाता है कि न्यूज एडिटर साहब कार्यालय के मातहत के समक्ष हमेशा पाक-साफ की दुहाई देते रहते हैं। इसके इतर, पार्टी नेताओं की रैली व जनसंपर्क की खबरों को स्थान देने के लिए रात नौ बजे तक मांडवाली होती रहती थी। सभी डेस्क वालों से कहा जाता था कि फलां नेता का पैसा आ गया है, लगा देना, अमुक नेता का पैसा नहीं आया है, मत लगाना।

जीएम व संपादक की खबरें लगाने में डेस्क वालों के भी पसीने छूट रहे थे, क्योंकि जब ऊपर से किसी दिन समीक्षा होती थी तो बात डेस्क इंचार्जों पर डाल दी जाती थी। इस बीच पेड न्यूज पर अंकुश लगाने के लिए नोएडा से एक न्यूज एडिटर सुनील झा को विशेषकर भेजा भी गया। हालांकि जब नोएडा से आए न्यूज एडिटर सुनील झा ने हस्तक्षेप करना शुरू किया तो उन्हें चुनावी खबरों की मॉनीटरिंग से हटा दिया गया। बताया तो यह भी जाता है कि चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद जब श्री विष्णु त्रिपाठी जी ने पानीपत यूनिट में बैठक बुलाई थी तो वहां भी उन्होंने विनोद शील को यहां तक कह दिया था कि ‘आप भ्रष्ट हो चुके हैं।’  लोग कहते हैं कि ‘चला-चली’ की बेला में विनोद शील ने वर्तमान को कुछ यूं जिया है कि अपना भविष्य सुरक्षित कर लिया। चूंकि विनोद शील पुराने चावल हैं तो उन्होंने कार की सवारी का मजा जरा दूसरे तरीके से लेने की जुगत भिड़ा ली। बहरहाल, इस कार की चाल का तो पता बाद में चलेगा लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि यह वंडर कार है…।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें: