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उत्तर प्रदेश

सीएम योगी का जहाज उड़ाने वाला पायलट प्रज्ञेश मिश्र दो जांचों के घेरे में!

इंडिया टुडे में इस प्रकरण पर विस्तार से खबर प्रकाशित हुई है

डीजीसीए यानि डायरेक्टोरेट जनरल आफ सिविल एविएशन (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) और बीसीएएस यानि ब्यूरो आफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो) ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के पायलट प्रज्ञेश मिश्रा के खिलाफ दो अलग-अलग शिकायतों की जांच शुरू कर दी है.

इन शिकायतों में कहा गया है कि पायलट प्रज्ञेश मिश्रा को केवल हेलीकाप्टर उड़ाने के लिए नियुक्त किया गया है लेकिन वह नियम कानूनों को ताक पर रखकर एयरक्राफ्ट भी उड़ाते हैं.

ज्ञात हो कि हेलीकाप्टर में Rotary wing होते हैं जबकि एयरक्राफ्ट में Fixed Wing. इन दो अलग-अलग तरीकों के जहाजों को उड़ाने के लिए अलग-अलग किस्म के पायलटों को रखा जाता है. ऐसा सुरक्षा को ध्यान में रखकर किया जाता है क्योंकि इन दोनों अलग अलग किस्म के जहाजों को उड़ाने के तौर-तरीके अलग-अलग हैं और किसी भी आकस्मिक स्थिति में थोड़ी सी भी चूक से भीषण हादसा हो सकता है. इसलिए दोनों किस्म के जहाजों के लिए दो अलग अलग किस्म के पायलट रखे जाते हैं. नियम ये है कि भले ही किसी पायलट के पास दोनों किस्म के जहाजों के उड़ाने का प्रशिक्षण हो लेकिन उसे जब उड़ान की जिम्मेदारी दी जाती है तो इनमें से किसी एक किस्म के जहाज के लिए ही नियमित पायलट बनाया जाता है.

सीएम योगी के हेलीकाप्टर को कैप्टन प्रज्ञेश मिश्रा उड़ाते हैं. कैप्टन अरविंद सिंह ने शिकायत की है कि कैप्टन प्रज्ञेश के गलत आचरण से मुख्यमंत्री का जीवन खतरे में पड़ सकता है.

आरोप लगाया गया है कि कैप्टन प्रज्ञेश मिश्रा को उत्तर प्रदेश नागरिक उड्डयन विभाग ने केवल हेलीकाप्टर्स (रोटेरी पंख) को उड़ाने के लिए नियुक्त किया है लेकिन ये फिक्स पंखों वाले नियमित एयरक्राफ्ट को भी उड़ाते हैं. यह उत्तर प्रदेश के उस उड्डयन मानक का उल्लंघन है जिसमें कहा गया है कि पायलट को सिर्फ एक किस्म का ही एक जहाज उड़ाना है.

उत्तर प्रदेश नागरिक उड्डनय विभाग के अवर सचिव सत्य प्रकाश तिवारी ने 17 मार्च 2017 को एक पत्र लिखकर कहा है कि रोटेरी पंख पायलट को फिक्स पंख एयरक्राफ्ट उड़ाने के लिए नियुक्त करने का कोई प्रावधान नहीं है.

वैसे तो सीएम योगी के पायलट प्रज्ञेश मिश्रा के पास फिक्स विंग एयरक्राफ्ट उड़ाने का भी लायसेंस है लेकिन डीजीसीए ने एक आरटीआई के जवाब में स्पष्ट किया है कि दोनों तरह के जहाजों को किसी एक पायलट द्वारा उड़ाने से संबंधित कोई लिखित आदेश या अनुमति नहीं है.

कैप्टन अरविंद सिंह फिक्स्ड विंग एयरक्राफ्ट उड़ाने के लिए रखे गए हैं. उनके पास इसका लायसेंस है. उन्होंने डीजीसीए को भेजी गई एक लिखित शिकायत में कहा है कि 25 अक्टूबर 2019 को प्रज्ञेश मिश्रा ने एसकेए बी200 एयरक्राफ्ट को उड़ाने के दौरान इंसट्रक्टर का काम किया जबकि वे इस काम के लिए क्वालीफाई नहीं हैं और न नियुक्त किए गए हैं.

कैप्टन अरविंद सिंह के मुताबिक एयरक्राफ्ट और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर के बीच बातचीत के आडियो से स्पष्ट हो जाता है कि प्रज्ञेश मिश्रा बिना किसी लीगल अथारिटी के बतौर इंस्ट्रक्टर के रूप में काम कर रहे थे.

सिविल एविएशन विशेषज्ञों के मुताबिक अगर कोई पायलट दोनों किस्म का जहाज उड़ाता है, इसके बावजूद कि उसके पास दोनों किस्म के जहाज उड़ाने का लाइसेंस है, वह दरअसल यात्रियों का जान खतरे में डालता है और यह एक ग़लत कुकृत्य है.

मध्य प्रदेश सरकार के पूर्व पायलट कैप्टन अनंत सेठी कहते हैं कि दो अलग अलग किस्म के जहाजों के फंक्शन असल में दो अलग अलग किस्म के एयरोडायनिमिक्स लिए होते हैं. इनके बीच के अंतर को एक पायलट अगर आपात स्थिति में याद रखने व लागू कर पाने में थोड़ी भी भूलचूक करता है तो इसका नतीजा भयानक होगा. भारत के किसी भी राज्य में कोई एक पायलट दो अलग अलग किस्म का जहाज नहीं उड़ाता.

उधर, दिल्ली के पत्रकार और कालचक्र के प्रबंध सम्पादक रजनीश कपूर ने 9 जनवरी 2020 को बीसीएएस के महानिदेशक राकेश अस्थाना को लिख एक पत्र में आरोप लगाया है कि सीएम योगी के पायलट प्रज्ञेश मिश्रा के पास कोई नियुक्ति पत्र नहीं है. उन्होंने अवैध तरीके से एयरपोर्ट एंट्री पास हासिल किया हुआ है.

फिलहाल दोनों शिकायतों के बाद सीएम योगी के पायलट प्रज्ञेश मिश्रा के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है.

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