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‘ज़ूम’ पर पाबंदी लगाओ, ये खतरनाक है! सुप्रीम कोर्ट में याचिका

ज़ूम सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन पर प्रतिबन्ध के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका… उच्चतम न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर दी गई है, जिसमें एक उपयुक्त कानून बनने तक भारतीय जनता द्वारा सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन “ज़ूम” के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। याचिका मुख्य रूप से ऐप की इंटरनेट सुरक्षा की कमी पर आधारित है। इसमें कहा गया है कि एप्लिकेशन सुरक्षित नहीं है और इसमें एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन नहीं है और यह सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 और सूचना प्रौद्योगिकी (प्रक्रिया और सुरक्षा उपायों का अवरोधन, निगरानी) का उल्लंघन कर रहा है। इसके पहले आरएसएस के पूर्व विचारक के एन गोविंदाचार्य ने उच्चतम न्यायालय में लेटर पिटिशन दायर कर देशभर की अदालतों के साथ-साथ सरकारी कार्यालयों में वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के लिए “विदेशी” सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की है।

याचिका में यह दलील दी गई है कि “जूम सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन का उपयोग करने वाले व्यक्तियों की निजता को खतरा है और यह साइबर सुरक्षा को भी प्रभावित करता है। यह भी कहा गया कि ज़ूम वीडियो कम्युनिकेशंस के सीईओ ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है और सुरक्षित रूप से सुरक्षित वातावरण प्रदान करने के मामले में एप्लिकेशन को दोषपूर्ण माना है, जो साइबर सुरक्षा के मानदंडों के खिलाफ है। याचिकाकर्ता ने होममेकर और रिमोट वर्कर (जूम के माध्यम से ट्यूशन क्लासेज लेने वाले) के तौर पर हैकिंग और साइबर ब्रीच के मामलों पर चिंता व्यक्त की है, जो लगातार रिपोर्ट की जा रही है।

याचिका ने अन्य हितधारकों जैसे केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय और एमएचए के साइबर और सूचना सुरक्षा प्रभाग को भी ज़िम्मेदार बताया है। याचिका में कहा गया कि जो राहतें मांगी गई हैं, वे प्रत्येक दिन के साथ बढ़ते सॉफ्टवेयर के दखल के मद्देनजर जरूरी हैं और वर्तमान याचिका में उठाई गई चिंताओं के कारण पूरे भारत में इसका असर होगा।

याचिका में कहा गया कि नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक मानक विनियमन को प्रभावित करने के लिए एक कानून बनाए जाने की आवश्यकता है, जैसा कि दुनिया भर में विभिन्न नेताओं द्वारा इसे प्रकाश में लाया गया है। इसको ध्यान में रखते हुए याचिका में पूरी दुनिया में सुरक्षा विफलताओं और निजता के उल्लंघन के पैटर्न” से संबंधित मुद्दे को उठाया गया है। याचिका को एडवोकेट दिव्य चुघ और निमिष चिब ने तैयार किया है और एडवोकेट वाजिह शफीक ने दायर किया है।

इसके पहले आरएसएस के पूर्व विचारक के एन गोविंदाचार्य ने उच्चतम न्यायालय में लेटर पिटिशन दायर कर देशभर की अदालतों के साथ-साथ सरकारी कार्यालयों में वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के लिए “विदेशी” सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की है। गोविंदाचार्य ने उच्चतम न्यायालय से कहा है कि विदेशी सॉफ्टवेयर जैसे कि ज़ूम, वॉट्सऐप, स्काइप आदि का इस्तेमाल सरकारी डेटा को विदेश में स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है. जो राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ है। इस प्रकार नियम के संरक्षण के लिए पर्याप्त कानूनी और तकनीकी समाधान आवश्यक हैं।

याचिका में कहा गया है कि अदालत की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग शुरू करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।याचिका में यह भी कहा गया है कि मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठकों में गोपनीय सामग्री हो सकती है जो जनता के बीच नहीं आनी चाहिए।भारत हमेशा आतंकवाद का निशाना रहा है और किसी भी हमले से बचने के लिए विशेष ध्यान रखने की जरूरत है।

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