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सुख-दुख

85 से 95 परसेंट कमीशन पर अब भी बदले जा रहे हैं पुराने नोट!

Yashwant Singh : 2019 के लोकसभा चुनाव में मीडिया पर जितना पैसा बरसने वाला है, उतना कभी न बरसा होगा… कई लाख करोड़ का बजट है भाई…. मोदी सरकार भला कैसे न लौटेगी… और हां, नोट अब भी बदले जा रहे हैं.. 85 परसेंट से लेकर 95 परसेंट के रेट पर… यानि पुराना नोट लाओ और उसका पंद्रह से पांच परसेंट तक नया ले जाओ…. लाखों करोड़ रुपये का गड़बड़झाला है ये नोटबंदी… उपर से कहते हैं कि न खाउंगा न खाने दूंगा…

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Yashwant Singh : 2019 के लोकसभा चुनाव में मीडिया पर जितना पैसा बरसने वाला है, उतना कभी न बरसा होगा… कई लाख करोड़ का बजट है भाई…. मोदी सरकार भला कैसे न लौटेगी… और हां, नोट अब भी बदले जा रहे हैं.. 85 परसेंट से लेकर 95 परसेंट के रेट पर… यानि पुराना नोट लाओ और उसका पंद्रह से पांच परसेंट तक नया ले जाओ…. लाखों करोड़ रुपये का गड़बड़झाला है ये नोटबंदी… उपर से कहते हैं कि न खाउंगा न खाने दूंगा…

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भइये, जब सारा का सारा अकेले खा गए तो भला दूसरे को कैसे खाने दोगे… और, जो तुम खुद खाए हो उसमें इस तरह से सरकारी, अर्द्ध सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं-एजेंसियों को मिलाए हो कि सब कुछ सरकारी, सहज, स्वाभाविक लग रहा है… किसी की औकात नहीं है जो नोटबंदी के घोटाले को उजागर कर सके जिसमें साहब एंड कंपनी ने कई लाखों करोड़ रुपये बनाए हैं और अब भी बनाए जा रहे हैं…

जी हां, काम चालू आहे… ये मेरा दावा है… ये मेरा खुला आरोप है… एनआरआई कोटे के नाम पर यह सारा धंधा चल रहा है… एनआरआई कोटा क्या है, इससे संबंधित खबर नीचे दे रहा हूं… इस घोटाले-गड़बड़झाले के तह तक जाने के लिए बूता चाहिए जो आज दुर्भाग्य से किसी मीडिया हाउस के बूते नहीं है… इतने भारी पैमाने पर पैसे देकर मीडिया हाउस खरीदे जा रहे हैं कि पूछो मत… जो नहीं बिक रहे, उन्हें लाठी-डंडे से लेकर छापे और जेल की राह की ओर धकेला जा रहा है.

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वेब जर्नलिज्म में अभी ये संसाधन नहीं कि बड़े स्तर के खोजी अभियान चला सकें… जो बड़े घराने वेब जर्नलिज्म में आ रहे उनसे खोजी पत्रकारिता की उम्मीद नहीं की जा सकती क्योंकि वे पहले से ही गले तक दलाली और धंधेबाजी से मालामाल हुए पड़े हैं… देखते हैं… कुछ तो करना पड़ेगा.. काम मुश्किल है लेकिन किसी को तो हाथ लगाना पड़ेगा…

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के एफबी वॉल से. उपरोक्त स्टेटस पर आए ढेरों कमेंट्स में से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं…

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Shashank Singh नोटों की गिनती RBI में अभी तक चालू है… कितना रुपया आया था, अभी तक बता नहीं रहे हैं. बैंकों ने क्या बिना गिने नोट ले लिये थे? उपर से तुर्रा ये कि बच्चन से लेकर टुच्चन तक सब नोटबन्दी के गुण गा रहे हैं..

Yashwant Singh खेल चल रहा है अभी… नोट बदले जा रहे हैं… जो खुद पचासी परसेंट रख रहे हैं पुराने नोट का, वो लोग कौन हैं… इसकी शिनाख्त बस कर लीजिए… सारा खेल सबको पता चल जाएगा…

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Shashank Singh आप की बात ठीक होगी… लोग पकड़े जा रहे हैं, कभी कभी खबर भी छप रही है… NRI लोगों के लिये 30 जून तक का समय दिया था नोट बदलने के लिये।

Yashwant Singh आप एनआरआई की छोड़िए, आप कोई देशी आदमी लाइए पुराने नोटों के साथ, मैं उसे पचासी प्रतिशत कमीशन पर बदलने वाले रैकेट से मिलवा दूंगा..

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Vikas Yadav Journalist बीजेपी वाले खाते नहीं, लूटते हैं. डकैत हैं.

Yesh Arya इसी 85℅ के चक्कर मे सबकुछ cumputerised होने के बाबजूद भी RBI अभी तक यह नही बता रहा कि कितने 500 और 1000 के नोट जमा हुये कह रहा है गिने नही गये क्या बिना गिने जमा हो गये, मार्च में वित्त मंत्री 8 दिसंबर 2016 के आंकड़े दे रहे थे। रोज शाम को हर बैंक और करेंसी चेस्टों से RBI को नकदी की सूचना देना अनिवार्य होता है।

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ये है एनआरआई कोटे से संबंधित खबर…

एनआरआई कोटे के नाम पर अब भी भारी कमीशन देकर 500-1000 के पुराने नोट बदल रहे….

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मुंबई : नोटबंदी के इतने समय बाद भी आप अपने पुराने नोटों को बदल सकते है । बंद हुए 500 और 1000 रुपए के पुराने नोटों को अभी भी नए नोटों से बदला जा रहा है पर इसके लिए आपको बहुत मोटा कमीशन देना होगा। अनिवासी भारतीय (एनआरआई) को 30 जून तक पुराने नोट बदलने की अनुमति सरकार ने दे रखी है। यह एन.आर.आई. मोटा कमीशन लेकर आपके पुराने नोट बदलवाने के धंधे में लगे हुए हैं। इस धंधे से जुड़े एक व्‍यक्ति ने बताया कि इस काम के लिए प्रत्‍येक 100 रुपए पर 91 रुपए का कमीशन लिया जा रहा है। यदि आप एक करोड़ रुपए बदलवाना चाहते हैं तो आपको बदले में केवल 9 लाख रुपए के ही नए नोट मिलेंगे।

इतना मोटा कमीशन लोग क्‍यों दे रहे हैं, इस सवाल पर उस व्‍यक्ति ने बताया कि ये ऐसे लोग हैं जो सरकार को अपने धन का स्रोत नहीं बताना चाहते हैं। जिन लोगों ने अभी तक अपने धन के स्रोत का खुलासा नहीं किया है उन्‍हें डर है कि कहीं भविष्‍य में उनके आय के स्रोत का पता सरकार को न चल जाए, इसलिए वे अपना काला धन मोटा कमीशन देकर बदलवा रहे हैं। आरबीआई के एक वरिष्‍ठ अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की है। उन्‍होंने बताया कि इस तरह के नोट बदलने के बारे में उन्‍होंने भी सुना है लेकिन उन्‍होंने कहा कि इस पर रोक लगाने का अधिकार उनके पास नहीं है। अधिकारी ने बताया कि एनआरआई फुलप्रूफ डॉक्‍यूमेंट्स के साथ नोट बदल रहे हैं, ऐसे में उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकती। 2 जनवरी को आर.बी.आई. ने कहा था कि एनआरआई मुंबई, दिल्‍ली, चेन्‍नई, कोलकता और नागपुर स्थित आरबीआई ऑफि‍स में 30 जून 2017 तक अपने पुराने नोट बदल सकते हैं। एन.आर.आई.के लिए नोट बदलने की सीमा फेमा कानून के मुताबिक प्रति व्‍यक्ति 25,000 रुपए है।

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