ये खबर छापने की हिम्मत कर अमर उजाला ने कनपुरियों का दिल जीता!

जिसे जो काम करना है, अगर वो कर देता है तो अब कहा जाता है कि ये हिम्मत का काम किया. अखबारों का काम आम जनता की आवाज बनना और बड़े लोगों की ग़ल्तियों को उजागर करना होता है लेकिन ज्यादातर अखबार अब बड़े लोगों के गुलाम बन गए हैं. बड़े लोगों में सत्ता सिस्टम भी आता है जो सबसे पावरफुल होता है. अमर उजाला अखबार ने अपना कर्तव्य निभाया और एक ऐसी खबर छाप दी जिसे दूसरे अखबारों ने दबा दिया.

बात अमर उजाला के कानपुर संस्करण की हो रही है. राष्ट्रपति ट्रेन से कानपुर गए. जब उनकी ट्रेन पुल से गुजर रही थी तो पुल के उपर सड़क पर ट्रैफिक रोक दिया गया. इसी दौरान एंबुलेंस में जीवन मौत के लिए संघर्ष कर रही एक महिला उद्यमी को समय से अस्पताल न ले जाया जा सका और पूरे 45 मिनट तड़पने के बाद उनकी जान चली गई.

ये खबर सबके पास थी. दैनिक जागरण समेत सभी दूसरे अखबारों ने इस खबर को दबा दिया. पर अमर उजाला ने इस खबर को प्रमुखता से छापा, ये भी छापा की राष्ट्रपति के वीआईपी रूट के चलते रोके गए ट्रैफिक के कारण महिला उद्यमी की जान चली गई.

सोशल मीडिया पर अमर उजाला की खबर की कटिंग खूब वायरल हो रही है. खबर छपने के बाद पुलिस प्रशासन और राष्ट्रपति के स्टाफ में हड़कंप मच गया. अमर उजाला की एक्सक्लूसिव खबर पढ़कर कल सुबह पुलिस कमिश्नर जान गंवा चुकी महिला उद्यमी के घर गए और घटना पर घरवालों से माफी मांगी।

बताया जाता है कि महामहिम राष्ट्रपति कोविंद जी की पत्नी ने अमर उजाला की खबर को देखने के बाद महामहिम, जिलाधिकारी व पुलिस कमिश्नर को कहा. जिलाधिकारी आलोक तिवारी ने महिला उद्यमी वंदना जी के पति शरद मिश्र से कहा कि महामहिम राष्ट्रपति जी ने इस घटना पर खेद व्यक्त किया है और हमे भेजा है। यह भी कहा कि आपकी क्षतिपूर्ति तो नहीं हो सकती है लेकिन हमारी कोशिश होगी कि ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो.

मतलब राष्ट्रपति ने खबर का संज्ञान लिया और जिलाधिकारी के जरिये वंदना मिश्रा के पति के पास भेजा अपना संदेश.

वंदना मिश्र की मौत के मामले में पुलिस कमिश्नर ने जांच के आदेश दे दिए. ADCP ट्रैफिक निखिल पाठक को दी गई जांच. एंबुलेंस के न गुजरने देने के लिए ट्रैफिक पुलिस, गोविंदनगर, फजलगंज थाने के पुलिसकर्मियों को जिम्मेदारी बताया जा रहा है. शुरुआती कार्रवाई करते हुए एक दरोगा और तीन सिपाहियों को सस्पेंड कर दिया गया है.

महिला उद्यमी के अंतिम संस्कार में डीएम भी श्मशान घाट पहुंचे.

वीवीआईपी कल्चर पर चोट करती अमर उजाला की खबर पूरे दिन चर्चा का विषय बनी रही जिसने महामहिम को भी हिला डाला. खबर छापने की हिम्मत किसी अन्य अखबार ने नहीं दिखाई. परिजनों से माफी मांगते कमिश्नर की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई.

कनपुरियों के बीच अमर उजाला की खबर और इसके इंपैक्ट की खूब चर्चा होती रही. कानपुर में बहुत सारे लोगों ने दूसरे अखबारों को मंगाना बंद कर अमर उजाला डालने के लिए अपने अखबार वितरक को बोल दिया है, ऐसी सूचनाएं भी मिल रही हैं.

यही नहीं, अमर उजाला ने आज फालोअप में कानपुर की बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था पर शानदार कवरेज किया है. पुलिस कमिश्नरी बन जाने के बावजूद कानपुर का ट्रैफिक पहले जैसा है. हर तरफ जाम ही जाम का नजारा होता है. जिस पुल के नीचे से राष्ट्रपति की ट्रेन निकलनी थी उस पुल पर ट्रैफिक को पहले से रोक दिया गया था. इसी जाम ने ले ली थी महिला उद्यमी की जान.

अमर उजाला ने पहले पन्ने पर आज लीड खबर ये ली है…

अंदर के पूरे एक पेज पर इस घटना का फालोअप प्रकाशित किया है….

अमर उजाला में खबर छपने के बाद कल शाम इंडियन एक्सप्रेस ने भी इसे फालो किया और वेबसाइट पर खबर का प्रकाशन किया.

ज्ञात हो कि अमर उजाला कानपुर के संपादक विजय त्रिपाठी हैं जो तेवरदार अखबार निकालने के लिए विख्यात हैं.

इस घटना पर अमर उजाला कानपुर के संपादक रहे चुके वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ला ने फेसबुक पर जो लिखा है, उसे पढ़िए-

कल राष्ट्रपति के क़ाफ़िले से लगे ज़ाम में फँसकर कानपुर की एक महिला उद्यमी वंदना मिश्रा की मृत्यु हो गई। वंदना कोई छोटी-मोटी हस्ती नहीं थीं। वे IIA की महिला विंग की अध्यक्ष थीं। उन्हें कोविड हो गया था और उनके परिजन अस्पताल ले जा रहे थे। लेकिन दो घंटे लगे ज़ाम में वे अस्पताल पहुँचने के पहले ही दम तोड़ गईं।

राजीव गांधी के समय VVIP के आने-जाने के लिए अपेक्स कोर्ट ने एक निर्णय था कि अति विशिष्ट लोगों के आवागमन से आम जनता को तकलीफ़ नहीं होनी चाहिए। इसलिए ये लोग हेलीकाप्टर से अपने गंतव्य तक जाते थे। पूर्व राष्ट्रपति वेंकटरमण के दामाद कानपुर IIT में प्रोफ़ेसर थे। उस समय श्री Vijay Shanker Singh स्वरूप नगर में सीओ थे। वे बताते हैं कि तब राष्ट्रपति महोदय हवाई जहाज से चकेरी हवाई अड्डे आते और फिर हेलीकाप्टर से IIT जाते। इसी तरह भैरोसिंह शेखावत जब उप राष्ट्रपति थे तब वे सांसद देवेंद्र सिंह भोले की बेटी की शादी में सर्वोदय नगर आए थे और उन्होंने इसी प्रोटोकाल का पालन किया था। मैं ख़ुद उस शादी में था। साल 2003 में प्रधानमंत्री अटलबिहारी बाजपेयी भी अपनी पोती की शादी में कानपुर आए थे। मैं उस समय भी उस शादी में शरीक था पर कोई तामझाम नहीं था। साल 2005 में उस समय के CJI खरे साहब कानपुर पधारे थे लेकिन उन्होंने कोई क़ाफ़िला नहीं स्वीकारा था।

लेकिन मौजूदा राष्ट्रपति महोदय दिल्ली से कानपुर ट्रेन से गए। वह ट्रेन सिर्फ़ राष्ट्रपति के लिए थी। दिल्ली से कानपुर के ट्रैक पर चलने वाली सारी ट्रेनों को इधर-उधर किया गया। ट्रेन के आगे-आगे एक पॉयलेट इंजिन चला और एक पीछे-पीछे। स्टेशनों को 50 मीटर से ही सुरक्षा बलों ने अपने घेरे में ले लिया गया। कोई भी व्यक्ति वहाँ मूव नहीं कर सकता था। प्रोटोकॉल में लगे अधिकारी बताते हैं कि कानपुर के सारे होटल, सारे क्लब प्रशासन ने अपने पास रख लिए। वहाँ रेवेन्यू विभाग के अफ़सर, पुलिस व सुरक्षा बलों ने डेरा डाल लिया। छप्पन भोग और छप्पन रसोईयाँ। चटनी से लेकर हर डिश का स्वाद अलग। ऐसा लगा मानों कोई अंग्रेज वायसराय कानपुर पधारा हो। यह सामंती शैली है।

वहाँ से वे अपने गाँव, जो कि कानपुर शहर से कम से कम 80 किमी होगा, शायद इसी तरह सड़क मार्ग से जाएँगे। इससे भी जाम लगा। वंदना मिश्रा के परिजन उन्हें अस्पताल ले जा रहे थे क्योंकि उन्हें कोरोना हो गया था। पर गोविंदपुरी के रेलवे ओवर ब्रिज पर ट्रैफ़िक रोक दिया गया था क्योंकि कुछ समय बाद महामहिम की स्पेशल ट्रेन इस पुल के नीचे से गुजरने वाली थी। इसी जाम में फँस कर वंदना मिश्रा की मृत्यु हो गई।

मुझे वंदना जी की मृत्यु पर भारी दुःख हुआ। उनकी मृत्यु से कानपुर ने एक प्रतिभाशाली स्त्री उद्यमी को खो दिया। उनको अश्रुपूरित श्रद्धांजलि!

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One comment on “ये खबर छापने की हिम्मत कर अमर उजाला ने कनपुरियों का दिल जीता!”

  • Rajesh Kumar says:

    इस.देश के समस्त सत्ता नशीन अपने आप को मानव न समझकर देवता समझ बैठे हैं। आम आदमी उनके लिए एक तुच्छ कीड़े मकोड़े हैं।
    जिन लोगों को अपनी जान की इतनी फिक्र है, उन्हें सत्ता मे बने रहने का कोई हक नहीं।
    वंदना मिश्र की वापसी तो नहीं हो सकती बल्कि 25-50लाख से क्षति पूर्ति जरूर हो सकती है। अत्यंत दुर्भाग्य पूर्ण व शर्मनाक घटना है।

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