टाइम्स नाऊ से अरनब गोस्वामी ने इस्तीफा दिया, खुद का चैनल लांच करेंगे

मीडिया इंडस्ट्री की एक बड़ी खबर सामने आ रही है. टाइम्स नाऊ न्यूज चैनल के चर्चित एडिटर इन चीफ अर्णब गोस्वामी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने संपादकीय विभाग की बैठक में अपने इस्तीफे का ऐलान किया. बताया जा रहा है कि अर्णब जल्द ही अपना न्यूज चैनल लांच करेंगे. टाइम्‍स नाऊ चैनल का मालिक टाइम्स आफ इंडिया अखबार समूह है जिसके मालिक विनीत जैन और समीर जैन हैं.

अरनब टाइम्‍स नाऊ के साथ साथ बिजनेस न्यूज चैनल ईटी नाऊ के भी एडिटर इन चीफ थे. अरनब गोस्वामी का शो ‘न्‍यूज आवर’ कई वजहों से सुर्खियों में रहा करता है. अरनब पर कई बार पीत पत्रकारिता करने और मोदी सरकार का बचाव करने जैसे आरोप लगे. अरनब की आलोचना शो में चिल्‍लाने और बहुत जल्‍दी आपा खो देने के लिए होती रही है.

अरनब गोस्वामी मूलत: असम के रहने वाले हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से सोशियालॉजी में बीए (आनर्स) और ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से सोशल एंथ्रोपॉलजी में एमए करने वाले अरनब ने अपने करियर की शुरुआत 1995 में कोलकाता के अखबार द टेलीग्राफ से की थई. फिर वह एनडीटीवी चैनल से जुड़े. उन्होंने 2003 तक एनडीटीवी पर न्यूज आवर कार्यक्रम की एंकरिंग की. अरनब 2006 में टाइम्स नाऊ के एडिटर इन चीफ बने.

अरनब गोस्वामी के दादा असम के जाने माने वकील थे और उनके नाना गौरी शंकर भट्टाचार्य कम्युनिस्ट नेता और असम में विपक्ष के नेता रहे हैं. अरनब गोस्वामी के पिता मनोरंजन गोस्वामी सेना में कर्नल के पद से रिटायर हुए हैं. उनके पिता 1998 में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर गुवाहाटी से लोक सभा चुनाव लड़ चुके हैं. उनके मामा गुवाहाटी पूर्व से बीजेपी के विधायक हैं और असम के वर्तमान मुख्यमंत्री सरबानंद सोनोवाल से पहले पार्टी की असम इकाई के प्रमुख भी थे.

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  • ANOTHER BREAKING NEWS. सहारा में मजीठिया के नाम पर गजब का तमाशा हुआ है-
    तमाशा नंबर एक- डी टी पी ओपरेटर की सैलरी उर्दू के रेजिडेंट एडिटर से अधिक हो गयी है.
    तमाशा नंबर दो- जो लोग १५-२०-२५ वर्षों से वरिष्ठ , प्रधान संबाददाता के पद पर काम कर रहे हैं उन्हें एक पैसे की भी बढ़ोतरी नहीं डी गयी, उलटे उनसे उपर नीचे व कम अनुभवी रिपोर्टर, सब एडिटर के वेतन कर दिए गए. जो लोग हरताल का जमकर समर्थन किये उन्हें जमकर पुरस्कार दिया गया. अब बताईये १५-२० वर्षों से घिस रहे कर्मियों की क्या गलती है . वह रे सहारा. राष्ट्रीय सहारा के ८० फीसदी कर्मियों में असंतोष है. सहारा में कैडर की अहमियत होती है. कैडर सहाराश्री के निर्देश पर ही बढ़ाये जाते है. लेकिन मौजूदा बॉस ने अपने चहेतों के लिए कैडर को दरकिनार कर रिदेजिनेट को खूब आगे बढाया है. उदहारण के तौर पर कई कर्मियों का कैडर ऑफिसर और जूनियर रिपोर्टर है किन्तु उन्हें रिदेजिनेट कर स्पेशल संबाददाता बना दिया. राष्ट्रीय सहारा को इससे करारा आर्थिक नुकसान हुआ. ऐसे लोगों को खूब पहुँचाया गया है , जबकि सहाराश्री ने इसे ख़ारिज कर दिया था. यह जांच का विषय है कि पिछले ३-४ वर्षों में किस पदाधिकारी ने किन किन लोगों को रिदेजिनेट कर सहारा को नुकसान पहुँचाया. अभी कई राज खुलेंगे. खासकर भूमिहार को परदे के पीछे से फ़ायदा पहुँचाया गया है.

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