करेंसी यूं रद्द करने से देश कैसे आर्थिक मंदी की चपेट में आ सकता है, समझा रहे यशवंत

Yashwant Singh : एक बड़ी आर्थिक मंदी की चपेट में देश आ सकता है. नोट करेंसी रद्द / बंद करने का एक साइडइफेक्ट यह भी आशंकित है. क्या आप बताएंगे या मैं समझाऊं? ध्यान रखिए, मेरी आशंका अंध मोदी विरोध टाइप कतई नहीं है. विशुद्ध आर्थिक कारणों पर आधारित है. नोट बदलने, करेंसी रद्द करने से आर्थिक मंदी की चपेट में देश क्यों आ सकता है, इसके बारे में बताने से पहले कहना चाहूंगा कि आपको दिल दिमाग खोलकर पढ़ना समझना पड़ेगा. थोड़ी देर के लिए मोदी विरोध या समर्थन किनारे कर दीजिए.

यूपी में चुनाव करीब है और नेताओं ने पांच साल में जो सैकड़ों करोड़ कैश इकट्ठा किया है ऐन केन प्रकारेण, वह रद्दी हो गया. ये वो पैसा था जिसे जनता तक जाना था, वोट खरीदने के लिए, एक एक वोटर को पांच पांच सौ या हजार हजार रुपये. वोटरों तक गया यह पैसा मार्केट में लगता, खरीद फरोख्त होती, राशन से लेकर फूड प्रोडेक्ट और दवा आदि जो भी इससे हासिल होता या इकट्ठा किए मूल धन में मिलाकर जो भी टीवी फ्रिज मोबाइल खरीदा जाता, वह नहीं होगा. इससे प्रोडक्शन बढ़ता, सामान बिकता तो नया सामान बाजार में भेजने के लिए प्रोडक्शन का काम होता जिससे इंप्लायमेंट मिलता और औद्योगिक ग्रोथ होती. इस हजारों करोड़ के नोट के रद्दी हो जाने से ये पैसा अब आम जन के हाथ नहीं पहुंच पाएगा. प्लीज, वोट खरीदना गलत है या सही, इस नैतिकता को अभी किनारे कर दीजिए और सिर्फ आर्थिक हिसाब से सोचिए.

नेताओं का यह पैसा बैनर पोस्टर लाउडस्पीकर कार आदि का प्रोडक्शन करने वालों के पास जाना था. नेताओं का यह पैसा मीडिया वालों कर्मियों के पास भी जाना था, नैतिक अनैतिक रूप में.

यानि यह पैसा मार्केट में घूमता, देश के मिडिल क्लास, लोअर मिडिल क्लास और बेहद गरीब लोगों तक जाता. औद्योगिक उत्पादन करने वालों से लेकर छोटे कारोबारियों तक जाता. अब यह पैसा कहीं नहीं जाएगा. मार्केट की मोबिलिटी बाधित होगी. खरीदारी कम होगी. लेन देन कम होगा. खपत न होने से प्रोडक्शन कम होगा. प्रोडक्शन कम होगा तो औद्योगिक इकाइयां छंटनी करेगी. छंटनी करेगी तो बेरोजगारी बढ़ेगी.

यही काला धन जो रियल इस्टेट वालों के पास था, डाक्टरों के पास था वह नए मकान भवन बनाने में लगता. मजदूर काम करते. वे पैसे को बाजार में ले जाकर खरीद करते. सीमेंट, ईंट, सरिया, बालू के कारोबारियों के पास पैसा जाता. यह सब धंधा मंदा हो जाएगा. इनके यहां काम करने वाले छंटनी के शिकार होंगे. डाक्टर उस काले धन से अस्पताल बनवाते, नर्सिंग होम बनाते, ढेर सारे नर्सिंग स्टाफ भर्ती होते, हेल्थ इंस्ट्रुमेंट खरीदे जाते. अब यह सब न होगा क्योंकि वह पैसा रद्दी हो गया.

नेता, रियल इस्टेट वाले और डाक्टरों का उदाहरण केवल समझाने के लिए दिया है. इन्हीं काले धनों से स्कूल कालेज विश्वविद्यालय खोले जाते हैं. इन्हीं काले धनों से नए प्रोजेक्ट्स में निवेश किए जाते हैं. अब ये सब ठप हो जाएगा. ढेर सारे जो नए काम होने थे. रुक जाएगा क्योंकि जो जो काला धन रखा था, वह रद्दी हो गया. मार्केट में लंबे समय तक खरीदारी न होगी. निजी स्तर के नए प्रोजक्टस न शुरू होंगे. बिक्री कम हो जाएगी.

समझदार के लिए इशारा काफी है.

अंबानी जो सबसे बड़े आदमी हैं भारत के, इसलिए नहीं कि उनके पास खूब सारा कैश है. बल्कि उनके पास तो कैश जो होगा सब एकाउंटेड होगा. उनका धन एसेट में है, शेयर में है, प्रोडेक्ट में है, सर्विस में है. वह तो जनता से मुनाफा खींचते रहेंगे. उनका जो काला धन होगा वह स्विटरलैंड से लेकर दुनिया के ढेर सारे ब्लैक मनी फ्रेंडली देशों में होगा. उस पर कोई असर न पड़ेगा. पड़ेगा हमारे आप जैसे छोटे बड़े जिलों के रहने वाले आम लोगों को जिनको इस पैसे से रोजगारा पाना था, या प्रोडक्ट खरीदना था, या घूमना था. सब कुछ ठप हो जाएगा धीरे धीरे. नई मुद्रा के आने और उसे आम जन तक पहुंचने में जो लंबा वक्त लगेगा, उस दौरान आए बाजार के ठहराव से पूरी अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आ सकती है.

मंदी का एक नियम है कि जब यह आती है तो जल्दी जाती नहीं, अपना चक्र पूरा करने के बाद ही टलती है.

ईश्वर करें ऐसा न हो. मेरा कहा झूठ निकले.

हां, लेकिन जो असली काले धन वाले हैं, जिनका जमीन, सोना और विदेशों में काला धन गड़ा है, उन्हें कोई फरक नहीं पड़ने वाला. क्योंकि वह धन न तो भारत के मार्केट में, भारत की इकोनामी में चलायमान था और न चलायमान होना था. वह अर्थव्यस्था से बाहर का धन था, जिसे सरकार ले आती तो भारतीय अर्थव्यवस्था में अतिरिक्त मोबिलिटी आती. उसके उलट जो भारत की इकानामी में इस्तेमाल होने के लिए रखा काला धन, वह रद्दी हो गया जिससे बाजार का रुख मंदी की ओर जा सकता है.

अगर नोट करेंसी बदलने रद्द करने से अर्थव्यस्था दुरुस्त हो जाया करती तो वह पहले ही हो जाती क्योंकि भारत में पहले भी नोट करेंसी बदले रद्द किए गए हैं.

यह केवल एक सस्ती लोकप्रियता का तरीका है. नया धन नया नोट नया करेंसी जो आएगा, वह आम जन तक न पहुंचेगा. वह सरकार, अफसर, कर्मचारी, कारोबारी आदि के एक दस परसेंट वाले छोटे समूह के बीच लंबे समय तक दौड़ेगा. बहुत देर बाद वह नीचे आम जन, सबसे गरीब आदमी के पास पहुंचेगा. तब तक लोग सौ रुपये के नोट से लेकर एक रुपये के सिक्के तक में किसी तरह जीवन यापन करेंगे और बाजार को मोदी सरकार के भरोसे छोड़कर घर बैठे रहेंगे. देखिएगा, जनता से बहिष्कृति बाजार (भले ही मजबूरी अभाव में बहिष्कार को मजबूर किया गया हो) कितने दिन हंसी खुशी नार्मल रह सकता है. टें बोलना ही पड़ेग.

ईश्वर करें ऐसा न हो. मेरा कहा झूठ निकले.

मेरा लिखा इसके पहले वाला पार्ट भी पढ़िए ताकि पिक्चर क्लीयर रहे :

कालेधन पर मोदी के सर्जिकल स्ट्राइक का सच सुनिए

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के उपरोक्त फेसबुक पोस्ट पर आए कुछ प्रमुख कमेंट्स इस प्रकार हैं…

Ashwini Kumar Srivastava बेहतरीन और सरल भाषा में किया गया विश्लेषण

Manudev Bhardwaj नायाब आकलन

Dinesh Choudhary गज़ब!!

Sunil Kumar बाज़ार की हालात अभी से ही खराब होने लगी हैं

Robin Singh यही तो देखना है.. फैसला तो अच्छा है.. मैं समर्थन में भी हूँ पर क्रियान्वन कितने अच्छे से होता है आपूर्ति कितने अच्छे से होती है और साइड इफेक्ट्स जैसे रिसेसन जो पैदा होगा व्यापर में उससे निपटने की कितनी तयारी है अब यही देखना है.. अगर इसमें सफल रहते हैं तो सरकार को 100 में से 200 मार्क्स.. कोई गधा ही कैश का बिस्तर बना के सोता रहा होगा.. बेवकूफाना फैसला राजस्व की छति .. आम आदमी के लिए मुसीबत अलग.. जिनके घर शादी है उनको रोने आंसू नहीं आ रहा..

Vivek Dutt Mathuria सरकार कहती है कि हमने चूहे पकडने के लिये चूहेदानियां रखी हैं। एकाध चूहेदानी की हमने भी जांच की। उसमे घुसने के छेद से बडा छेद पीछे से निकलने के लिये है। चूहा इधर फंसता है और उधर से निकल जाता है। पिंजडे बनाने वाले और चूहे पकडने वाले चूहों से मिले हैं। वे इधर हमें पिंजडा दिखाते हैं और चूहे को छेद दिखा देते हैं। हमारे माथे पर सिर्फ चूहेदानी का खर्च चढ रहा है। -हरिशंकर परसाई
डॉ. अजित तार्किक विश्लेषण आपसे असहमति की कोई वजह ही नही बचती।

Kamal Kumar Singh बेहतरीन।

पवन उपाध्याय राजस्व सचिव ने दी जानकारी… बिना हिसाब का पैसा जमा करने पर टैक्स के साथ देनी होगी 200% की पैनाल्टी। बैंको द्वारा ढाई लाख से ऊपर जमा की गई रकम की जानकारी सरकार को देनी होगी। ढाई लाख से ज्यादा जमा पर सरकार की नज़र (अगर पैसा कानूनन वैद्य है तो आपको कोई दिक्कत नहीं होगी)।

Sumit Vaish सब कुछ एक साथ नहीं सुधारा जा सकता। आपने जो शंका व्यक्त की है नए नोटों के आम आदमी तक न पहुँच पाने की और 100, 50 के नोट पर काम चलाते रहने की केवल उसी पॉइंट में दम है। जो अगर झूठ साबित हुआ तो अच्छा होगा। बाकी जो स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सटी नेता जी लोग खोल रहे हैं उनकी उत्तमता तो जग जाहिर है।

Vinay Pandey उम्दा सर

Manmohan Sharma Your assessment is correct but blind supporters of modi are delibraterly misleading people.

Shivam Srivastava चुनाव बहुत से लोगों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप में रोज़गार देता है और काला धन का प्रयोग इसमें होता है । लेकिन यह धन आया कहा से ? निश्चित रूप से गरीबों का ही पैसा है । जनता का पैसा है । एनआरएचएम के पैसे का बन्दर बाँट हो गया , इलाज़ के अभाव में अनेकों लोग मर गए । मनरेगा का पैसा है , मिड डे मील का पैसा है , खनन का पैसा है । 05 साल में कुछ दिन चांदनी होती है फ़िर अँधेरी रात । इस अँधेरे को हटाने के लिए सरकार द्वारा उठाया गया कदम सराहनीय है । आतंकवाद , नक्सलवाद, अपहरण , रंगदारी आदि में कमी संभावित है ।

Yashwant Singh सराहनीय तब होता जब यह विदेशों में बसे कालेधन से होता. देश के काला धन को अचानक खत्म कर देना देश के बाजार को बर्बाद करेगा और देश का बाजार देश की इकानामी को बर्बाद करेगा और देश की इकानामी मंदी के कारण सब कुछ को नष्ट करेगा.

Shivam Srivastava कुछ दिनों तक के लिए कह सकते है कि बाज़ार में मंदी रहेगी । लेकिन तकनीकी तौर पर ऐसा नहीं है । महीने दो महीने में स्थिति सामान्य हो जायेगी । सामानांतर अर्थव्यवस्था किसी भी देश के लिए अच्छी नही होती है । करपावंचन पर कुछ दिनों के लिए विराम लगेगा । देश में विकास की उम्मीद की जा सकती है ।

Arun Srivastava भाजपा नेता प्रवचन दे रहे थे कि इससे कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाएं रुकेंगी। लोग पत्थर फेंकने वालों को नकली नोट देते थे।

Yashwant L Choudhary सर ये पूरा पोस्ट ही कटाक्ष है | इसमें आपने राजनेताओं और डाक्टारो, इसकी और उसकी खूब धोयी है | इसका कंटेंट देखने में कुछ है और पढने के बाद विचार करने पर कुछ और है | ये आज तक का सर्वकालीन भयानकम पोस्ट है | इसको में सेव कर लेता हु

Ghanshyam Dubey मोदी जी अर्थ और राजनीति दोनो के महान खिलाड़ी हैं । अब तो PM भी हैं । उन तक , उनके खेल को 2014 मे कांग्रेस नहीं समझ पाई और सिमट कर 44 तक आ गयी , तो देश का गरीब – आम जन क्या समझेगा । गरीब आदमी की सारी तकनीक मामूली जीवन को गुजारने मे बिता देता है , उसके लिए यह सब अचरज जैसा, दुःस्वप्न जैसा है । …

Manish Kumar भाई बहुत ही साफ़ सुथरी भाषा और बड़ी ही समझदारी भरा ये पोस्ट लेकिन बहुत देर जो चुकी है जिसको फायदा पहुंचना था पहुँच गया। गरीब को मुसीबत दे गया।

Rajnish Tara Musibat gareeb ko nahi jamakhoro ko de gaya

Manish Kumar हाहाहा रजनीश तारा बहुत से धंधेबाजों को कमाने का मौका दे गए। किसी का एक रुपया नहीं रुकने वाला सब बदल जायेगा। सिर्फ मुसीबत उस गरीब की होती है जो पैसों के आभाव में शिक्षा नहीं पा पाया और अब मजदूरी करके महनत करके अपने बच्चों का लालन पालन कर रहा है। रजनीश तारा अमीर से भी पूँछों और गरीबों से भी। नोट बदलने में ना यशवंत भाई को परेशानी है ना मुझे और ना शायद आपको। परेशानी जिसे है वो आपके आस पास वाले ही हैं।

Anita Gautam आपकी बात सही है पर यह संवैधानिक तरीका नहीं है।

Raghvendra Singh Government has indirectly bailed out the PSU banks with black money as their NPA have risen to double digit. PSU banks needed capital infusion of about 110 b$ otherwise technically they are bankrupt.

DrRakesh Pathak तार्किक आकलन बधाई

Acharya Chandrashekhar Shaastri चुनाव में जनता को पहुंचाने के नाम पर कुछ दलाल नेता से रूपये ऐंठ लेते हैं कि वोट खरीदने हैं। लेकिन उस रकम का 10 प्रतिशत भी ऍम वोटर के पास नहीं जाता। हैं दारु का चक्कर वे लगातार चलाते हैं और मतदाता को पूरा उलझाते भी हैं

Rajnish Tara Yashwant bhaiya pahli baat to ye ki kala dhan rakhna hi gunah hai… barso tak kala dhan daba kar use election me gareebo ko baat kar unke vote kharidna bhi gunah hai… unke kharide hue votes ke adhar par ek giri hui aur ghatia sarkar banana bhi gunah hai….is faisle se mujhe to koi dar nahi… gine chune 5 ya 10 note mere paas honge jo main exchange kar lunga lekin jinke bed ke neeche chatte biche hai 500 aur 1000 ke wo chinta karenge…. ya to tax do ya is sardi me unhe jala ke haath seko….haa 2 4 din ki dikkat to hogi par faisla durgaami hai…. baaki adani ambani to door ki baat hai kisi chote mote builder pe bhi chapa maro to 5 7 crore to mil hi jate hai adani ambani pe to kuch jyada hi joga…. bhai mujhe aaj mera 500 ka note na toot pane ki takleef to jarur hui but mai modi ko salute karta hu

Raghavendra Narayan 2008 की आर्थिक मंदी से भारत को यही बचाया था सिर्फ बैंकिंग आधारित अर्थव्यस्था खतरनाक होती।

Sharad Mishra भाई शाब आप तो नोबल prize के उपयुक्त economic analyst है जो ये बताने का असफल प्रायश कर रहे हैं की काले धन की समानांतर अर्थव्यवस्था क्यूँ ज़रूरी हैं ।। वाह वाह । समश्या ये है की जिन्हें इस तरह की अर्थव्यवस्था मे अपने हित देखने की आदत हो जाती है वो ऐसे ही कुतरक देके लोगों को बरगनाले का प्रायश करते रहते है और किसी भी चीज़ का आर्थिक आकलन अवैध धंधों से कमाए धन के आधार पर तो क़तई नहीं किया जाता। ऐसी काले धन आधारित अर्थव्यवस्था से जितनी जल्दी आज़ादी मिलें उतना अच्छा हैं उससे वस्तुओं के मूल्य भी वास्तविक रहते हैं और ग़ुब्बारे तो फ़ुटना ही हैं और अत्यधिक बाज़ारीकरण पर भी संयम मेन रहेगा इसमें बराई क्या है महाशय।

Rajnish Tara Mujhe umeed hai ki iske baad bahut sa kala dhan sirf isliye bahar niklega ki kahi raddi naa ho jaye aur usse fayda hi hoga …. black ko white karne ke liye sarkari khajane me mota tax bhi jayega aur wohi paisa market me circulate bhi hoga…fir kaha bachi mahangai…. ya to jalao ya fir badlao

Mitra Ranjan और चूँकि आपको भी मालूम है कि ईश्वर कहीं नहीं है…इसलिए आपका कहा तो सच और सिर्फ सच ही निकलेगा

शांति भूषण कुमार यार कभी तुम क्रोनी कैपिटल पर मोदी को गरियाते थे और केजरीवाल की तारीफ करते थे…..यशवन्त सिंह जरा बताना तो कि वैचारिक रूप से दोगला किसे कहते हैं?

Bhagwat Shukla Bhai ji apke hisab se black money ko samanantr rup se flow hone dena chahia…. modi ne jo kia wo nhi hona chahia……waaah salute apko

Ripudaman Kaushik आदरणीय यशवंत जी, एक नज़र इधर भी, जितना मेरी समझ में आया उतना लिखा है 170000000000000 के करेंसी नोट इस समय भारत में व्यवहार में हैं जो की नकली हैं और पाकिस्तान या अन्य देश विरोधी माफियाओं द्वारा मार्किट में झोंक दिया गए हैं, जो लोग इस बात को ले कर प्रश्न उठा रहे हैं की, धन बेशक काला हो लेकिन वह भारत की अर्थव्यवस्था का अभिन्न अंग है, और प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मार्किट को रोटेट करता है, इस तरह से करेंसी नोट को बंद कर देना बचकाना कदम है जो की भारत को भयंकर आर्थिक मंदी की तरफ धकेल देगा…..उफ़्फ़  … सोशल नेटवर्क्स पर इस अकथित virtual मंदी को प्रोडक्शन, इंप्लायमेंट, औद्योगिक ग्रोथ, औद्योगिक उत्पादन, छोटे कारोबारी, मार्केट की मोबिलिटी, बेरोजगारी बढ़ेगी, औद्योगिक इकाइयां में छंटनी, नए प्रोजेक्ट्स में निवेश बंद, बाजार के ठहराव… आदि-आदि अनेकानेक कारण दे कर समझाया जा रहा है.. लेकिन ये कोई विचार नहीं कर रहा की 170000000000000  ये केवल एक अनुमान मात्र है, इस आधार पर की हाल के कुछ वर्षों में ज़ब्त की गयी नक़ली मुद्रा में हर 10 लाख़ नोट में 250 जाली होते हैं, और जो करेंसी चुनाव जैसे ख़ास मौके के लिए टनों की मात्रा में गोदामों में रखी है वह इस अनुमान से भी कई गुना हो सकती है,  अब प्रश्न ये है की 17 लाख करोड़ रूपये की मुद्रा बाज़ार से बाहर कैसे निकलेगी या निष्क्रिय कैसे होगी। १. कल रात से जब से प्रधानमंत्री ने घोषणा की है, तब से कोई भी आदमी 500 का एक नोट लेने को तैयार नहीं है, अधिक मात्रा तो भूल ही जाओ, मतलब एक भी नया जाली नोट, अब अगले 50 दिनों में चलन में नहीं आने वाला। २. यदि आप के पास है, और आप बैंक चले जाते हैं, तो कैशियर जब्त कर लेगा (हालांकि इस बारे में मुझे कोई सुचना नहीं है की भुगतान होगा या नहीं). ३. अब जिसे पता है की उसके पास जाली नोट का स्टॉक हैं और bulk stock है, मात्र उसका पैसा ही मिट्टी होगा।  ४. जाली नोट की सबसे अधिक चोट बांग्लादेश और नेपाल में बैठे सटोरियों पर पड़ेगी, जो चुनाव जैसे ख़ास मौकों पर या ड्रग्स के लेनदेन में 300-400 की face value पर 1000 का नोट सीमापार के गोदाम से भारत भिजवाते थे.  दरअसल सरकार का मुख्य निशाना असली करेंसी वाला काला-धन नहीं है, बल्कि ये जाली करेंसी वाला नकली धन है. —– इसे दूसरे नज़रिये से देखते हैं की अगले 50 दिन में यदि 17 लाख करोड़ रूपये की कोढ़ रूपी जाली मुद्रा का बाज़ार से जाना, और लगभग 90% काला धन जो की घरों, तिज़ोरियों में कब से बंद था उसका एकदम से बाज़ार में किसी भी माध्यम से परावर्तित हो कर व्यवहार में आना. ये एक बहुत बड़ी घटना है.  17 लाख करोड़ + अचल मुद्रा (काला धन) का आगमन = भारत की अर्थव्यवस्था में इतनी ही value की अपरोक्ष इन्वेस्टमेंट का होना है नैतिक या अनैतिक रूप में. अब मेरे जैसे छोटे लोगों की भी सुन लो : हमारे यहाँ धन को लक्ष्मी रूप में पूजा जाता है, तो असली वाला नोट हिन्दुस्थान में कोई जलाएगा तो कतई नहीं, येन-केन प्रकारेण अगले 50 दिनों में बाहर आएगा ही और बदल दिया जाएगा।

Arif Beg Aarifi 17 lakh karod ki total currency purey india me hai.jisme se 14 lakh karod k 500 wa1000 k note hai………aap k dwara diya gaya aankda durust nahi hai,aap total mudra ko fake mudra samjh baithe hai

राज किशोर उपाध्याय मोदी काले धन को दूर रखने के लिए वाक़ई संकल्पशील हैं तो पार्टी के धन/खर्च का ब्योरा आरटीआइ के तहत देश को देने के मामले में उन्हें स्वेच्छा से आगे नहीं आना चाहिए था?

Sanjay Kumar Singh In economy depression is caused due to lack of demand or excessive supply but this decision ofgovernment will make morecirculation of money in economy. Then how we can say that in future economy of India will suffer depression.

Anurag Khandelwal  अगर नोट करेंसी बदलने रद्द करने से अर्थव्यस्था दुरुस्त हो जाया करती तो वह पहले ही हो जाती क्योंकि भारत में पहले भी नोट करेंसी बदले रद्द किए गए हैं. केवल आप के लिए जनाब. १) पहले जब मुद्रा को बदला गया तब सरकार के पास मुद्रा के विनिमय पर नजर रखने के साधन नही थे….. २) डिजिटल विनिमय नहीं होता था….. ३) प्लास्टिक करेंसी नही थी….. ४) मोबाइल पे वॉलेट नहीं थे….. ५) नगद क्रय विक्रय पर निश्चित सीमा तय नही थी….और शायद आपको ऐसा लगता है की यह सारे बड़े प्रोजेक्ट, कॉलेज, चुनाव, अस्पताल आदि केवल और केवल काले धन से ही संभव है और इसीलिए सरकार को इस समानांतर अर्थव्यवस्था बरक़रार रखना चाहिये….हद्द है भाई…. कसम से बाबू आप जैसे लोग स्वर्ग में भी मीन मेख निकाल सकते हो….. गुड ब्रो….कीप इट अप…. साहब जी, ये जो इतनी सारी छोटी मछलियां गिना रहे हो ना आप ये सब मिलकर कई बड़ी बड़ी मछलीयों के आकार से भी ज्यादा बड़ी हो जाएगी….. रही बात मंदी की तो आपके हिसाब से काला धन ही यदि अर्थव्यवस्था को ऑपरेट करता है तो स्वागत है ऐसी मंदी का जिसमे न्यूनतम काले धन के लिए भी कोई स्थान नहीं हो…. रही बात विदेश में जमा काले धन की तो भविष्य के गर्भ में क्या है यह कोई नहीं बता सकता….सरकार की अपनी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संधियाँ है….बैंकिंग कानून है हर देश के….और सभी को साध कर चलना पड़ता है…..सरकार की प्रतिबद्धता में कोई कमी नहीं है इस विषय पर…. हाँ यह सही बात है की गोल्ड और रियल एस्टेट के अब तक के काले धन पर कोई फर्क नहीं गिरेगा किन्तु इस क़ानूनी करेंसी निरस्ती के बाद कहीं भी काले धन का निवेश मुश्किल होगा और बड़े transaction सरकार की निगरानी में आ जायेंगे…. आप बिल्लोरी कांच लेकर नकारात्मकता खोजना छोडिये भाई सा….थोड़े भोत दुःख आये भी तो मिलजुल कर बाँट लेंगे…. देश को बढ़ाना जो है…..

Roy Tapan Bharati आपके विश्लेषण और तर्क से.सहमत हूं।

Geeta Yadvendu कुछ भी हो मोदी भक्त तो मोदी आरती ही गाएँगे

Prashant Tulsani लेखक लेख लिखते समय , काफी कंफ्यूज जान पड़ते है ,  एक तरफ वो चुनावों में प्रयोग होने वाले काले धन की बात करते हैं , तो दूसरी ओर उसी काले धन को बाजार की मंदी से जोड़ कर देखते है , आशय स्पष्ट नहीं होता , क्या वो मान कर बैठे है के अब भारत में जो है सिर्फ वेसा ही चलेगा ? या वो चाहते है कि थोड़ा मंद ही सही किन्तु बाजार को सफ़ेद धन पर चलना चाहिए? हर छोटा व्यापारी ( मेरा परिवार भी ) इस बात को जनता है की अगले ५० दिन कुछ मुश्किल में गुज़र होने वाले है , और उसके बाद बाजार धीमे ही उठेगा , लेकिन ये भी जानते है कि ऐसा होने से मकान से लेकर भवन निर्माण तक जो प्रीमियम राशि काले धन के रूप में देनी पड़ती थी उस पर लगाम कस सकेगी,  दूसरे चरण में भी लेखक काले धन को ही विकास कार्यों से जोड़ते हुए नज़र आते हैं ,  साथ ही लेख के आरम्भ में लिखते है की “आपको दिल दिमाग खोलकर पढ़ना समझना पड़ेगा. थोड़ी देर के लिए मोदी विरोध या समर्थन किनारे कर दीजिए”  और अंत आते आते स्वयं ही लिखते है “यह केवल एक सस्ती लोकप्रियता का तरीका है.”  और फिर अंत में अपने लेख को काल्पनिक सिद्ध कर लिखते है “ईश्वर करें ऐसा न हो. मेरा कहा झूठ निकले” कुल मिलकर इस लेख को देखे तो , तथ्यों, आकँडो , एवं तर्क से दूर एक काल्पनिक लेख ,

Deepak Shweta Singh Kya praksh dala hai Bhaiya…. Ekdam sysska led bulb type

Sudhir Pradhan कुछ तार्किक विश्लेषण

Mayank Pandey अभी तक काली अर्थव्यवस्था में ही तो जीते आये हैं। अब नये वाले को भी देख लिया जाय।

Adv Shivani Kulshrestha bilkul sahmat hu sir…apne sahi likha hai ekdam…ye apne dil se likha hai. koi banwatipan nahi hai..fact or akarne agar sahi hote to deah itna gaddhe me na jata…

Rishi Munjal Vo noor ban ke jamaane mein fail jaayega – Tum aaftaab mein keedey talaash karte rehna ..

Prakash Govind यशवंत भाई बहुत जबर्दस्त और सटीक लिखा है …. पठनीय पोस्ट

Himanshu Priyadarshi Yashwant Singh bhai munhe bahut shiddat se mahsoos hota hai ki aapko abhi economy padhne ke bahut zarroorat hao

Prakash Govind तो आप ही पढ़ा दीजिये न. वैसे आप पहले ही पढ़ा चुके हैं —

Shubh Narayan Pathak सरलीकृत विश्लेषण!

Abhishek Singh Rajput भड़ास मीडिया पर लिखते-लिखते लगता है पुरे भसिया गये हैं…,खुद तो अपनी जवानी में कुछ नही कर पाये, एक बूढ़ा आदमी कुछ अच्छा कर रहा है, उसको तो करने दो भईया… काहे दर्द उखड़ रहा है इतना?

Sudesh Tamrakar वाह रे अर्थशास्त्री! अर्थशास्त्र के ज्ञाता धन्य है आपका ज्ञान! जो कालाबाजारियों और भ्रष्ट नेताओं के द्वारा कमाये गए धन से भारत की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने का ख्वाब देखते और दिखाते हो आप वाकई धन्य हैं । आपको वो करोड़ों जाली नोट भी नहीं दिखते जो भारत की अर्थव्यवस्था को खोखला कर रहे थे आतंकवादियों के हांथों की बंदूकें अलगाववादियों के हांथो की मशाल बन रहे थे जो बच्चों के स्कूलों में आग लगा रहे थे। बात करते हैं कि थोड़ी देर को मोदी विरोध या समर्थन किनारे रख दीजिए। ठीक है आप देशहित की बात तो करिये । बात करते हैं ….। मोदी का ये कदम उनके खुद के लिए सरकार के लिए एक आत्मघाती कदम है लेकिन भ्रस्टाचारियों और कालाबाजारियों के लिए फांसी का फंदा। माना कि अभी भी बहुत से बच जाएंगे जिसके लिए एक और सर्जिकल स्ट्राइक करनी होगी वह है चुन चुन के रेड्स देखते जाइये अभी 2 साल से ज्यादा बाकी है। सलाह देने के लिए मोदी जी ने मोबाइल एप का तोहफा जो दिया है । सो उस पर आप भी सलाह दे सकते हैं । वैसे भी पप्पू तो खुद ही समझदार है आपकी बात मीडिया तक पहुंचा ही देगा।

Gaurav Bisht aap jis money ki baat kr re h wo black money h …beshak wo rotate hota pr ..un logo ki akal thikane ni lgti jo frod krte h …gandhi ji ne kha h …paap mitao… ab se 2 baar pkka sochenge ese log

Rajesh Gupta क्या स्तर है इन बुद्धिजीवियों का कहते तो हैं हम पूंजीपति के लूट के विरोधमें हैं लेकिन असली बात ये लोग विदेशी देशद्रोही के भाड़े के टट्टू हैं

Mohan Chopra कमजोर सोच वालों के लिए जोरदार लेख।

Nand Kishor Jha यसवंत जी, आप के बात में दम है। लेकिन अर्थव्यवस्था में भी स्वच्छता भी जरुरी है।काले धन की सामानांतर व्यवस्था देश के पालिसी इम्प्लीमेंटेशन में बाधक है। अभी यदि सरकार को इससे कुछ लाख करोड़ रुपये मिलते हैं तो जनकल्याण पर ही खर्च होगा। यदि सरकार सख्त रहे तो भ्रस्टाचार पर भी कंट्रोल होगा। नकली नोट पर भी काबू होगा, जिससे आतंकवादी गतिविविधियों पर भी लगाम लग सकता है।

Vishwakarma Harimohan मानता हूँ कि इस बदलाव से अर्थव्यवस्था फिलहाल स्लो होगी और ये बात मोदी से लेकर जेटली और विपक्ष सभी कह रहे हैं। लेकिन आपके सवालों के जवाब आपके सवालों में ही हैं। अंबानी टाइप लोग कितना भी पैसा विदेश में रखे हों लेकिन जब देश की इकॉनमी ठप्प होगी तो न तो उनके पास रिलायंस बीमे की किश्तें पहुंचेगी न टीवी बिकेंगे और न मकान। कहने का आशय कुछ समय के लिए मार्केट या टर्न ओवर उनका भी थमेगा, तब। आप भी जानते हैं कि अम्बानी हो चाहे कोई और सब कर्जे के संजाल में हैं किसी पर देशी कर्ज है किसी पर विदेशी जब कर्ज है तो ब्याज भी जाएगा। अब ब्याज जाएगा और आवक न होगी क्योंकि मार्केट में टर्नओवर घूमने में समय लगना है तो संतुलन बिगडना है। कोई भी उद्योग तभी फलता है जब टर्न ओवर चालू हो। अब दिवाला निकला कि नही। माल्या या सुब्रतो राय को शौक नहीं था दिवालिया होने का किन्तु गलत नीतियों के कारण आवक को लुटाते रहे और लागत लगती रही सो अपनी जान बचाने दिवालिया हुए। इसलिए हे भडासानंद महाराज खुद को संभालिए।

Balwant Singh आपका कहा झूठ ही होगा श्री मान

Umrendra Singh Pahli baar asahmat hu aapke visleshan se

श्री विदेह इन्फ्लेशन के बारे में भी कुछ सुना है यशवंत जी….और इस पर मोदी के फैसले का क्या असर होगा यह भी बताईये

Nidhi Panday 100 % correct..i like ur articke nd view iagre with this..

Navin Kr Roy यह एक व्यंग्यात्मक लेख है जो साफ़-साफ़ झलक रहा है।पर यदि इसे लेखक का विश्लेषण भी मान लिया जाए तो यह कहने में कोई हिचक नही है कि,इनका विश्लेषण अधूरा है।काले धन के नष्ट होने से भी अर्थव्यवस्था को फायदा हो सकता है।मैं बहुत विस्तार में नही जाऊँगा।पर कम से कम हजारों करोड़ नकली नोट जो भारतीय बाजारों में फैलकर दीमक की तरह हमारी अर्थव्यवस्था को चाट रहे थे,उस पर तो रोक लगी।क्या यह कम है ? और सम्पूर्ण रूप से शायद ना हो पर, निश्चित रूप से सरकार के इस निर्णय से छुपे काले धन पर चोट पहुंचेगी।

पंडित राकेश कुमार त्रिपाठी कुल मिला कर मूलभूत आवश्यकता रोटी कपडा और मकान पर फोकस रहेगा और किसान की उन्नति का मार्ग प्रशस्त होने की सम्भावना बढ़ती है …. अतिरिक्त और गलत मार्ग का धन विलासिता को बढ़ावा देता है । आतंक की रीढ़ तोड़ने से कुछ समय देश में शांति की संभावनाएं भी प्रवल होती है

Shahnawaz Qadri आप की बात को नकारा नहीं जा सकता

Drashish Tiwari भाई साहब बड़ा बेहूदा कुतर्क दिया है आपने।आपका कुतर्क कुछ ऐसा है जैसे बीमारी ठीक करने को इंजेक्शन लगाना जरुरी तो है।पर डर इस बात का है की कही इंजेक्शन से स्किन में छेद न हो जाये।या सुई अंदर टूट न जाये इसलिए इंजेक्शन न लगाया जाये। Nonsense post

Rajesh Kumar Singh थेथरलॅाजी…

Irfan Khan देश का आर्थिक शोधन समय समय पर ज़रूरी है। कड़वी दवाई का साइड इफ़ेक्ट तो होता ही है।

Pankaj Chaturvedi अब देखिये जनधन खातों का खेल, सुदूर गांव में खातों में दो लाख के आस पास जमा होगा फिर निकाला जायेगा, कई करोड खाते हें गणित लगा लें . ढाई लाख से ज्यादा कि राशि पर पूछताछ होगी सो उससे कम जमा होगा , दिक्कत हमारे नजरिये का हे, विजय बहुगुणा जब इधर होते हें तो राहत के अरबो रुपये का घोटाला करने वाला खलनायक और इधर आ गए तो देव-तुल्य. , जिस काँग्रे पर आरोप हे काले धन का उसके दर्जनों बड़े नेते इस तरफ आ गए यानि सफ़ेद वाले हो गए, शूट द मेसेंजर वाली थ्योरी हे, काले धन के मूल पर नहीं सोचना शाखाओं पर पानी छिडकना, जमीं जायदाद के सर्किल रेट घटा दें , रियल एस्टेट बाज़ार जमीं पर होगा और काला धन असल में सड़कों पर कूड़े में मिलेगा

Sunita Soni Use less thought… You don’t understand economics

Abdul Samid this step of modi ji is very good bt I think it is not for black money holders bcz they may have money in formats other than cash

Alamgir Khan Perfect analysis

Preeti Dubey आज़ यकीन हुआ तर्क सुतर्क और कुतर्क…..काले धन की इतनी उपयोगिता?//वाह साहेब धन्य आपकी सोच धन्य आपकी लेखनी। लिखना अच्छी बात है।लेकिन जो हम बोल रहे है वो केवल भिन्न विचार के कारण बोल रहे है या ये भी ध्यान रख रहे है के इसका सामान्यजन की मानसिकता पे क्या असर पड़ेगा?आप चोरी को बढ़ावा दे रहे है। गज़ब है ।

Satbeer Singh main to sochta tha ki Kejriwal hi akela tha but i m wrong

Sarwjeet Singh काश आप जेसी बुद्धि और सोच वालों के लिए भी एक सर्जिकल स्ट्राइक होता

Rajendra K. Gautam इस फैसले से साफ हो गया है कि अपनी नाकामी को ढँकने और जनता का ध्यान भटकाने के लिये किया गया है। विदेश से काला धन ला नहीं पाये और देश में काला धन खोजने की मुहिम छेड़ कर यह संकेत दिये हैं कि देश की जनता टेक्स चोर है। जनता अपना टेक्स भी दे रही है और परेशानी भी उठा रही है। उसको न तो सुरक्षा मिल रही है और न ही टेक्स से राहत। इससे सिर्फ और सिर्फ जनता ही कष्ट भोगेगी। मजे मरेंगे सिर्फ और सिर्फ टेक्स चोर।

Vivek Dutt Mathuria अब जन धन योजना खाते करेंगे जुगाड का काम….

Madhukar Singh पैसे की तरलता (liquidity) केवल काला धन बर्बाद होने से ही नहीं प्रभावित हो रही है बल्कि आम लोगों की शुद्ध कमाई को नोट बदलने के नाम पर बैंकों में अनिश्चित समय तक रखने से भी प्रभावित होगी। इस तरह नगद आरक्षण अनुपात (cash reserve ratio – CRR) अघोषित रूप से बढ़ गया। अर्थशास्त्र का सारा व्यवहारिक सिद्धांत दरकिनार हो चुका है। ऐसे दौर में मांग कम पूर्ति ज्यादा होने के बावजूद सोने चांदी और अन्य चीजों के दामों में बेतहाशा वृद्धि भी संशय का विषय बन गई है। ऐसे ढेरों अनुत्तरित पहेलियां इस बर्बर पूंजीवादी और बाजारवादी समय की पहचान हैं। अन्य विषयों पर ध्यान आकर्षण कराना खतरनाक है इसलिए मेरी तरफ से इतना ही।

Arvind Gupta मोदी जपान उड गये देशवासी को busy कर के मोदी मोदी नमो नमो नमो

Manju Kumari Badlab prakriti ka niyam hai ye hamlog jante hai,Baba Bhimrab ambedker ka bhi to kahna tha ki agar samajh aur duniya ko bhrast mukta rakhna ho to Har Das saal me note ko basal do,to ye subha kam modijee ne hi kar dala
Ratnesh Gupta Jaisi jiski soch. Ek baat aur isko yadi positive le to logo ki niyat me bhi to badlav ayega aur employee bhi salary ko hi apni dharohar samjhenge  Jo hai thode samay ki pareshani but jindgi bhar ki aasani

Arvind Pathik Beshaq mandi aayegi par mahgayi ghategi to kray shakti bhi badhegi.

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