भास्कर में बड़े पैमाने पर छंटनी होगी, अंग्रेजी अखबार बंद, इंदौर से विकास राठौर गए

खबर है कि दैनिक भास्कर प्रबंधन अपने यहां बड़े पैमाने पर छंटनी की तैयारी कर चुका है. इसी के तहत अलग-अलग आरोप लगाकर लोगों को निकाला जा रहा है. दैनिक भास्कर इंदौर से खबर है कि यहां से विकास राठौर को हटा दिया गया है जो रिपोर्टिंग में कार्यरत थे.

बताया जाता है कि दैनिक भास्कर प्रबंधन ने भोपाल में लगातार मैराथन बैठक कर के अब तक के सबसे खतरनाक निर्णयों पर मोहर लगा दी है. इसी के तहत भोपाल से प्रकाशित भास्कर समूह के अंग्रेजी अखबार डीबी पोस्ट को बंद कर दिया गया. बताया जा रहा है कि भास्कर ग्रुप के कुल 30 प्रतिशत स्टाफ की छंटनी होनी है. चर्चा है कि सभी फोटोग्राफरों को 31 मार्च तक हटाने की तैयारी है. विज्ञापन विभाग से भी काफी लोग हटाए जाने वाले हैं.

कई सेंटरों को ब्यूरो बनाने की तैयारी है. दिल्ली एडिशन को रेवाड़ी ले जाया जाएगा और वहां से बस कुछ हजार कापियां छपा करेंगी. पेज मेकर्स भी हटाए जाएंगे और सभी सब एडिटर्स व रिपोर्टर्स को पेज बनाने होगा. बताया जाता है कि इन्हीं निर्णयों के आलोक में कार्रवाई शुरू की जा चुकी है. सूचना है कि अम्बाला, भटिंडा, अमृतसर, पटियाला आदि से मार्केटिंग हेड हटाए जा चुके हैं. स्टेट हेड की पोस्ट खत्म किए जाने की भी चर्चा है.

कुल मिलाकर दैनिक भास्कर ऐसा ग्रुप बन गया है, जिसमें बीस तीस साल नौकरी करने वाला भी इस बात से चिंतित रहता है कि कल नौकरी रहेगी या नहीं. यहां खुद को कोई सुरक्षित नहीं महसूस करता. वे ज्यादा चिंता में हैं जो पचास पचपन पार कर चुके हैं. ऐसे लोगों को नौकरी से निकाल दिया गया तो इन्हें फिर कौन देगा नौकरी। बताया जा रहा है कि नया साल शुरू होते ही सुधीर अग्रवाल ने सभी हेड को बुलाया और छंटनी के लिए निर्देश दे दिया है.

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Comments on “भास्कर में बड़े पैमाने पर छंटनी होगी, अंग्रेजी अखबार बंद, इंदौर से विकास राठौर गए

  • ek bhaskar karmi says:

    भास्कर ग्रुप अपने दिवंगत चेयरमैन रमेश चंद्र अग्रवाल का मौत के बाद महिमामंडन करने में लगा है। जब वो जीवित थे तो उनकी रंगरेलियां मीडिया जगत में चर्चा का केंद्र बनी हुई थी। सुनने में तो यहां तक आया था कि तीसरी बार एक महिला से अवैध संबंध सामने आने और उस महिला द्वारा हाइकोर्ट में जायदाद पर हक मांगने के बाद रमेश जी के बेटों ने उन्हें घर में नजरबंद कर दिया था। अब उन्हीं रमेश जी को निधन हो जाने के बाद एक सच्चे देशभक्त और महान हस्ती के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। भास्कर प्रबंधन ने सबसे पहले उनके नाम से एक ट्रस्ट बनाया और देशभर में बुजुर्गों एवं अन्य की सेवा का संकल्प लिया। करीब 100 करोड़ का फण्ड इसके लिए अलग से रखा और इस पैसे के एवज में कई कर्मचारियों की छंटनी कर दी गई। फिर देशभर के छोटे-बड़े संस्करणों में उनकी स्मृति में फ़ोटो प्रदर्शनी लगाई गई। इसमें उनकी जीवन यात्रा के साथ देश के बड़े राजनेताओं के साथ उनकी तस्वीरें दिखाई गई। फिर निधन के बाद उनके पहले जन्मदिन पर एक वीडियो बनाकर स्टाफ को दिखाया गया कि वो कितने महान इंसान थे। अब उनका और महिमामंडन करने के लिए एक बुकलेट छपवाई गई है। इसका नाम रखा है-हमारे प्रेरणा स्रोत। इस किताब को पूरे ग्रुप के एम्प्लाइज को बंटवाई गई है। इस संबंध में किसी को कोई सूचना या जानकारी भी नहीं दी गई कि आखिर इस बुकलेट को देने की वजह क्या है। गौर करने वाली बात ये भी है कि जहां भास्कर प्रबंधन रमेश जी से प्रेरणा लेने को कह रहा है, वहीं अब ग्रुप में फिर से कॉस्ट कटिंग करने में जुट गया है। बिना किसी कारण सीधे एमडी ऑफिस से निर्देश आ रहे हैं कि इतने स्टाफ हटाने हैं। इसी बीच 6 january को इंग्लिश अखबार DB post भी बंद कर दिया गया। अब इनसब से समझा जा सकता है कि रमेशजी को क्यों महानता का पुजारी बताने की कोशिश की जा रही है? यशवंत भाई, ये 100% सही है, लेकिन प्लीज मेरी पहचान किसी भी स्थिति में उजागर न करें। नहीं तो मेरे लिए मुसीबत खड़ी हो जाएगी।

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  • Won din dur nahi jab sirf dainik bhaskar ka sirf naam rhega won bhi culprit newspaper k naam se. Kyunki yahan bhut se culprit hai jo apni pockets garam kr the hai. Aisa ek example Chandigarh Dainik Bhaskar ka hai jahan Amit Mittal aur Ravinder Dua apni pockets garam kr the hai. Duplicate petrol bills, duplicate vendors bills aur bhi na jane bhut kuch bhaskar k nàam se bnva kr apni pockets garam kr the hai. Wahi Amit Mittal accounts ki hi ek employee Rajni Walia ko financially fayda krva rha hai. Yeh sab bhaskar ko loot the hai. Agar cost cutting krni hai to inko nikalo. Bechare garib employees ko nikal kar kyu bad-dua le the ho. Meri Sudhir Aggrawal ji se yahi request hai kripya iss taraf dhyan de aur inke upar strict action le.

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