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इफको की कहानी (4) : हरे-हरे नोटों की दम पर अवस्थी ने IFFCO को अपंग बना रखा है!

रविंद्र सिंह-

क्त कार्यों को कराने के लिए प्रोजेक्ट डेवलपमेंट इंडिया लि. (PDIL) को कंसल्टेंसी का कार्य देकर गुणवत्ता एवं डिजाइन से समझौता कर लिया जिससे धन उतना हीखर्च कर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया. इस तरह से इफको के चारों सयंत्र में हेराफेरी कर करोड़ों का घोटाला किया गया है.

आंवला, फूलपुर, कलोल, कांडला में सन् 2015-16 में क्षमता विस्तार के नाम पर 500 से 1000 करोड़ धन खर्च किया गया है. जबकि उक्त सयंत्रों की क्षमता पहले से बढ़ी हुई है. कांडला में NPK का उत्पादन किया जाता है बाकि सयंत्र में यूरिया उत्पादन हो रहा है. इस तरह उक्त सयंत्रों में क्षमता विस्तार रख-रखाव के बहाने 4 से 5 हजार करोड़ धन का गबन कर मनी लॉड्रिंग के जरिए विदेश में अपना साम्राज्य खड़ा कर लिया. जब सरकार का नियंत्रण था तो 1 करोड़ से उपर के परियोजना का CVC द्वारा निरतर निरीक्षण किया जाता था.

इस दौरान भ्रष्टाचार का नवाचार अपनाते हुए अवस्थी ने स्टोर में 90 से 100 करोड़ के स्पेयर पार्ट्स प्रत्येक सयंत्र में खरीद कर एडवांस रखे थे. उस समय स्पेयर पार्ट्स के बजाए आपूर्ति करने वाली कंपनी से बिल की खरीद की जाती थी. भुगतान करने बाद धन वापस ले लिया जाता था. नियंत्रण खत्म होते ही स्पेयर पार्ट्स की स्टोर में इनवेंटरी लगभग 40 करोड़ के करीब रह गई है. इसी तरह हर सयंत्र में उर्वरक भरकर बेचने के लिए बैग्स (बोरा) की खरीद में जबरदस्त भ्रष्टाचार है. सयंत्रों से अवस्थी फर्जी रूटीन बिल के माध्यम से करोड़ों का धन दोहन कर नौकरशाह, मीडिया और सत्ता के गलियारों में इसलिए लुटा रहे हैं ताकि कोई उनके खिलाफ आवाज ना उठाए.

अवस्थी के काले कारनामों की सूची तैयार कर इंफोर्समेंट डाइरेक्ट्रेट (ED) ने जांच करते हुए पासपोर्ट जब्त कर लिया था परंतु सत्ता का फायदा उठाते हुए अवस्थी ने उपरोक्त जांच को फाइलों में दफन करा दिया. ED ने सवाल उठाया था भारत में इफको के 5 सयंत्र हैं फिर यह 1 से 3 माह हर वर्ष अमेरिका एवं यूरोप देशों में क्यों बिताते हैं.

इस पर अवस्थी ने अपने विश्वासपात्र राकेश कपूर, मनीष गुप्ता को भी विदेश में गरीब किसानों का धन भारत से ले जाकर ठिकाने लगाने की जिम्मेदारी सौंप दी और सफाई देते हुए ED से कहा संयुक्त उपक्रम एवं इफको के विस्तार से संबन्धित कार्यों की देख-रेख के लिए विदेश जाते हैं. जांच का विषय यह भी है मल्टीस्टेट कोआपरेटिव सोसाइटी एक्ट के अंतर्गत दुष्प्रचार कर अवस्थी ने बायलॉज को जिस तरह बल पूर्वक अवैध व गैर कानूनी तरीके से संशोधित कर और बिना परीक्षण किए देश के सबसे महाभ्रष्ट IAS कृषि सचिव जेएनएल श्रीवास्तव ने पंजीकृत कर दिया. इसके बाद सभी को तयशुदा रकम देकर इफको को अपना जागीर बना लिया.

क्या इफको सरकार के नियंत्रण से बाहर होने के बाद ज्यादा तरक्की कर रही है? और यह जांच तब होती जब आंतरिक ऑडिट किसानों के हित में केंद्र सरकार के हस्तक्षेप से कैग द्वारा संपन्न की जाती.

चौंकाने वाली बात यह है कि भ्रष्टाचार एवं मनी लॉड्रिंग का गोरखधंधा इफको और कृभको में चरम पर है परंतु आशीष भूटानी केंद्रीय रजिस्ट्रार सहकारिता 5 अक्टूबर 2017 को दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश 16 अगस्त 2016 के क्रम में सर्कुलर जारी कर कह रहे हैं देश भर की मल्टीस्टेट कोआपरेटिव सोसाइटी भ्रष्टाचार उन्मूलन अधिनियम के अंतर्गत CVC के निगरानी में आते हैं. CVC इफको और कृभको के भ्रष्टाचार पर सफेद हाथी साबित हो रही है. इससे यही लगता है या तो सरकार ने अवस्थी पर हाथ न डालने की नसीहत दे रखी है या फिर अवस्थी ने कागज के हरे-हरे नोटों के बल पर इस संवैधानिक संस्था को भी अपंग बना रखा है.

किसान इंटरनेशनल ट्रेडिंग (KIT) इफको की एक संपूर्ण स्वामित्व वाली सहायक संस्था है. KIT ने 31 मार्च, 2017 को कार्यपालन का अपना 12वां वित्त वर्ष पूरा कर लिया है. KIT की स्तापना इफको की एक अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक संस्था के रूप में की गई थी जिसका उद्देश्य इफको के विश्व भर में फैले ग्राहकों, उत्पादकों तथा वितरकों की मांग को पूरा करने के लिए विभिन्न तैयार उर्वरकों, उर्वरक के कच्चे माल तथा मध्यवर्ती उत्पादकों के लिए आयात, निर्यात तथा लॉजिस्टिक्स सपोर्ट के कार्य को देखना है.

उक्त संस्था की स्थापना अवस्थी ने दुबई में सब्सिडी एवं कच्चे माल के खरीद में वित्तीय भ्रष्टाचार करने के लिए की है जिसका मुद्दा उठाते हुए सांसद श्रीमती दर्सन विक्रम जर्दोश ने संसद में सरकार से कार्रवाई की मांग की है. इसी परिपेक्ष्य में संसद सदस्य निशिकांत दुबे एवं बी. अरूण कुमार ने 20 जून 2010 को प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत कर अवस्थी के भ्रष्टाचार पर कार्रवाई की मांग की थी.

प्रधानमंत्री कार्यालय ने उक्त शिकायत 6 जुलाई 2011 को पंजीकृत कर ली जो आज भी जीवित है. अब सवाल यह है 4 वर्ष संप्रग सरकार एवं 4 वर्ष भ्रष्टाचार मुक्त भारत का नारा देने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अगुवाई में सत्ता में बैठी सरकार उक्त भ्रष्टाचारी पर किस दबाव के चलते कार्रवाई नहीं कर सकी है? भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है कि जिस अवस्थी के खिलाफ 3 शिकायतों पर CBI द्वारा जांच प्रचलित हो और उसे सरकार पद से हटाकर रिसीवर बैठाने में विफल हो जाए?

क्या ये संभव है कि अवस्थी के पद पर रहते हुए CBI पारदर्शी ढ़ंग से जांच पूरी कर आरोप पत्र तैयार करने में सफल हो सकती है? अध्ययन से साफ हो रहा है जिस तरह से सरकार ने 125 करोड़ जनता के देश को 4 वर्ष में जमीन पर प्रगति कम जुमले ज्यादा दिए हैं, क्या यह CBI जांच के नाम पर देश के गरीब तंगहाल 5.5 करोड़ किसानों के हाथ में झुनझुना तो नहीं है. अवस्थी ने जिस तरह से 25 वर्ष में किसानों के आंखों में धूल झोंकी है और मीडिया, नौकरशाह व सत्ता के गलियारों में खेतों में भूखे पेट खून पसीना बहाने वाले मेहनत कश के अंश से झोली भरी है.

इससे बड़ा धोखा, देशद्रोह और पाप इस धरती पर अब तक किसी ने नहीं किया होगा. अब भी सरकार हाथ पर हाथ धरे मुंह पर टेप लगाए और आंखों पर कम नंबर का चश्मा पहने अवस्थी का भ्रष्टाचार आकलन करती है तो उसके लिए भ्रष्टाचार एवं किसानों की आय दोगुना करने की बाते करने का कोई अधिकार नहीं है?

अवस्थी द्वारा इफको के सुशासन पर लिखी गई लच्छेदार इन बातों को ही सरकार ईमानदारी से पढ़ ले तो भी सच सामने आ जाएगा. लेखक ने इफको की 49वीं वार्षिक रिपोर्ट 2016-17 से सुशासन की बातें लेकर देश को जागरूक करने के लिए प्रस्तुत की है जो इस प्रकार है

इफको, सर्वश्रेष्ठ कॉरपोरेट गवर्नेंस के मानदंडों संबंधी सिद्धान्तों के संवर्धन और उन्हें मजबूती प्रदान करने के लिए सदैव प्रतिबद्ध रही है. इसके लिए समिति ने कॉरपोरेट गवर्नेंस संबंधी पारदर्शिता, सुरक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, विश्वास और निष्ठा, कार्य निष्पादन मूलकता, जवाबदेही तथा दायित्व, सामाजिक दायित्व, नैतिक कारोबारी पद्धतियों तथा संगठन के लिए प्रतिबद्धता जैसे उच्च मानदंडों को अपनाया है.

स्टैक होल्डरों की सतत् समृद्धि के लिए आत्म अनुशासी दर्शन इफको का मूल मंत्र है. उत्कृष्टता विकास और मूल्य सृजन के क्षेत्र में कॉरपोरेट गवर्नेंस इफको की कार्य प्रणाली का एक अभिन्न अंग बन गया है. इफको की गवर्नेंस संरचना बहुराज्य सहकारी सोसाइटीज अधिनियम, 2002 (अधिनियम) के प्रावधानों के अनुसार तैयार की गई है. इफको को कॉरपोरेट निकाय के रूप में नामित किया गया है तथा आंतरिक प्रबंधन के लिए अधिनियम के अनुसार इसके उपनियम बनाए गये हैं.

कॉरपोरेट गवर्नेंस के मुख्य घटकों के लिए समिति ने पर्याप्त समीक्षा प्रक्रियाएं लागू की हैं. इसके अलावा, समिति अपनी आंतरिक नीतियों और प्रणालियों को ऐसा रूप देने के लिए निरन्तर प्रयासरत रहती है जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उर्वरक उद्योग में अपनाई जा रही सर्वश्रेष्ठ पद्धतियों से मैच कर सकें.

बरेली के पत्रकार रविंद्र सिंह द्वारा लिखित किताब ‘इफ़को किसकी?’ का चौथा पार्ट.

तीसरा पार्ट.. इफको की कहानी (3) : अवस्थी की तिकड़मों से IFFCO में बर्बादी की शुरूआत!

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