सुना है आज कल वह बड़ा पत्रकार हो गया…

एक रचना अपनी जमात के लिए

खबरों पर विज्ञापन जो इतना सवार हो गया।
उगाही का ही अड्डा हर अखबार हो गया ।।

संपादकों की शोखियां तो नाम की ही रह गईं।
मैनेजरों के कंधों पर सब दारोमदार हो गया।।

उन तेवरों का ताप तो वे विशेषांक ले उड़े।
खबरनबीस लूट का खुद हथियार हो गया।।

छापने न छापने का हर दाम फिक्स हो गया।
कलम के बूते यह कैसा कारोबार हो गया।।

है हुनर उसको आ गया ऐंठने का आम से।
सुना है आज कल वह बड़ा पत्रकार हो गया।।

जब सुर्खियां बने हुए हैं बस राग दरबार के।
अफसाना लिख रहा हूं सच लाचार हो गया।।

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वो भी कितना गजब का कलमकार है।
एक जेब में विपक्ष दूसरी में सरकार है।।

भूखे बच्चों की चित्कार कैसे सुनेगा वो।
जिसके लिए पैसा इकलौता सरोकार है।।

उसकी तहरीरों पर हसें कि रोयें बताओ।
कुछ भी लिख देना उसका कारोबार है।।

हुनर इश्तहार ऐंठने का खूब आतो उसे।
प्रबंधन बोले,उसके दम पर अखबार है।।

इस गठजोड में छुपा खूब जमा जोड़ है।
सियासी लूट में शामिल हुआ पत्रकार है।।  

रचनाकार विनोद भावुक ‘फोकस हिमाचल’ साप्ताहिक मैग्जीन के सम्पादक हैं. उनसे संपर्क vinod.bhavuk.mandi@gmail.com के जरिए किया जा सकता है.



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Comments on “सुना है आज कल वह बड़ा पत्रकार हो गया…

  • रविन्द्र कुमार अत्री (चम्बा) says:

    अखबारी दुनिया में आज की हकीकत को बयां करती रचना ।

    Reply

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