रिटायर IAS, IPS, IFS अफसरों ने किसान आंदोलन के समर्थन में जारी किया खुला पत्र

किसान आंदोलन के सम्बन्ध में खुला पत्र….

हमारा ग्रुप अखिल भारतीय और केन्द्रीय सेवाओं के भूतपूर्व सिविल सेवकों का समूह है। हमने केन्द्रीय और विभिन्न प्रदेश सरकारों में काम किया है। हमारा ग्रुप किसी राजनीतिक दल का समर्थन नहीं करता है एवं तटस्थता और निष्पक्षता में विश्वास रखता है। हम भारतीय संविधान के लिये प्रतिबद्ध हैं।

तीन नए कृषि अधिनियमों के निरस्तीकरण के लिये एक विशाल किसान आंदोलन, जिसे ट्रेड यूनियनों, छात्र संघों, विश्व विद्यालय अध्यापक संगठनों, अनेक राजनितिक दलों अन्य वर्गों का समर्थन प्राप्त है, कई महीनों से मुख्यतः पंजाब, हरयाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में चल रहा है। किसान संगठनों और भारत सरकार के बीच हुई वार्ताओं की विफलता के बाद आठ दिसम्बर को भारत-बन्ध का आयोजन भी हुआ। यहाँ हम इन अधिनियमों के गुण-दोषों की विवेचना करने के बजाय इस प्रसंग में हुए संविधान के प्रावधानों के उल्लंघन और जनतांत्रिक प्रक्रिया के विघटन पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं।

संविधान के संघीय ढांचे और राज्यों की विशिष्ट आवश्यकताओं की विविधता और बहुलता को देखते हुए “कृषि” को संविधान के सातवें परिशिष्ट की दूसरी सूची की प्रविष्टि संख्या 14 पर रखा गया है। इस सूची के सभी विषय केवल राज्यों के वैधानिक अधिकार क्षेत्र में आते हैं। अतः यह स्पष्ट है कि ये अधिनियम असंवैधानिक हैं। असंवैधानिक होने के अलावा वे संविधान के संघीय चरित्र का घात करते हैं। कुछ विधि-वेत्ताओं के मतानुसार तो वे “संविधान की मौलिक संरचना” का भी उल्लंघन करते हैं। प्रकटतः इन्हें पारित करने में वैधानिक चालबाज़ी दिखाई गयी है, जिसके कारण इन्हें अदालत में चुनौती दी गयी है।

सरकार ने वैधानिक प्रक्रिया के पूर्व किसानों के प्रतिनिधियों से कोई परामर्श नहीं किया। प्रथमतः इन् क़ानूनों को अध्यादेशों के माध्यम से उस समय लागू किया गया जब पूरा ध्यान एक गंभीर वैश्विक महामारी का सामना करने पर केंद्रित होना चाहिए था। सितम्बर 2020 में जब संसद में विधेयक लाये गए, तब उन्हें विचारार्थ संसदीय समिति को भेजने की मांग ठुकरा दी गई। यहाँ यह उल्लेख करना उपयुक्त होगा कि सितम्बर 2020 के एक समाचार के अनुसार विगत वर्षों में संसदीय प्रवर समितियों को संदर्भित विधेयकों का प्रतिशत, जो यू पी ए I की सरकार के समय (चौदहवीं लोक सभा) में 60 प्रतिशत था, यू पी ए II (पंद्रहवीं लोक सभा) में बढ़ कर 71 प्रतिशत हो गया, परन्तु यह अनुपात एन डी ए I (सोलहवीं लोक सभा) के कार्यकाल में गिर कर मात्र 25 प्रतिशत रह गया। वर्तमान लोक सभा में बहुत ही कम विधेयक संसदीय समितियों को भेजे गए हैं।

संसद में इन विधेयकों पर बहस के लिए समय न दे कर उन्हें हड़बड़ी में पारित कराया गया। राज्य सभा में विभाजन की मांग स्वीकार नहीं की गई और आपा-धापी के बीच ध्वनि-मत लिया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया संदेहास्पद हो गई। उसी समय विपक्ष के वाक-आउट के दौरान कुछ श्रम क़ानून भी पास किये गए। प्रश्न उठता है कि क्या ऐसा इस विश्वास से किया गया कि महामारी और जन-सभाओं पर प्रतिबन्ध के चलते इस कार्रवाई का विरोध नहीं हो सकेगा?

हम जनतांत्रिक प्रणाली की बुनियाद को कमज़ोर करने के प्रयास और नीति निर्धारण में जनता की भागीदारी और सुविधा की पूर्ण उपेक्षा की मिसालें पहले भी देख चुके हैं। हम जानते हैं कि कैसे अनुच्छेद 370 को रद्द किया गया, नोटबंदी लागू की गई, नागरिकता संशोधन अधिनियम लाया गया और बिना पूर्वसूचना के तालाबंदी घोषित कर लाखों प्रवासी मज़दूरों को एक अकथनीय त्रासदी झेलने के लिए मजबूर किया गया। ये सब फ़ैसले एक ही मनोवृत्ति के परिचायक हैं: प्रभावित होने वाले जन समुदायों से न तो पहले राय लेने की ज़रूरत है, और न ही बाद में संवाद की। सरकार की किसी भी कार्रवाई से असहमत हर किसी को “देशद्रोही”, “पाकिस्तान समर्थक”, “अवार्ड वापसी गैंग”, “अर्बन नक्सल” और “ख़ान मार्किट गैंग” क़रार करने का आसान विकल्प चुन कर मुद्दों पर बहस, जो जनतांत्रिक प्रणाली का प्राण है, से बचा जाता है, और असहमति का अपराधीकरण कर उसे लोकनिंदा का पात्र बनाया जाता है।

भीषण ठण्ड और कोविड 19 के संक्रमण के खतरों का सामना करते हुए लाखों किसानों के असंतोष की गंभीरता का अनुमान हम सहज ही लगा सकते हैं। उनका आंदोलन शांतिपूर्ण रहा है और वे विरोध करने के अपने संवैधानिक और जनतांत्रिक अधिकार मात्र का प्रयोग कर रहे हैं। इसके बावजूद दिल्ली के रास्ते में उनका स्वागत आंसू गैस और पानी की तोपों से किया गया और हरयाणा में राजमार्गों को खोद कर उनके समक्ष गत्यवरोध उपस्थित किया गया। इन विरोध प्रदर्शनों को राजनीतिक दलों या ख़ालिस्तानियों द्वारा अभिप्रेरित कैसे कहा जा सकता है, जबकि आंदोलनकारी किसान स्पष्टतः राजनीतिक दलों से किनारा किये हुए हैं, और कुछ समय पहले तक एन डी ए का घटक रहे शिरोमणि अकाली दल के एक वरिष्ठ नेता ने पद्म विभूषण का सम्मान वापस कर दिया है।

किसान आंदोलन का प्रसार अनेक राज्यों तक हो गया है और उसे तमाम और वर्गों का समर्थन मिल रहा है, हालाँकि बहुत हद तक सत्ता से मिली-भगत रखने वाला मीडिया इस विरोध के आयाम और विस्तार की सही सूचना देने से परहेज़ कर रहा है। संवैधानिक स्वतंत्रताओं के पक्षधर और भूतपूर्व सिविल सेवक की हैसियत से हम किसानों और उनके सहयोगियों द्वारा शांतिपूर्ण विरोध के लोकतान्त्रिक और संविधान-प्रदत्त अधिकार का इस्तेमाल करने का सशक्त समर्थन करना चाहेंगे। अब समय आ गया है कि सत्ताधारी वर्ग उठाई जा रही मांगों को ध्यान से सुने और संसद के भीतर और बाहर संवाद के माध्यम से लोकतान्त्रिक परम्पराओं, प्रक्रियाओं और पद्धतियों के प्रति अपनी निष्ठा प्रदर्शित करे।

सत्यमेव जयते।

S.R. Adige
IAS (Retd.)
Former Vice Chairman, Central Administrative Tribunal

Salahuddin Ahmad
IAS (Retd.)
Former Chief Secretary, Govt. of Rajasthan

Shafi Alam
IPS (Retd.)
Former Director General, National Crime Records Bureau, GoI

K. Saleem Ali
IPS (Retd.)
Former Special Director, CBI, GoI

S.P. Ambrose
IAS (Retd.)
Former Additional Secretary, Ministry of Shipping & Transport, GoI

G. Balachandhran
IAS (Retd.)
Former Additional Chief Secretary, Govt. of West Bengal

Vappala Balachandran
IPS (Retd.)
Former Special Secretary, Cabinet Secretariat, GoI

Gopalan Balagopal
IAS (Retd.)
Former Special Secretary, Govt. of West Bengal

Chandrashekhar Balakrishnan
IAS (Retd.)
Former Secretary, Coal, GoI

T.K. Banerji
IAS (Retd.)
Former Member, Union Public Service Commission

Sharad Behar
IAS (Retd.)
Former Chief Secretary, Govt. of Madhya Pradesh

Aurobindo Behera
IAS (Retd.)
Former Member, Board of Revenue, Govt. of Odisha

Madhu Bhaduri
IFS (Retd.)
Former Ambassador to Portugal

Ravi Budhiraja
IAS (Retd.)
Former Chairman, Jawaharlal Nehru Port Trust, GoI

Sundar Burra
IAS (Retd.)
Former Secretary, Govt. of Maharashtra

Rachel Chatterjee
IAS (Retd.)
Former Special Chief Secretary, Agriculture, Govt. of Andhra Pradesh

Kalyani Chaudhuri
IAS (Retd.)
Former Additional Chief Secretary, Govt. of West Bengal

Vibha Puri Das
IAS (Retd.)
Former Secretary, Ministry of Tribal Affairs, GoI

P.R. Dasgupta
IAS (Retd.)
Former Chairman, Food Corporation of India, GoI

Pradeep K. Deb
IAS (Retd.)
Former Secretary, Deptt. Of Sports, GoI

Nitin Desai
IES (Retd.)
Former Secretary and Chief Economic Adviser, Ministry of Finance, GoI

Keshav Desiraju
IAS (Retd.)
Former Health Secretary, GoI

M.G. Devasahayam
IAS (Retd.)
Former Secretary, Govt. of Haryana

Arif Ghauri
IRS (Retd.)
Former Governance Adviser, DFID, Govt. of the United Kingdom (on deputation)

Suresh K. Goel
IFS (Retd.)
Former Director General, Indian Council of Cultural Relations, GoI

S.K. Guha
IAS (Retd.)
Former Joint Secretary, Department of Women & Child Development, GoI

H.S. Gujral
IFoS (Retd.)
Former Principal Chief Conservator of Forests, Govt. of Punjab

Meena Gupta
IAS (Retd.)
Former Secretary, Ministry of Environment & Forests, GoI

Wajahat Habibullah
IAS (Retd.)
Former Secretary, GoI and Chief Information Commissioner

Rahul Khullar
IAS (Retd.)
Former Chairman, Telecom Regulatory Authority of India

Brijesh Kumar
IAS (Retd.)
Former Secretary, Department of Information Technology, GoI

Sudhir Kumar
IAS (Retd.)
Former Member, Central Administrative Tribunal

P.K. Lahiri
IAS (Retd.)
Former ED, Asian Development Bank & Former Revenue Secretary, GoI

Subodh Lal
IPoS (Resigned)
Former Deputy Director General, Ministry of Communications, GoI

P.M.S. Malik
IFS (Retd.)
Former Ambassador to Myanmar & Special Secretary, MEA, GoI

Harsh Mander
IAS (Retd.)
Govt. of Madhya Pradesh

Amitabh Mathur
IPS (Retd.)
Former Director, Aviation Research Centre and Former Special Secretary, Cabinet Secretariat, GoI

Lalit Mathur
IAS (Retd.)
Former Director General, National Institute of Rural Development, GoI

Aditi Mehta
IAS (Retd.)
Former Additional Chief Secretary, Govt. of Rajasthan

Sonalini Mirchandani
IFS (Resigned)
GoI

Sunil Mitra
IAS (Retd.)
Former Secretary, Ministry of Finance, GoI

Avinash Mohananey
IPS (Retd.)
Former Director General of Police, Govt. of Sikkim

Deb Mukharji
IFS (Retd.)
Former High Commissioner to Bangladesh and former Ambassador to Nepal

Nagalsamy
IA&AS (Retd.)
Former Principal Accountant General, Tamil Nadu & Kerala

P.G.J. Nampoothiri
IPS (Retd.)
Former Director General of Police, Govt. of Gujarat

Surendra Nath
IAS (Retd.)
Former Member, Finance Commission, Govt. of Madhya Pradesh

P. Joy Oommen
IAS (Retd.)
Former Chief Secretary, Govt. of Chhattisgarh

Amitabha Pande
IAS (Retd.)
Former Secretary, Inter-State Council, GoI

Mira Pande
IAS (Retd.)
Former State Election Commissioner, West Bengal

R. Poornalingam
IAS (Retd.)
Former Secretary, Ministry of Textiles, GoI

R.M. Premkumar
IAS (Retd.)
Former Chief Secretary, Govt. of Maharashtra

T.R. Raghunandan
IAS (Retd.)
Former Joint Secretary, Ministry of Panchayati Raj, GoI

V.P. Raja
IAS (Retd.)
Former Chairman, Maharashtra Electricity Regulatory Commission

K. Sujatha Rao
IAS (Retd.)
Former Health Secretary, GoI

Satwant Reddy
IAS (Retd.)
Former Secretary, Chemicals and Petrochemicals, GoI

Vijaya Latha Reddy
IFS (Retd.)
Former Deputy National Security Adviser, GoI

Julio Ribeiro
IPS (Retd.)
Former Adviser to Governor of Punjab & former Ambassador to Romania

Aruna Roy
IAS (Resigned)

Manabendra N. Roy
IAS (Retd.)
Former Additional Chief Secretary, Govt. of West Bengal

A.K. Samanta
IPS (Retd.)
Former Director General of Police (Intelligence), Govt. of West Bengal

Deepak Sanan
IAS (Retd.)
Former Principal Adviser (AR) to Chief Minister, Govt. of Himachal Pradesh

G. Sankaran
IC&CES (Retd.)
Former President, Customs, Excise and Gold (Control) Appellate Tribunal

N.C. Saxena
IAS (Retd.)
Former Secretary, Planning Commission, GoI

A. Selvaraj
IRS (Retd.)
Former Chief Commissioner, Income Tax, Chennai, GoI

Abhijit Sengupta
IAS (Retd.)
Former Secretary, Ministry of Culture, GoI

Ashok Kumar Sharma
IFoS (Retd.)
Former MD, State Forest Development Corporation, Govt. of Gujarat

Ashok Kumar Sharma
IFS (Retd.)
Former Ambassador to Finland and Estonia

Navrekha Sharma
IFS (Retd.)
Former Ambassador to Indonesia

Raju Sharma
IAS (Retd.)
Former Member, Board of Revenue, Govt. of Uttar Pradesh

Sujatha Singh
IFS (Retd.)
Former Foreign Secretary, GoI

Tirlochan Singh
IAS (Retd.)
Former Secretary, National Commission for Minorities, GoI

Jawhar Sircar
IAS (Retd.)
Former Secretary, Ministry of Culture, GoI, & former CEO, Prasar Bharati

Thanksy Thekkekera
IAS (Retd.)
Former Additional Chief Secretary, Minorities Development, Govt. of Maharashtra

P.S.S. Thomas
IAS (Retd.)
Former Secretary General, National Human Rights Commission

Hindal Tyabji
IAS (Retd.)
Former Chief Secretary rank, Govt. of Jammu & Kashmir

Jawed Usmani
IAS (Retd.)
Former Chief Secretary, Govt. of Uttar Pradesh & Former Chief Information Commissioner, Uttar Pradesh

Ashok Vajpeyi
IAS (Retd.)
Former Chairman, Lalit Kala Akademi

Ramani Venkatesan
IAS (Retd.)
Former Director General, YASHADA, Govt. of Maharashtra

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