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खेती-बाड़ी के लिए खाद का काम करेगा किसान टीवी : नरेश सिरोही

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसान टीवी लांच किया है। अन्य तमाम चैनल सेवाओं के बीच इसकी क्या जरूत थी, इससे किसानों का कितना भला होगा आदि प्रश्नों पर पत्रकार रमेश ठाकुर ने किसान टीवी के एडवाइजर नरेश सिरोही से बातचीत की-

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसान टीवी लांच किया है। अन्य तमाम चैनल सेवाओं के बीच इसकी क्या जरूत थी, इससे किसानों का कितना भला होगा आदि प्रश्नों पर पत्रकार रमेश ठाकुर ने किसान टीवी के एडवाइजर नरेश सिरोही से बातचीत की-

रमेश ठाकुर : कृषि का इस समय बुरा हाल है। इस लिहाज से कृषि व किसानों की बेहतरी में किसान टीवीष किस तरह की भूमिका अदा करेगा?

नरेश सिरोही : कृषि की दुर्दशा का मुख्य कारण है किसानों के पास उत्तम खेती करने संबंधित जानकारियों का अभाव का होना। कृषि अब पूरी तरह से तकनीक पर निर्भर है। देशी फार्मूले अपनाने से खेती को नुकसान हो रहा है। किसान टीवी के जरिए किसानों को खेती से संबंधित हर तरह की जानकारियां मुहैया कराई जाएंगी। किस मौसम में कौन सी खेती करनी हैए कितनी खाद् देनी हैंए बीज का चुनाव कैसे करना है आदि सीजनल व विदेशी फसलों की जानकरी किसान टीवी के माध्यम से किसानों को दी जाएगी। कृषि एवं संबंधित क्षेत्र को समर्पित यह चैनल किसानों को नई खेती की तकनीकए जल संरक्षणए जैविक खेती तथा अन्य सम.सामयिक सूचनाएं एवं जानकारियां उपलब्ध कराएगा।

रमेश ठाकुर : कृषकों के लिए किस तरह के कार्यक्रम आयोजित होंगे?

नरेश सिरोही : जानकारी के अभाव के चलते कृषि की कई नस्लें विलुप्त हो चुकी हैं। उनको जिंदा करने के लिए वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों का पैनल किसानों को हर समय राय देगा। देश में कुल 132 तरह के क्लामेट जोन हैं जिनके हिसाब से डेरी उद्योग आदि को भी विकसित किया जाएगा। चैनल कृषि के प्रति प्रारंभिक ज्ञान को बढ़ाने व खेती की नई विधियों को लागू करने जैसे कार्यक्रमों का प्रसारण करेगा। देश का एक वर्ग आज भी पूरी तरह से खेती की आमदनी पर ही निर्भर है। उस वर्ग को हमें विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। 

रमेश ठाकुर : प्रसार भारती डीडी वन पर सालों से कृषि दर्शन कार्यक्रम प्रसारित करता आ रहा है। उसका असर कृषि पर अभी तक खास नहीं दिखाई पड़ा तो किसान टीवी से कैसे उम्मीद की जाए?

नरेश सिरोही : ऐसा कहना गलत होगा कि इस कार्यक्रम से किसानों को फायदा नहीं हुआ है। बहुत कुछ सीखा है किसानों ने इस कार्यक्रम से। किसान टीवी को कृषि से संबंधित आधुनिक तकनीक से जोड़ा जा रहा है। किसानों को हर तरह की फसलों को उगाने संबंधी जानकारी देने के लिए कृषि वैज्ञानिकों के पैनल का गठन किया है। 24 घंटे के इस चैनल पर कई तरह के कार्यक्रम आयोजित होंगे। विदेशों में कम खेती से भी कैसे अधिक अन्न उगाया जाता है इस विषय पर ज्यादा फोकस रहेगा। 

रमेश ठाकुर : चैनल की लाचिंग काफी पहले की जानी थी तो देरी कैसे हुई?

नरेश सिरोही : हिन्दी पंचांग के नववर्ष बैसाखी के अवसर पर किसान टीवी की साफ्ट लांचिंग 23 मार्च तथा फर्म लांचिंग 13.14 अप्रैल को होनी थी पर उस वक्त पंजाब सहित देश के कई हिस्सों में फसल की कटाई एवं अन्न संग्रह का समय होता है। इसलिए चैनल की लांचिंग को आगे बढ़ाया गया था। साथ ही चैनल से संबंधित कुछ तकनीकी काम को भी दुरूस्त किया जाना था।

रमेश ठाकुर : चैनल की सफलता के लिए अलग से बजट का प्रावधान किया गया है?

नरेश सिरोही : सरकार ने पिछले साल के जुलाई बजट में दूरदर्शन पर किसान चैनल को प्रस्तावित किया गथा एवं इसके लिए 100 करोड़ रूपये निर्धारित किए हैं। इस साल के बजट में वित्त एवं सूचना तथा प्रसारण मंत्री अरुण जेटली ने प्रसार भारती को 45 करोड़ रुपये का अनुदान उपलब्ध कराया है। चौबीस घंटे संचालित किए जाने वाले चैनलों में से एक किसान टीवी की रूपरेखा के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को कई सुझाव दिए गये जिनमें से किसानों के लिए क्विज शोज, देश के विभिन्न हिस्सों में खेती की सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं से साक्षात कराना, कृषि विशेषज्ञों सहित जमीनी एवं उच्च स्तर पर प्रयास कार्यक्रम बनाने के लिए सुझावों का आमंत्रण तथा कृषि वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों के साथ प्रतिक्रिया भी शामिल हैं। 

रमेश ठाकुर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस चैनल का श्रीगणेश  पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्मस्थली मथुरा से क्यों करना चाहते थे? 

नरेश सिरोही : केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने मथुरा गई टीम के आकलन के बाद यह फैसला किया था कि सरकार की सालगिरह के अवसर पर दीनदयाल उपाध्याय की जन्मस्थली दीनदयाल धाम में 25 मई को आयोजित पीएम मोदी की रैली में किसान चैनल को लांच करने का विचार था। मगर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव पुनीत कंसल के नेतृत्व में वहां गई तीन सदस्यीय टीम ने पाया कि दीनदयाल धाम में चैनल लांच करने के कार्यक्रम का सारा खर्च सरकार के सिर आ जाएगा। इसलिए समिति ने 26 मई को दिल्ली में पीएम के हाथों ही चैनल लांच कराने का निर्णय लिया। हां यह सच है कि पीएम मोदी भाजपा के विचार पुरुष माने जाने वाले पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्मस्थली से किसान चैनल लांच करना चाहते थे। 

रमेश ठाकुर : चैनल का प्रसारण अभी हिंदी में ही रहेगा या दूसरी भाषाओं में भी होगा? 

नरेश सिरोही : फिलहाल चैनल का प्रसारण हिंदी में ही शुरू किया जा रहा है। लेकिन भविष्य में चैनल के दूसरे टर्म के चरण में क्षेत्रीय भाषाओं में भी विस्तार करने की योजनाएं हैं। कन्नड़, पंजाबी, मराणी व अंग्रेजी में भी प्रसारण शुरू होगा।

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