भारत सरकार ने कोर्ट में कहा- अगर अफसरों को मौलिक अधिकार चाहिए तो पहले इस्तीफा दें

इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखनऊ बेंच में आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर द्वारा आईएएस, आईपीएस अफसरों द्वारा सरकारी कार्य और नीतियों की आलोचना पर लगे प्रतिबन्ध को ख़त्म करने हेतु दायर याचिका में भारत सरकार ने कहा है कि यह रोक लोक शांति बनाए रखने के लिए लगाई गयी है. राजीव जैन, उपसचिव, डीओपीटी द्वारा दायर हलफनामे के अनुसार प्रत्येक सेवा संविदा में कुछ मौलिक अधिकारों का हनन होता है.

इसके अनुसार यदि सरकारी सेवकों को सरकार की किसी हालिया नीति अथवा कार्य की आलोचना का अधिकार दे दिया गया तो इससे अनुशासन नहीं बचेगा, जो कार्यक्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगी जिससे प्रशासन में अराजकता आएगी और यह लोक शांति को प्रभावित कर सकता है.

हलफनामे के अनुसार हर व्यक्ति अपनी मर्जी से सेवा में आता है और उसे अधिकार है कि सेवा से अलग हो कर अपने मौलिक अधिकारों का उपयोग करें, फ्री-लांसर सरकारी सेवा में न आयें. याचिका में कहा गया था कि अखिल भारतीय सेवा आचरण नियमावली के नियम 7 में किसी भी प्रकार के मंतव्य पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाया गया है जो संविधान के अनुच्छेद 19(2) में दिए किसी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का हनन है.

Govt in HC: Bureaucrats resign to exercise Fundamental Rights

In a petition filed by IPS Officer Amitabh Thakur in Lucknow Bench of Allahabad High Court challenging the prohibition of All India Services officers to criticize government policy, the Central government has said that such restriction is placed in interest of public order.

The counter reply filed through Rajiv Jain, Under Secretary, DOPT says that every contract of service involves invasion of Fundamental Rights. It says if government servants are permitted to make adverse criticism of any recent government policy or action, there will be no discipline, leading to lack of efficiency in work, chaos in administration and ugly situations which in final analysis may lead to public disorder.

The counter reply also says that every person voluntarily joins these services and it is open for them to exercise their fundamental rights by resigning from the service. Free lancers need not enter government service.

The petition had said that rule 7 of the All India Services Conduct Rules 1968 with blanket prohibition on any adverse criticism of any current government act or policy is against the right to freedom of expression under Article 19(2).

भारत सरकार द्वारा दाखिल किए गए जवाब को देखने के लिए नीचे क्लिक करें>

Counter reply by Govt of India

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