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सियासत

हैरानी तब होती है जब मायावती बेशर्मी के साथ कहती हैं कि….

Sumant Bhattacharya : अरबों रुपए देने वाले ये कौन हैं मायावती के शोषित और गरीब… जब मायावती कहती हैं कि राज्यसभा पहुंचाने के एवज में अखिलेश दास ने मुझे 100 करोड़ का प्रस्ताव दिया तो मुझे कोई हैरानी नहीं हुई। हैरानी तब होती है जब मायावती बेशर्मी के साथ कहती हैं कि… “देश के गरीब शोषित के छोटे-छोटे अनुदान से पार्टी चलती है।” तो देश के “वास्तविक गरीब-शोषित लोग” मेरी आंखों के सामने घूमने लगते हैं।

Sumant Bhattacharya : अरबों रुपए देने वाले ये कौन हैं मायावती के शोषित और गरीब… जब मायावती कहती हैं कि राज्यसभा पहुंचाने के एवज में अखिलेश दास ने मुझे 100 करोड़ का प्रस्ताव दिया तो मुझे कोई हैरानी नहीं हुई। हैरानी तब होती है जब मायावती बेशर्मी के साथ कहती हैं कि… “देश के गरीब शोषित के छोटे-छोटे अनुदान से पार्टी चलती है।” तो देश के “वास्तविक गरीब-शोषित लोग” मेरी आंखों के सामने घूमने लगते हैं।

“कबीर पंथ” से गहन संबंधों की वजह से देश में हुए कबीर पंथियों के तमाम कार्यक्रम में मैं गया। दरभंगा, नेपाल के सिरहा, मधुबनी, छत्तीसगढ़ और हरियाणा समेत कई राज्यों में। कबीर साहेब के लाख से दो लाख तक अनुयायी इन सम्मेलन में जुटते हैं और मैं देखता हूं कि कैसे मायूस चेहरा लिए पुरुष, महिलाएं और बच्चे रुपए, दो रुपए के सिक्के या अधिकतम दस रुपए अपने आचार्यों के सामने रख कर प्रणाम करते हैं। और अधिकतर तो कुछ भी दे सकने की स्थिति में नहीं होते।

किसी भी कार्यक्रम में जुटने वाला धन लाख सवा लाख से ज्यादा नहीं हो पाता। और एक कार्यक्रम में ही पांच से छह लाख खर्च हो जाते हैं। यानि साल भर आचार्यों को मिलने वाले दान से सिर्फ एक कार्यक्रम संभव हो पाता है। समझ में नहीं आता, मायावती के शब्दकोश में गरीब और शोषित जनता से आशय किनसे हैं? कौन हैं ये गरीब और शोषित, जिनसे बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमों ने दिल्ली के “कौटिल्य मार्ग” पर आलीशान खोठी खड़ी कर ली? जिसमें पत्थर के हाथी टहल रहे हैं।

नसीमुद्दीन और सुधाकर सिंह जैसे लोग अरबपति हो गए। लिस्ट तो बहुत ही लंबी हैं। मेरे यूपी के पत्रकार और भी नाम जोड़ने में सक्षम हैं। मुद्दा तो यह है कि मायावती के गरीब और शोषितों से मैं मिलना चाहूंगा। अब कोई विद्दान यह दावा करने की हिमाकत ना करे कि कबीर साहेब के अनुयायियों से भी गरीब और शोषित तबका कोई और भी है।

वरिष्ठ पत्रकार सुमंत भट्टाचार्य के फेसबुक वॉल से.

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