राजदीप सरदेसाई को अपमानित कर मुकेश अंबानी ने पूरे चौथे खंभे की औकात बता दी (देखें वीडियो)

Yashwant Singh : देश के सबसे धनी आदमी मुकेश अंबानी का देश के सबसे वरिष्ठ पत्रकारों में से एक राजदीप सरदेसाई ने इंटरव्यू किया. राजदीप बातचीत की शुरुआत मुकेश को देश के सबसे प्रभावशाली / ताकतवर शख्स के रूप में बताते हुए करते हैं और इस पर प्रतिक्रिया मांगते हैं तो इसका जवाब मुकेश अंबानी बहुत घटिया और अहंकारी तरीके से देता है. मुकेश अंबानी का जवाब और उसका अहंकार देख सुन कर एक समझदार आदमी सिर्फ स्तब्ध ही हो सकता है.

इन बनियों की नजर में पत्रकार और मीडिया की औकात कुछ नहीं होती है, क्योंकि ये पूंजी के बल पर मीडिया मालिकों को ही खरीद लेते हैं या फिर पूरे मीडिया हाउस का अधिग्रहण कर लेते हैं. ऐसे में जाहिर है ये किसी की परवाह क्यों करें, खासकर पत्रकार की. लेकिन ये इतने भद्दे, घृणित, जाहिल, असंस्कारी और उद्दंड हो सकते हैं, इसका अंदाजा कतई नहीं था. इस वीडियो में इंटरव्यू का वो वाला हिस्सा भी है जिसमें राजदीप सरदेसाई को मुकेश अंबानी नीचा दिखाने के लिए ‘मैं आपको सीरियसली नहीं लेता हूं’ टाइप की बात कहता है. वीडियो के शुरू और लास्ट में मेरा थोड़ा-सा भाषण है, क्योंकि वीडियो देखकर मन में भड़ास इकट्ठी हो गई तो सोचा एक नया वीडियो बनाकर इसे निकाल ही दूं.

ध्यान रखें, जो जब बुरा करे, उसे खूब गरियाइए, दौड़ा दौड़ा कर गरियाइए, लेकिन इस वीडियो में तो सिर्फ और सिर्फ मुकेश अंबानी की नीचता व अहंकार दिख रहा है. हां, राजदीप जरूर अपनी शालीनता और पेशे की गरिमा बनाए रखते हैं और बिलकुल रिएक्ट नहीं करते हैं. सच में राजदीप सरदेसाई को सैल्यूट करने का मन करता है. मुकेश अंबानी ने अपनी नीचता इस इंटरव्यू के जरिए दिखा दी है.

वीडियो देखने के लिए लिंक नीचे क्लिक करें :

https://www.youtube.com/watch?v=FArsyPA4fHs

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के उपरोक्त एफबी स्टेटस पर आए कुछ प्रमुख कमेंट्स इस प्रकार हैं…

उरूज बानो Is vedio me volume bahut kam h sir..dono ki batcheet samjh nhi aa rahi

Dushayant Shaarma यशवन्त जी, जो जिस लायक होगा उसी हिसाब से डील होगी. सीधी सी बात है मुकेश अंबानी खरीददार है और राजदीप बिकायु है, अब आप इन दोनों से और क्या उम्मीद कर सकते हैं. इस लिए आप जैसे हैं वैसे ही मस्त रहिये

Yashwant Singh मुकेश अंबानी ने तो मोदी जी को भी खरीद लिया है, जियो का विज्ञापन करते हैं, मतलब मोदी जी भी बिकाऊ हैं?

Yashwant Singh आपको पता होना चाहिए कि आईबीएन7 और सीएनएन आईबीएन जब बिक गया था तो राजदीप वगैरह ही थे जो अंबानी के दबाव को खारिज करके खबरें दिखाते थे जिसके कारण उन्हें चैनल से निकाल दिया गया. किसी को यूं ही बिकाऊ नहीं कहना चाहिए वरना भक्तों दासों की कैटगरी में आएंगे. अंबानी देश के बड़े उद्योगपति हैं, उन्हें देश के एक बड़े पत्रकार का सम्मान करना चाहिए था, भारतीय संस्कार यह सिखाता है. वैसे भी जो पेड़ जितना फलदार होता है, उतना झुकता भी है.

Dushayant Shaarma थोड़ा असहमत हूँ भाई, सिर्फ मोदी का विरोध करने से कोई न्यूट्रल पत्रकार कैसे हो सकता है. पत्रकार वो है जो अच्छी बातों की तारीफ करे और गलत बात का विरोध करे. लेकिन राजदीप उन पत्रकारों की श्रेणी में है जो सिर्फ मोदी विरोध को असली पत्रकारिता समझते हैं. माफ़ कीजियेगा मैं आपसे इस मामले में असहमत हूँ

Manmohan Bhalla जब चैनल न्यूज़ की जगह व्यूज़ दिखाने लगें तो वास्तविकता की सार्थकता लुप्त होने लगती है ।।।।।  लेकिन दुर्भाग्य से यही सब आज की पत्रकारिता का स्वरूप बन चुका है

सुबोध खंडेलवाल पूरे इंटरव्यू में मुझे कही भी मुकेश अंबानी अहंकारी नजर नहीं आए उलटा राजदीप अति उत्साही दिखते रहे। यदि कोई किसी पत्रकार को सीरियसली नहीं लेता तो इसमें मीडिया के अपमान की बात कहाँ से आ गई? आपने एक सवाल किया सामने वाले ने इसका जवाब दिया। अब उसका जवाब कैसा हो क्या ये भी सवाल पूछने वाला तय करेगा यशवंत भाई? और वैसे भी राजदीप का सिर्फ ब्रांड बड़ा है उनका वैचारिक स्तर देखना हो तो राज ठाकरे के इंटरव्यू देख लीजिए। दो साल पहले पूछे गए सवाल दो साल बाद दोहरा रहे थे। दोनों इंटरव्यू में राज ठाकरे गरियाते रहे और राजदीप मिमियाते रहे

Yashwant Singh हम मीडिया के आदमी हैं और मुकेश अंबानी जैसा अगर हमारे किसी साथी का अपमान करेगा तो उसकी ऐसी की तैसी.

सुबोध खंडेलवाल गुरु महाराज आप जिस पत्रकार के अपमान की बात कर रहे हो पहले उससे तो पूछ लो उसे अपमान लगा या सम्मान लगा? और अपमान लगा तो खुद अपनी बौद्धिकता से उस पूंजीपति को वही जवाब क्यों नहीं दिया ?

Yashwant Singh सुबोध खंडेलवाल ha ha ha, बात तो सही कही आपने

अविनाश विद्रोही यशवंत भाई एक बात बताओ अम्बानी क्यों न बतमीजी करे देश का सबसे शक्तिशाली यानी प्रधान मंत्री तक उस से पूछ कर फैंसला लेता है लगभग 18 चैनल के करीब उसके अपने है और बाकियों पर उसके विज्ञापन ,किस की इतनी ओकात है आज के समय में जो मुकेश अंबानी के खिलाफ एक भी खबर चलाए या उसके विरुद्ध आवाज़ बुलंद करे ,अहंकार आना स्वाभविक है ।

Prafulla Nayak इसके लिए ऑफर किसका था।
अम्बानी का या पत्रकार का।
इस पर ही पूरा किस्सा निर्भर है
कि इंटरव्यू देने अम्बानी गये थे या इसके लिए पत्रकार साहब कई महीनों से प्रयासरत थे।
वैसे यह भी याद होगा पीएम् मोदी की पहली यूएस यात्रा के दौरान इनके क्या सवाल थे और जनता का क्या मूड था।
वो वीडियो भी यू ट्यूब पर है।

Yashwant Singh हम मीडिया के आदमी हैं और मुकेश अंबानी जैसा अगर हमारे किसी साथी का अपमान करेगा तो उसकी ऐसी की तैसी.

Prafulla Nayak पर जवाब अधूरा है बॉस

Yashwant Singh स्टैंड लेना सीखिए. वीडियो देखिए. मुकेश अंबानी की हरकत निंदनीय है. बाकी अपने घर का झगड़ा हम लोग लड़ते सुलझाते रहेंगे. अंबानी की साकानाकामाका.

Prafulla Nayak गये यह थे
या या यह इन्हें बुलाया गया था?
स्टैंड अपनी जगह है।
साइड में।

Yashwant Singh गांड़ मराने गए थे. बस. अगर वीडियो देख के समझ नहीं आ रहा कि एक पत्रकार इंटरव्यू ले रहा तो आपसे बतियाना बेकार. बाई द वे, आप पत्रकार हो या नहीं? अगर नहीं हो तो आपको नहीं समझ आएगा.

Prafulla Nayak कौन गया था
अपनी लाल कराने बॉस।
नाराज़ मत होइए।

Yashwant Singh अप्रासंगिक सवाल. पत्रकार एसाइनमेंट पर ही जाता है. आपको अगर बेसिक समझ नहीं है तो क्या बात की जाए.

Prafulla Nayak साहब, हम अनपढ़
आप ज्ञानी
लेकिन बेसिक आप बता नहीं रहे हैं।
One वे।
यातायात।

Ankit Mathur भाई साहब नब्बे प्रतिशत मीडिया हाउस के मालिकाना हक प्राप्त करने के पष्चात अगर एक अदना से पत्रकार को दिये गये साक्षातकार में अहंकार झलका देता है अम्बानी तो क्या गलत करता है! आखिर मालिक है!

Suneet Upadhyay फेसबुक पर अम्बानी की ऐसी तैसी लिखने वालों को भी कौन सीरियस लेता है 🙂

Pawan Kumar Upreti इसमें अंबानी की क्या गलती है यशवंत भाई, जनता के बीच में चौड़ा होकर घूमने वाले पत्रकार नेताओं के तलवे चाटते फिरेंगे, दलाली करेंगे, सिर्फ अपना हित सोचेंगे, चाहे पत्रकारिता में बाकी मर रहे हों, ऐसे में वे अपने संपादक और मालिकानों की गालियां सुनने को अभिशप्त रहेंगे, जैसा लगभग सभी मीडिया संस्थानों में हो रहा है।

Yashwant Singh हम मीडिया के आदमी हैं और मुकेश अंबानी जैसा अगर हमारे किसी साथी का अपमान करेगा तो उसकी ऐसी की तैसी.

Awadhesh Mishra में आपकी बात से बिलकुल भी सहमत नहीं हूँ यशवंत भाई .. ये आपके बिचार हो सकते है .

सुबोध खंडेलवाल यशवंत भाई ये वो ही राजदीप है जिन्होंने यूपीए सरकार के समय आईबीएन चैनल में कैश फॉर वोट का स्टिंग आपरेशन करके ऐनवक्त पर स्टोरी ड्रॉप कर दी थी। क्यों की थी ये आप भी जानते हो, समझते हो। फिर भी याद दिलाता हूँ यूपीए सरकार ने लेफ्ट की समर्थन वापसी के बाद कुछ भाजपा सांसदों को पैसा देकर सदन से गैर हाजिर रहने का सौदा किया था। भाजपा सांसदों ने इस पूरी पेशकश और सौदेबाजी का स्टिंग ऑपरेशन राजदीप और आशुतोष से करवाया था। ये तय हुआ था कि सदन की कार्रवाई शुरु होने के पहले आईबीएन इसका प्रसारण करेगा लेकिन राजदीप की निष्ठा मीडिया के सिद्धांतों और लोकतंत्र के प्रति नहीं नोट की थैलियों की तरफ झुक गई। चैनल ने स्टिंग दिखाया ही नहीं। फिर सरकार को बेनकाब करने के लिए भाजपा सांसदों ने सदन में उनको दी गई नोटों की गड्डियां लहराई थी। इसके बाद भी आप चाहे तो राजदीप का प्रशंसा गान जारी रख सकते है। मुझे आपसे और आपको मुझसे असहमत होने का पूरा अधिकार है।

Yashwant Singh हम मीडिया के आदमी हैं और मुकेश अंबानी जैसा अगर हमारे किसी साथी का अपमान करेगा तो उसकी ऐसी की तैसी.

सुबोध खंडेलवाल Haahaahaa यदि मैं आपको कह दू कि मैं आपको सीरियसली नहीं लेता तो क्या इसका मतलब ये है कि मैंने आपका अपमान कर दिया ? मतलब ये जरूरी है कि हर आदमी राजदीप को सीरियसली ले ? या ये जरूरी है कि अंबानी उन्हें सीरियसली ले ? आपके लिए महत्वपूर्ण क्या है ? ये कि मुकेश अंबानी उन्हें सीरियसली ले या ये कि वो ईमानदारी से पत्रकारिता करे। राजदीप ने इंटरव्यू की शुरुआत ही तलवे चाटने से की । ये क्यों कहा कि मेरे साथ देश के सबसे पावरफुल व्यक्ति है ? ये कहकर राजदीप ने खुद को छोटा और मुकेश अंबानी को बड़ा दिखाने का अति उत्साह दिखाया । यदि राजदीप में सेन्स ऑफ़ ह्यूमर और प्रेजेंस ऑफ़ माइंड होता तो वो अंबानी को करारा जवाब दे सकते थे पर वो तो अंबानी के पास बैठकर गदगद हो रहे थे।ऐसा लग रहा था जैसे कोई बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है।

Mahesh Gupta यशवंत जी इसमें किसी की जाति से क्या लेना देना है जो आप जाति पर गालि दे रहे है

Yashwant Singh बनिया जाति को नहीं बल्कि बनियाटिक प्रवृत्ति यानि बनियावाद को गरियाया जा रहा है.

Mahesh Gupta आपने साफ शब्दों मे बनिया जाति का उल्लेख कर उनको बेइज्जत करने का घृणित कार्य किया है

सुबोध खंडेलवाल यशवंत भाई अपनी सृजनात्मकता से व्यापार करने और दूसरों को रोजगार देने वाला हर इंसान बनिया है। चाहे वो रिलायंस वाला मुकेश अंबानी हो या भड़ास वाले यशवंत भाई।

Aanand Singh अम्बानी ने कहा कि वह नहीं मानते कि वह सबसे ताक़तवर हैं। तो इसमें क्या अहंकार है?

Yashwant Singh लगता है कोई आप दूसरा वीडियो देख आए. वह अगर यही कह रहा है तो फिर तो ये पूरी पोस्ट ही बेकार है. धन्य हैं.

Aanand Singh मैंने कहा सुनाई या तो ठीक से नहीं दे रहा है यशवंत जी।

Aanand Singh या तो साफ़ सुनाई नहीं दे रहा! आप मूल बातचीत की यथावत लिंक दीजिए न!

Yashwant Singh उस बातचीत में भी इतना ही है. बाकी तो दूसरे सवालों का सामान्य जवाब है. ताकतवर वाले सवाल के जवाब में अंबानी कह रहा कि मैं तुम्हें सीरियसली नहीं लेता.

Aanand Singh मैंने दोबारा सुना । वह पहले प्रश्न का यह उत्तर देते हैं कि मैं नहीं मानता । और मैं आपको सीरियसली लेता नहीं। इसका अभी फ़िलहाल आशय इतना ही है कि जो बात आप कह रहे हैं उसे नहीं मानता । आपके इस प्रश्न को मैं गंभीर प्रश्न नहीं मान रहा। मेरी धन्यता…

Yogesh Garg पूँजी को सलाम कर रहे है राजदीप फिर कैसा अपमान?

पूजन प्रियदर्शी सीरियसली नहीं लेते तो इंटरव्यू भी नहीं देते।

सुबोध खंडेलवाल गुरु महाराज यशवंत जी आप जिस पत्रकार के अपमान की बात कर रहे हो पहले उससे तो पूछ लो अंबानी की बात उसे अपमानजनक लगी या सम्मानजनक ? और यदि अपमानजनक लगी तो तो खुद अपनी बौद्धिकता और प्रखरता से उस पूंजीपति को वही जवाब क्यों नहीं दिया ? वैसे राजदीप की बॉडी लैंग्वेज तो ऐसी लग रही थी मानो अंबानी के पास बैठकर उन्होंने बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है

Sunil Bajpai ::पत्रकार ::
हम तो भइया सब करते हैं।
पत्रकार कहलाते।
बिना सुरा के हम ना रहते
कच्ची भी पा जाते
हम तो भइया सब करते हैं।
पत्रकार कहलाते -१

ऐसा कोई भ्रष्ट नहीं है।
जो ना मुझको पास बुलाये।
कुत्तों सा दुत्कारे मुझको
लेकिन बोतल रोज दिलाये।।
कसम ईश की खाकर कहते
तलवे चाटे जाते।
हम तो भइया सब करते हैं।
पत्रकार कहलाते -२

पहले तो हालत खराब थी।
और ना थी पहचान
जबसे पत्रकार कहलाया
आलीशान मकान
इसी लिए तो हम भी जमकर
भ्रष्टों की महिमा गाते।
हम तो भइया सब करते हैं।
पत्रकार कहलाते -३

ऐसा कोई लाभ नही है
जो है नही उठाया
तलवे चाट चाट कर उनके
लाखों माल कमाया।।
बिना सुन्दरी के सच मानों
हम भी ना सो पाते।।
हम तो भइया सब करते हैं।
पत्रकार कहलाते- ४

अगर आप से लाभ मिले तो
जो चाहो कर देंगे।
रातों को रंगीन करो तो
मां – बहने भी देंगे – 5

इसीलिए तो सब कुछ पाकर
उढ़े गगन में जाते।
हम तो भइया सब करते हैं।
पत्रकार कहलाते -७

सुनील बाजपेयी

Thakur Sujan Singh Sikarwar Yashwant Singh bhai rajdeep ka itna paksh lena aap per sak ho raha h…. Rajdeep koi dudh ka dhula nhi h

Surendra Mahto Kushwaha Rajdeep jaise ke kiye shalinta waise hi hai jaise pakistaniyo ke hamdardi….kahe ka shalinta jo khaate india ka hai aur din bhar secular ke aad me india ko aur hindu ko girane ka ek v mouka nhi vhhodate hai…god job Ambani

Maninder Singh Sumit awasthi amish devgan sudhir chowdhry rohit sardana deepak chourasiya mukesh ambani ke puppet hai

Kamal Kumar Singh इसको तो मै भी सीरियसली नहीं लेता,मै कौन सा आमिर या घमण्डु हु।  😀

Yashwant Singh सुधीर चौधरी को सीरियसली लेने वाले राजदीप को क्यों लेंगे? हालांकि मेरा कहना है कि पत्रकारिता को बेहद उदात्तता से देखना चाहिए. कोई भाजपाई विचार का है, कोई कांग्रेसी, तो कोई वामी तो कोई आपिया तो कोई व्यापारी विचार का है तो कोई दलाल टाइप है. राजनीति में जो जो लक्षण दिखते मिलते हैं वो सब मीडिया में भी है, इसलिए किसी एक को पूरा खारिज या पूरा स्वीकार करने की प्रवृत्ति से बचना चाहिए. सबकी अच्छाइयों बुराइयों का तार्किक विश्लेषण करना चाहिए और जिसका जो अच्छा हो उसकी तारीफ, जो बुरा हो उसकी आलोचना की जानी चाहिए.

Kamal Kumar Singh हा हा हा। क्या हुआ सुधीर आपके जमात का नहीं ? वो पत्रकार नहीं ? 😀

Yashwant Singh यही तो कह रहा हूं कि सुधीर के साथ भी अगर मुकेश अंबानी ने ऐसी हरकत की होती तो भी मैं मुकेश अंबानी को गरियाता. बात स्टैंड लेने की है. लेकिन आप बता रहे हैं कि मैं भी राजदीप को सीरियसली नहीं लेता. यह दिखाता है कि आपकी भक्त टाइप सोच में अंबानी ने जो हरकत की वो कुछ नहीं, हां आपके जो पूर्वाग्रह हैं राजदीप के प्रति वो यथावत कायम है, अभिव्यक्त हो रहा है.

Kamal Kumar Singh आप चाहे कितना नाराज हो ले, सच तो ये है स्युडो लोगो का चेहरा बेनकाब होने के बाद कोइ भी उन्हें सीरियसली नहीं लेता। मैं भी नहीं। मै कौनसा अम्बानी का पोंछ हु भैया? :D…हाँ , सिरियस मैं सुधीर को भी नहीं लेता। रोहित सरदाना को जरूर लेता हूँ।

Mahesh Singh यशवंत जी मेरे हिसाब से अम्बानी ने कोई गलती नहीं की और कही से वे अशालीन नहीं दिखे बल्कि मुझे सरदेसाई जी या तो जरुरत से ज्यादा चापलूसी या महिनी करते नजर आये जो एक धूर्त आदमी करता है

Dhyanendra Tripathi यशवंत भाई, आप नि:संदेह एक प्रखर मीडिया विश्लेषक और उसकी निगहबानी करने वाले स्वयंसेवक भी है, पर पूरी विनम्रता के साथ कहना चाहता हूं कि मुकेश जी इस साक्षात्कार में कहीं से अहंकारी नज़र नहीं आ रहे. हॉं .. राजदीप जी के सवाल पर उनका ये कहना कि वो उन्हे सीरियसली नहीं लेते का निहितार्थ और भावार्थ शायद उनकी निर्दोषिता को इंगित करता है. वो राजदीप जी से ये कहना चाहते हैं कि वो सबसे ताकतवर शख्सीयत नहीं हैं. यह कहने में उनका लहजा जो भी रहा हो उससे आप कुछ भी निष्कर्ष निकाल सकते हैं पर इसमें अहंकार वाली बात कतई तौर पर नहीं है. मुकेश जी शायद बातचीत में इतने धूर्त और अभिजात नहीं बन पाये हैं कि उनके जवाब बड़े रेटोरिक हों. हॉं जो देश का सबसे धनवान व्यक्ति है, उसमें कुछ खास और अलग तो होगा ही और वो सामने भी आयेगा. आप एक बार उनसे मिल लीजिये, दावा है कि आप का नजरिया बदल जायेगा.. गरियाने के त्वरित नतीजे पर हर बार पहुंचना न्यायसंगत नहीं भाई..

Mahesh Singh यसवंत जी यदि सरदेसाई जी आपको कहे की you are the father of journalism तो आप क्या उत्तर देगे

Yashwant Singh तो मैं कहूंगा ये आपका अनुचित विश्लेषण है, लेकिन इतनी ज्यादा महानता बख्शने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद 😀

Mahesh Singh निःसंदेह

Nakul Chaturvedi राजदीप में न जाने कौन सी बात ख़ास लगती है आपको.. राजदीप के इंटरव्यू की शुरुआत ही ओछी थी… बाकी का फिर क्या हाल होगा.. इतना समझदारों को समझ आता है..

Yashwant Singh ये इंटरव्यू का तरीका होता है नकुल जी. पता नहीं आप पत्रकार हैं या नहीं. इंटरव्यू का एक तरीका यह होता है कि हलके फुलके सवाल से शुरू करें और गंभीर सवाल की तरफ जाएं. शुरुआत हलके फुलके से इसलिए की जाती है ताकि माहौल टेंस न रहे, इंटरव्यू देने वाला सहज फील करे. बाकी राजदीप का जितना विरोध मैंने किया है, वो आपने न तो पढ़ा होगा न सुना होगा, इसलिए कोई सफाई नहीं दूंगा. सोच तब गड़बड़ होती है जब हम अपने पूर्वाग्रह के चश्मे से लगातार चीजों को देखते रहते हैं. अगर अंबानी ने ये हरकत सुधीर चौधरी के साथ की होती तो भी मैं इसी तरह से अंबानी को गरियाता क्योंकि मसला मीडिया जैसे चौथे खंभे के प्रतीक किसी वरिष्ठ पत्रकार को पूरी तरह नान सीरियस बताकर पूरे पेशे की गरिमा को खारिज करने का है.

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Comments on “राजदीप सरदेसाई को अपमानित कर मुकेश अंबानी ने पूरे चौथे खंभे की औकात बता दी (देखें वीडियो)

  • shailesh arya says:

    RAJDEEP IS SUCH A COWARD JOURNALIST WHO HAD NO COURAGE TO MEET A JOURNALIST WHOM HE HAD SACRIFICED IN THE NAME OF COST CUTTING AND LATER APPOINTED HIS OWN CORRUPT JOURNALIST IN PLACE OF HONEST AND HARD WORKING JOURNALIST. THIS IS INCIDENT OF 2009 WHEN RAJDEEP TOOK OVER IBN AS BOSS.
    RAJDEEP IS HYPOCRITE. THIS TIME MR YASHWANT YOU ARE ON WRONG SIDE.

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  • Rishi Patel says:

    राजदीप सरदेसाई जैसे बिकाऊ व्यक्ति को तुम बड़ा पत्रकार कह रहे हो………. वाह रे यशवंत भड़वे

    Reply
  • विक्की says:

    इस बेइज्जती के जिम्मेदार ऐसे ही पत्रकार हैं, जो पहले तो चाटुकारिता करते हुए किसी हद तक चले जाते हैं और फिर बेइज्जती होती है तो उसे ‘चौथे स्तंभ’ पर हमला मान लेते हैं। आश्चर्य नहीं होगा यदि आने वाले दिनों में ऐसे किस्से दूसरे पत्रकारों के साथ भी हो और अक्सर हो…

    Reply
  • यशवंत जी भारत का साबसे पावरफुल आदमी ऐसा किसिको कहना मतलब उसको provoking लगा होगा, इसलीये अंबानी ने कहा, तो राजदीप का intention भी तो सही होना चाहीए ना.

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