PACL कंपनी दिवालिया, निवेशकों का धावा, मालिक भंगू फरार, सीबीआई टीमें कर रही तलाश

चिटफंड कंपनी पीएसीएल से एक बड़ी खबर आ रही है. इस कंपनी में पैसे लगाने वाले निवेशक इन दिनों बेचैन हैं. चर्चा आम है कि पीएसीएल कंपनी दिवालिया हो गई है. जो भी निवेशक परिपक्वता अवधि पूरे होने के बाद पैसे मांगने जाता है उसे कोई न कोई बहाना बनाकर बिना पैसे दिए लौटा दिया जाता है. इससे नाराज पीएसीएल के सैकड़ों निवेशकों ने पिछले दिनों पीएसीएल कंपनी के मालिक निर्मल सिंह भूंग के गुड़गांव स्थित घर के बाहर प्रदर्शन किया.

गुड़गांव के सेक्टर 57 सुशांत लोक फेज 3 के ब्लाक ए स्थित भंगू के मकान के बाहर सैकड़ों निवेशक जमा हो गए और तोड़फोड़ करने लगे. ये लोग अपने पैसे वापस मांग रहे थे. इन लोगों का कहना था कि कंपनी पिछले दो साल से किसी के भी पैसे नहीं लौटा रही है और तरह तरह के बहाने कर टाल रही है. मौके पर पहुंची पुलिस ने नाराज निवेशकों को शांत किया और कानून अपने हाथ में न लेने की अपील की. पुलिस ने आश्वासन दिया कि पूरे मामले को उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाया जाएगा.

उधर, सेबी और सीबीआई के शिकंजे में फंसी कंपनी पीएसीएल के मालिक भंगू के बारे में सूचना मिल रही है कि वे फरार हो गए हैं. सीबीआई की चार टीमें भंगू को तलाशने और गिरफ्तार करने के लिए बनाई गई हैं. लाखों लोगों को घर का सपना दिखाकर अरबों खरबों रुपये वसूलने वाला निर्मल सिंह भंगू कहां फरार है, ये किसी को पता नहीं चल पा रहा है. पीएसीएल से जुड़े उच्चाधिकारियों ने अपने अपने फोन बंद कर लिए हैं. पूरे देश भर में पीएसीएल के निवेशकों में बेचैनी का माहौल है. चर्चा यहां तक है कि भंगू ने दो तिहाई पैसा भारत के बाहर आस्ट्रेलिया व अन्य देशों में ट्रांसफर करा दिया है और वहां अपना रीयल स्टेट समेत कई तरह के धंधों को जमा लिया है. ऐसे में यह संभव है कि भारत में एक नए किस्म का सारधा घोटाला हो और लाखों लोगों के पैसे मारे जाएं.

इस बीच, केंद्रीय जांच ब्यूरो ने 45 हजार करोड़ रुपये के पीएसीएल पर्ल घोटाला मामले में पर्ल समूह के खिलाफ जांच में तेजी लाने के लिए चार टीमें गठित की हैं. सीबीआई सूत्रों ने बताया कि पर्ल समूह की दो कंपनियों पर्ल एग्रोटेक कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल) और पर्ल गोल्डेन फॉरेस्ट लिमिटेड (पीजीएफएल) द्वारा पोंजी योजनाों के माध्यम से बटोरी गई हजारों करोड़ के घोटाले की जांच को गति प्रदान करने के लिए चार टीमें गठित की गई हैं. ये टीमें जल्द से जल्द जांच करके त्वरित सुनवाई के लिए अदालत को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगी.
    
सीबीआई ने समूह के प्रबंध निदेशक निर्मल सिंह भंगू, उसकी दो कंपनियों तथा निदेशक सुखदेव सिंह के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने सहित विभिन्न धाराों के तहत मुकदमा र्दज किया था तथा गत वर्ष फरवरी में पल्र्स समूह के खाते जब्त कर लिये थे. सेबी ने पीएसीएल के परिचालन पर सवाल खड़े किये थे. सेबी का दावा है कि पीएसीएल ने रीयल एस्टेट कंपनी के माध्यम से गरीब निवेशकों से करीब 45 हजार करोड़ रुपये अर्जित किये हैं. उच्चतम न्यायालय ने शारदा चिटफंड घोटाले के अलावा अन्य पोंजी बचत योजनाों की भी जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा है.

ज्ञात हो कि गैरकानूनी रूप से निवेशकों से धन जमा करने के मामले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने पीएसीएल लिमिटेड की मनी पूलिंग स्कीम पर रोक लगा दी है. करीब 50 हजार करोड़ की रकम जुटाने वाली इस स्कीम के निवेशकों को उनकी रकम लौटाने का सेबी ने कंपनी को आदेश दिया है. पीएसीएल की स्कीम पर रोक लगाने के साथ ही सेबी ने फर्जीवाडे़ और और नियमों का उल्लंघन करते हुए कारोबार के अनुचित तरीके अपनाने को लेकर कंपनी के नौ प्रोमोटरों और निदेशकों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार कार्रवाई शुरू करने की बात भी कही है.

सेबी ने अपने 92 पन्नों के आदेश में कहा है कि कंपनी की स्वीकारोक्तियों के आधार पर इस स्कीम के तहत जुटाई गई रकम 49,100 करोड़ रुपये बैठती है. सेबी के मुताबिक पीएसीएल की ओर से 1 अप्रैल 2012 से 25 फरवरी 2013 के बीच हस्तांतरित धनराशि संबंधी पूरे विवरण उपलब्ध कराए जाने पर स्कीम के जरिए जुटाई गई राशि कहीं अधिक बैठती. सेबी ने बताया कि पीएसीएल की इस स्कीम के जरिए करीब 5.85 करोड़ ग्राहकों से रकम जुटाई गई है. इसमें वह लोग भी शामिल हैं जिन्हें कथित रूप से रकम के एवज में जमीन दे दी गई है और वह भी, जो अभी जमीन मिलने के इंतजार में हैं. गौरतलब है कि इस मामले में सीबीआई निर्मल सिंह भंगू सहित पीएसीएल के शीर्ष प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों से पूछताछ कर चुकी है. पीएसीएल के प्रोमोटर और निदेशक पर्ल ग्रुप और पीजीएफ ग्रुप के साथ भी जुडे़ रहे हैं.

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