पत्रकारिता का अर्नबीकरण!

Sanjaya Kumar Singh : अर्नब गोस्वामी को मैं नहीं देखता। भाजपा से उसके संबंध जानने और उसके झुकावों को देखने के बाद अर्नब को निष्पक्ष नहीं माना जा सकता है। ऐसे में कल नए चैनल के उद्घाटन को लेकर भी दिलचस्पी नहीं रही। लालू यादव से संबंधित ऑडियो के प्रसारण और उसमें गैंगस्टर शहाबुद्दीन का लालू यादव से कहना, “खत्तम है आपका एसपी” – ऐसा कोई मतलब नहीं देता है जो बताया और बनाया जा रहा है। एक साल पुराने इस मामले को जिस तरह पेश किया गया है वह भाजपा समर्थन और लालू-नीतिश विरोध ज्यादा पत्रकारिता या रिपोर्टिंग कम है। ठीक है, अंग्रेजी का यह चैनल बिहार के मतदाताओं पर क्या प्रभाव छोड़ पाएगा। फिर भी…

इस रिपोर्ट में नीतिश की राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में आने की संभावना के मद्देनजर उनपर टीका टिप्पणी ज्यादा है, उन्हें जवाब देना होगा, नहीं देंगे तो आप (भाजपा वाले) क्या करेंगे जैसे सवाल आदि का वीडियो देखकर यह स्पष्ट हो जाता है कि सब कुछ भाजपा की राजनीति का हिस्सा है। भाजपा कहती तो यह है कि कांग्रेस के लोग बेईमान हैं, पैसे कमाए हैं पर चैनल उसके समर्थकों के ज्यादा है। नया चैनल भी उसी के समर्थक का आया। तब, जब भ्रष्टाचार से कमाई बंद है और तमाम चैनलों की माली हालत खराब है। किसी कांग्रेसी का चैनल आया हो तो मुझे पता नहीं है। लेकिन होगा भी तो छोटा-मोटा। पर वह अलग मुद्दा है।

फिलहाल तो मुद्दा है यह है कि भाजपा की राजनीति का जवाब दूसरी पार्टी के लोग उसी की भाषा में क्यों नहीं दे रहे हैं। ये लव लेटर लिखने वाले लव लेटर ही लिखेंगे? पूछेंगे नहीं कि पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब क्यों नहीं दिया जा रहा है। पांच साल के लिए फर्जी सर्टिफिकेट पर सांसद चुनी गई ज्योति धुर्वे का मामला अदालत में तय हो यह अगर ठीक भी हो तो पिछली बार पांच साल में रिपोर्ट ही नहीं आने पर कार्रवाई कौन करेगा? देश की राजनीति में सिर्फ भाजपा ही सक्रिय लग रही है बाकी सब भाजपा की चालों को झेल रहे हैं, जवाब देना या दे पाना तो बहुत दूर।

सबका “काला धन” खत्म हो गया और लगता है सिर्फ भाजपा के पास सफेद धन था, है और बचा हुआ है। पत्रकारिता पर एक कार्यक्रम में कल एक मित्र ने “टीवी का अर्नबीकरण” कहा। मैं कहता हूं अर्नब से पत्रकारिता सीखिए। नए स्टार्टअप में मोटी तनख्वाह वाली नौकरी मिलेगी।

वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह की एफबी वॉल से.

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