प्रेस क्लब आफ इंडिया अपने सबसे खराब दौर में, विनीता ने उठाई आवाज़

Vineeta Yadav : प्रेस क्लब में यूँ तो कोई दिलचस्पी नहीं थी लेकिन कुछ लोगों ने कहीं न कहीं ये विश्वास दिला दिया था कि क्लब को हमारे जैसे लोगों की भी शायद ज़रूरत है और शुरुआती दो साल हमने अपनी भागीदारी देने की कोशिश भी की क्लब को बेहतर तस्वीर में लाने के लिए. लेकिन इस साल सारी मेहनत पानी सी हो गयी क्यूँकि तानाशाही का रवैया यूँ दिखा कि एक एक करके हर कोना ईमानदारी का ध्वस्त होता दिखने लगा.

मेरा फ़र्ज़ था कि ग़लत बात पर आवाज़ उठाए या इस्तीफ़ा देकर अपना पिंड छुड़ा लें लेकिन कुछ लोगों ने ज़िम्मेदारी याद दिलाई कि अपनी बात सामने रखें और पूरा साल ये बोलने में निकल गया कि भाई तुम ग़लत कर रहे हो, ये सबका क्लब है. लेकिन नहीं जी, कोई क्यूँ सुने!

बस वो करते गये और ज़हन में फ़ासले बढते गए! सबसे ज़्यादा दुःख तब हुआ जब प्रेस क्लब को किसी राजनीतिक विचारधारा से जुड़ा पाया! बेहद दुःख से मैं इस साल के कामकाज में ग़लत चीज़ें होने से न रोक पायी. इसी बात पर अपनी नाकाम कोशिश स्वीकारतीं हूँ. बस, बाक़ी दोस्तों से निवेदन है जो क्लब को बेहतर बना सकते हैं वो इस क्लब को बिना स्वार्थ के ख़ूबसूरत बनाएं!

एबीपी न्यूज में कार्यरत युवा और प्रतिभाशाली पत्रकार विनीता यादव की एफबी वॉल से. इस स्टेटस पर आए ढेर सारे कमेंट्स में से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं…

Pawan Kumar : Tooooooo.. Late.

Vineeta Yadav : before ds also i hv told many members of club from my side about fact ! But nothing happened so better i accept my failure to stop wrong things in club , now upto u to think ! Almost meetings hv record dt i objected ! In last meet also i asked fr basic transparency but again same thing happened! I may be new to understand politics in club but my focus is to perform work , same time to object on wrong decisions so i did !

Vinod Tikoo : अगर सिस्टम को ठीक करना है तो सिस्टम के बीच रहकर ही कर सकते हो. परिस्थिति से भाग कर नही.

Vineeta Yadav : Sir Aapko lagta hai mein bhagne waalo mein hun? Ek cheez than li toh karke chona hai lekin 3saal diye meine club ko nd u know i did my work also but i hate to play dirty.

Yashwant Singh : आपको इस्तीफा नहीं देना है। आप के साथ हम जैसे हजारों मुट्ठी बुलन्द करके खड़े हैं। ड्रामेबाज़ और भ्रष्टाचारी नदीम अहमद काज़मी को सबक सिखाने का वक़्त आ गया है। मैंने खुद इनकी कई हरकतों को नजरदांज किया लेकिन आपके लिखने के बाद ये लग रहा है कि सच्चाई को साफ़ साफ़ बता कह बोल देने का दौर आ गया है। छल के दम और दाम पर प्रेस क्लब हड़पने की साजिश कामयाब नहीं होगी।

Siddhartha Rangnath Rameshwaram : आप को डटे रहना चाहिए। आप के साथ मेरे जैसे कई लोग हैं।

Pankaj Chaturvedi : मैं तो गत चार सल से वहां गया भी नहीं ना ही वोट डालने क्‍यों कि असल में वह दारूखेरों का अडडा बन गया है गंभीर विचारों का कोई स्‍थान नहीं

Abhay Parashar : यहाँ से गलत सोच और विचारधारा वालों को निकालना चाहिए जो क्लब को अपनी जागीर समझते है और पत्रकारो को धोखा दे रहे है।

Sanjay Sharma : प्रेस क्लब ही नहीं राजनीति तो हर जगह घुसी हुई है। ईमानदारी की डगर आसान नहीं होती क्योकि आज बेईमान सब ताकवर हो गए है।

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