अखिलेश यादव के साथ सेल्फी लेकर रवीश कुमार भी आ गए ‘सेल्फीबाज चिरकुट पत्रकार’ की कैटगरी में!

Vivek Kumar : रवीश कुमार बहुत बड़े वाले हिप्पोक्रेट हैं. जब सुधीर चौधरी और अन्य पत्रकारों ने पीएम नरेंद्र मोदी संग सेल्फी लेकर फेसबुक पर पोस्ट किया तो उन्हें कोसा गया. रवीश ने भी ऐसे सेल्फीबाज पत्रकारों को बुरा-भला कहा. लेकिन उन्होंने अखिलेश यादव के साथ सेल्फी लेकर खुद को ‘सेल्फीबाज चिरकुट पत्रकार’ की कैटगरी में ला खड़ा किया है. बधाई हो. सुधीर चौधरी और रवीश कुमार पत्रकारिता की दो अतियां हैं, दो एक्स्ट्रीम हैं. इन अतियों ने बीच की बहुत बड़ी पत्रकारीय धारा को निगल लिया है, जो पार्टीबाजी-सेल्फीबाजी की जगह सच में तथ्यपरक पत्रकारिता करते हैं, चुपचाप.

पत्रकारिता की गरिमा इसी में है कि नेताओं से एक सम्मानजनक दूरी बना कर रखें पत्रकार. ये नहीं कि नेता देखा तो बौरा गए और उफनते-छछाते लगे सेल्फी खींचने. यह सेल्फीबाजी दर्शाता है कि आपमें अपने पेशे को लेकर अकड़/रीढ़/दंभ नहीं है. आप नेता को बहुत बड़ा मानते हैं. इतना बड़ा कि उसके साथ एक फोटो में दिखने की लालसा आप रोक नहीं पाते. अगर पेशागत दर्प आपमें नहीं है तो आप केंचुआ हैं. आप अपने चैनल मालिक के भोंपू है जो आपको किस तरह चिल्लाना है, इसका रोडमैप दे देता है और आप उसी फ्रेम में भोंकते रहते हैं. सुधीर चौधरी और रवीश कुमार जैसों ने पत्रकारिता की नाक कटा दी है. पत्रकारिता को पार्टीबाजी में तब्दील कर दिया है. शर्मनाक है ये सब.

Ashish Maharishi : एक पत्रकार कैसे किसी नेता के साथ सेल्‍फी ले सकता है? शर्म आती है ऐसे पत्रकारों पर। Sudhir Chaudhary हो या Ravish Kumar, ये लोग कभी युवा पत्रकारों के आदर्श नहीं हो सकते। यदि आप ऐसे ‘सेल्‍फी’ पत्रकारों को अपना आदर्श मानते हैं तो आप बहुत बड़ी भूल कर रहे हैं।

Priyabhanshu Ranjan : अगर ये फोटो सही है तो रवीश सर से बस इतना ही कहना चाहूंगा – ये आप जैसे पत्रकार को शोभा नहीं देता!

Kunal Dutt : I dun think there is anything wrong in this… whether he’s taking a selfie or going live on FB with him… it’s his personal life.. a selfie dusn make him a supporter or opponent of someone.

Priyabhanshu Ranjan : Then why do we criticise those journalists who click selfies with Narendra Modi? Why this double standard?

Kunal Dutt : I hv never criticised ppl taking selfies with Modi or Trump.. but yes occasion n timing is critical… here it’s an informal setting.. n therefore fine. I am neutral abt this pic.. so won’t argue further… each has own ?

Abhishek Singh Bhadauriya : इसमे क्या गलत है? मोबाइल उनका, हाथ उनका, दिमाग उनका, अब फ़ोटो किसकी ले, किसके साथ ले, ये उनका मसला है। इससे हमारी जिंदगी में क्या फर्क पड जाएगा भला?

Priyabhanshu Ranjan : फर्क तो तब भी नहीं पड़ता जब कुछ पत्रकार मोदी के साथ सेल्फी लेते हैं!

Abhishek Singh Bhadauriya : देश का प्रधानमंत्री स्वयं सेल्फी लेने और देने के शौकीन है। उसमें कोई क्या कर सकता है। ये तो उनकी हॉबी है।

Sampat Bhargav : छोटे मुंह बड़ी बात होगी लेकिन यह उनके पेशे के खिलाफ है

Kumar Prabin Chandra : इसमें कोई आपत्ति या अशोभनीय बात नही है अपितु ये रवीश में अहम नही है ये दर्शाता है। हर चीज को पेशा से नहीं जोड़ा जाना चाहिये।

Priyabhanshu Ranjan : अच्छा! फिर मोदी के साथ सेल्फी लेने वाले पत्रकारों की आलोचना क्यों करते हैं हम?

Kumar Prabin Chandra : सेल्फ़ी की कभी आलोचना नहीं की जा सकती। सेल्फी को अगर प्रोग्राम के रूप में प्रायोजित किया जाता है तो उसकी समीक्षा होगी। फिर प्रशंसा और आलोचना भी होगी।

Priyabhanshu Ranjan : मैंने मोदी के साथ सेल्फी लेने वाले पत्रकारों की भी आलोचना की है। रवीश की भी आलोचना करूंगा।

Kumar Prabin Chandra : अगर इस सेल्फी का भाव मे उसी तरह की चाटुकारिता निहित है तभी आप सही हैं।

Priyabhanshu Ranjan : मतलब रवीश हैं तो कुछ भी दलील देकर बचाव करेंगे? क्या सर, आपने निराश किया!

Kumar Prabin Chandra : नहीं ऐसा नहीं किया जा सकता। तथ्य सापेक्ष में रह कर ही देखा जाना चाहिये। वस वही कर रहा हूँ। आपको भी निराश होने की या खुश होने अभी कोई जरूरत नहीं है।

Suhail Ahmed : राहुल गांधी के साथ सेल्फी लेते तो अच्छा होता क्या?

Priyabhanshu Ranjan : क्यों? पत्रकार के लिए नेता के साथ सेल्फी लेना जरूरी है क्या? बगैर सेल्फी लिए बड़े पत्रकार नहीं कहलाते? भक्त वाली बातें मत करिए। अगर मोदी के साथ सेल्फी लेने वाले पत्रकारों की आलोचना करते हैं तो सबकी करिए। सेल्फी कहीं से जायज़ नहीं ठहराई जा सकती। और हां, अब हमें उन पत्रकारों को भी नहीं कोसना चाहिए जो मोदी के साथ सेल्फी लेते हैं।

Madhav Srimohan : ये एक बहुत ही बढ़िया मौका दे दिया गया है रवीश विरोधियों को। अब उनके पोस्ट्स पर गन्ध फैलायेंगे इसी फोटो को पोस्ट कर करके।

Rizwan Rizvi : मुझे भी यह ठीक नहीं लगा, रवीश जी को ऐसी सेल्फी से बचना चाहिए

Harshendra Singh Verdhan : It’s Banding for the channel & hype on social media for NDTVYuva.

Priyabhanshu Ranjan : Whatever. I am a bit disappointed. Now MODI BHAKTS will use this pic to defame Ravish and his salutable journalism!

Harshendra Singh Verdhan : That Hardly matters for him & the channel. Work place is more important than anything else.

Chandan Yadav : Why..why do u think so? He is one of the most successful chief ministers of all time with no corruption charges even if Yogi tried so hard to frame him..

Priyabhanshu Ranjan : Modi is also successfull in the eyes of some people. So we shouldn’t criticise those journalists who click selfies with him. Isn’t it?

Chandan Yadav : No it isn’t..even in that case it’s almost imperative to question the credibility of the politician in concern.. Besides, if you agree Ravish is one of the few journalists that we have.. I m not talking about glorified pimps in disguise of Journalists.. P.S. : I m not talking about people’s perception, I m talking about real accomplishments..

Yashwant Singh : फोटो सही है। इस फोटो को देख कर रविश के प्रति जो मेरे मन में संशय था, वो दूर हो गया। बहुत फर्क नहीं जी के सुधीर और ndtv के रविश में। हां, इन दोनों ने पत्रकारिता की असली जमीन खा ली।

Sadique Zaman : कैसे, क्या इन्होंने हुक्मरानों से सवाल पूछना बंद कर दिया है, एक फोटो से कैसे किसी की निष्ठा और ईमानदारी को आंका जा सकता है।

Sanjay Kumar Singh : यही तो माया है सत्ता के ताक़त का। कोई नहीं बच पाता है इससे। रविश एक इंसान ही हैं। वो सत्ता और उसकी ताक़त से कैसे बच सकते हैं। उनकी कमज़ोरी भी एक इंसान के तरह ही होगी। यही नोर्मल भी है इस देश के संदर्भ में। रविश की बाहरी ताक़त और क़द जो भी हो, अंदर से वो हमारे समाज का ही एक आइना है।

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Comments on “अखिलेश यादव के साथ सेल्फी लेकर रवीश कुमार भी आ गए ‘सेल्फीबाज चिरकुट पत्रकार’ की कैटगरी में!

  • एक सेल्फी से किसी स्थापित पत्रकार की गरिमा पर कोई आँच नहीं आता. जहाँ तक देश में रविश की लोकप्रियता का सवाल है वो किसी नेता से कम नहीं है जिनके साथ वे सेल्फी के लिए लालायित हो. ये तो सिर्फ उस कार्यकर्म केे जिन्दादिली को बनाये रखने का था जिसमें देश के प्रतिष्ठित पत्रकार और युवा मौजूद थे. कृपया रविश को सुधीर चौधरी की श्रेणी में न रखें.

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  • पत्रकार सब भोंपू ही हैं। सब अपनी अपनी नौकरी बचा रहें हैं। चैनल मालिक अपना चैनल बचा रहे हैं।

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