दैनिक जागरण मजीठिया का लाभ कर्मचारियों को नहीं देगा! हिंदुस्तान, अमर उजाला और सहारा ने भी चली चाल

खुद को देश का नंबर वन अखबार बताने वाले दैनिक जागरण के कानपुर प्रबन्धन ने अपने कर्मचारियों को जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ देने से साफ़ तौर पर पलटी मार लिया है। यही नहीं कानपुर से प्रकाशित हिंदुस्तान और अमर उजाला तो यहाँ तक दावा कर रहे हैं कि वह अपने कर्मचारी को मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ दे रहे हैं। कानपुर से प्रकाशित राष्ट्रीय सहारा और आज अखबार ने अपने आर्थिक हालात का रोना रोते हुए मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ देने से इनकार कर दिया है।

कानपुर के मीडिया जगत की ये सच्चाई सामने आई है आरटीआई के जरिये। कानपुर के पत्रकार और मजीठिया क्रांतिकारी शारदा त्रिपाठी ने उत्तर प्रदेश के कामगार आयुक्त कार्यालय से आरटीआई से ये जानकारी मांगी थी कि कानपुर में जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड का किन किन अखबारों ने पालन किया और किसने किसने नहीं किया, पूरी रिपोर्ट दी जाय। इस पर कामगार आयुक्त कार्यालय ने चौकाने वाली जानकारी उपलब्ध कराई है। कानपुर से प्रकाशित अख़बारों में दो अखबारों का दावा है कि वे मजीठिया वेज बोर्ड के अनुरूप वेतन दे रहे हैं। ये हैं हिंदुस्तान और अमर उजाला। दो अखबार राष्ट्रीय सहारा और आज की हालात नाजुक बताई गयी है।

रही बात दैनिक जागरण अखबार की तो उसे ‘नॉट अप्लीकेबल’ की स्थिति में रखा गया है। दैनिक जागरण अखबार धोखे से अपने कर्मचारियों का सादे कागज पर हस्ताक्षर आये दिन कराता रहता है। ऐसा ही एक प्रपत्र मजीठिया वेज बोर्ड की धारा 20 जे का तैयार कर लिया गया है और उसी को ढाल बनाकर कानपुर के सहायक श्रमायुक्त रवि श्रीवास्तव दैनिक जागरण को बचाने पर लगे हैँ कि जागरण कर्मियों को मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ न मिले और भईया जी की उन पर कृपादृष्टि भी बनी रहे।

उल्लेखनीय है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना वाद संख्या 411 / 2014 की सुनवाई करते हुए 23 / 8 / 2016 को श्रमायुक्त को आदेश दिया था कि मजीठिया लागू करवाओ। लेकिन सहायक श्रमायुक्त ने जो रिपोर्ट भेजा है, वह चौंकाने वाली है। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मजीठिया वेज बोर्ड की अनुशंसाएं दैनिक जागरण अखबार पर लागू नही होंगी। चूंकी इसके कर्मचारियों ने पुराने वेतन और परिलाभ लेने के लिए सहमति दी है और इस बाबत प्रबंधन ने हस्ताक्षर कराये हैं। यानी यह आसानी से कहा जा सकता है कि वेज बोर्ड का कानून इस अखबार पर लागू नहीं होगा और सारे कर्मचारी पुराने वेतन पर काम करते रहेंगे।

यहां यह बताना जरूरी होगा कि कानपुर में लगभग 15 कर्मचारी 17(1) के तहत रिकवरी दाखिल किये हुए हैं और इनकी लगभग 8 डेट भी पड़ चुकी है जिसमें मलिकानों का जवाब आ गया है और अभिलेख के लिए अगली डेट भी पड़ी हुई है। ऐसी स्थिति में यह जाँच रिपोर्ट क्या साबित करेगी, सोचनीय है। लेकिन इन अखबारों के कुछ मजीठिया क्रांतिवीर अब भी पीछे हटने के मूड में नहीं हैं।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट
मुंबई
9322411335



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