छत्तीसगढ़ भईया, इससे अच्छा तो मजदूरी कर लेते, कहाँ से फंस गए मीडिया में! आज कुछ काम से प्रेस क्लब गया हुआ था, हमेशा की तरह प्रेस क्लब के बाहर और भीतर चहल पहल थी, गेट के ठीक... May 13, 2016
साहित्य पुस्तक समीक्षा : जीवन का मूल स्वर है गजल संग्रह ‘दर्द का कारवां’ आम जीवन की बेबाकी से जिक्र करना और इसकी विसंगतियों की सारी परतें खोल देना यह विवेक और चिंता की उंचाइयों का परिणाम होता... March 31, 2015
सुख-दुख पत्रकार गोपाल ठाकुर के मामले में काशी पत्रकार संघ की भयावह चुप्पी के मायने : ...दर्द से तेरे कोई न तड़पा आंख किसी की न रोयी : पत्थर के सनमपत्थर के खुदापत्थर के ही इंसा पाये है,तुम शह-रे... November 3, 2014