डॉ अवनीश सिंह चौहान को उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान का ‘हरिवंशराय बच्चन युवा गीतकार सम्मान’

04 जून, 1979 को चन्दपुरा (निहाल सिंह), इटावा (उत्तर प्रदेश) में जन्में चर्चित युवा कवि, अनुवादक, सम्पादक डॉ अवनीश सिंह चौहान को उनके नवगीत संग्रह ‘टुकड़ा कागज का’ (प्रकाशन वर्ष – 2013) पर उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान का ‘हरिवंशराय बच्चन युवा गीतकार सम्मान’ प्रदान करने की घोषणा की गयी है। यह सम्मान उन्हें माननीय मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जी द्वारा 07 दिसंबर 2014 को लखनऊ में प्रदान किया जाएगा। यह राष्ट्रीय सम्मान वर्ष में एक युवा गीतकार को दिया जाता है, जिसकी जानकारी संस्थान की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

हिंदी संस्थान के पुरस्कार पाने वालों में 80 प्रतिशत से ज्यादा पोंगापंथी और सांप्रदायिक मानसिकता के लोग हैं

Anil Kumar Singh : कँवल भारती की औकात बताने के बाद आज उत्तर प्रदेश सरकार ने हिंदी संस्थान के पुरस्कारों की घोषणा कर दी है. चूंकि मायावती की सरकार ने इन पुरस्कारों को बंद कर दिया था इसलिए पूरी कोशिश की गई है कि इस लिस्ट से दलितों का पत्ता पूरी तरह साफ रहे. भाजपा के शासन में पंडित दीनदयाल उपाध्ध्याय के नाम पर पुरस्कार शुरू किया गया था, उसे चालू रखा गया है क्योंकि उससे सपा के समाजवाद को मजबूती मिलने की संभावना है २०१४ में. दो-तीन यादव भी हैं क्योंकि इस समय की मान्यता है कि असली समाजवादी वही हो सकते हैं. खोज-खाज कर एक दो मुस्लिम भी लाये गए हैं क्योंकि उनके बिना समाज वाद २०१४ का ख्वाब भी नहीं देख सकता.

हिंदी संस्थान ने लखकों को झूठा-फ्रॉड साबित कर अपनी फोरेंसिक लैबोरोट्री भी खोल ली है…

Dayanand Pandey : उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान में इस बार पुरस्कार वितरण में धांधली भी खूब हुई है। इस धांधलेबाजी खातिर पहली बार उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान ने एक फर्जी फोरेंसिक लैब्रोटरी भी खोल ली है। तुर्रा यह कि बीते साल किसी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में किसी ने याचिका दायर कर दी थी सो इस याचिका कर्ता के भय में लेब्रोटरी में खुद जांच लिया कि कौन सी किताब किस प्रेस से कैसे छपी है और इस बिना पर कई सारी किताबों को समीक्षा खातिर ही नहीं भेजा समीक्षकों को। और इस तरह उन्हें पुरस्कार दौड़ से बाहर कर दिया। क्या तो वर्ष 2014 की छपाई है कि पहले की है कि बाद की है। खुद जांच लिया, खुद तय कर लिया। ज़िक्र ज़रूरी है कि इस बाबत लेखक की घोषणा भी हिंदी संस्थान लेता ही है हर बार।