गोरखपुर से निकलने वाला वीकली अखबार ‘4यू टाइम्स’ बंद

गोरखपुर में वीकली अखबार की कैटगरी में सबसे ज्यादा बिक्री वाला साप्ताहिक अखबार 4यू टाइम्स बंद हो गया। इस अखबार के बंद होने से स्थानीय खबरों की धारदार विश्लेषण करने वाले एक अदद अखबार की कमी पाठक शिद्दत से महसूस कर रहे हैं। लेकिन, जब बात धन की हो तो पाठकों की सुनता कौन है। इस अखबार का पंजीकरण कराने का काम डा. संजयन त्रिपाठी ने किया था। वही इसके मालिक-संपादक थे। मैं कार्यकारी संपादक था। 25 दिसंबर 2012 को डा. त्रिपाठी ने मुझे खुद से जोड़ा था।

‘खबरें अभी तक’ बंद… उमेश जोशी, नितेश सिन्हा, मनीष मासूम समेत कई बेरोजगार

आखिरकार ‘खबरें अभी तक’ चैनल पर लटका ही दिया ताला… शाम 5.15 पर एक नोटिस चस्पा कर चैनल बंद करने की सूचना चैनल कर्माचारियों को दे दी गई… इसी चैनल के प्रबंधन ने नवंबर में कई कर्मचारियों को यह कह कर निकाल दिया था कि कंपनी का पुनर्गठन हो रहा है. इस बहाने कुछ चाणक्यों ने नौकरी बचा ली थी. अब मालिक ने ऐसे चाटुकारों को भी नहीं छोड़ा. चैनल के मालिक सभापा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुदेश अग्रवाल हैं जो बिजली के खोपचे की दुकान का धंधा करते हैं. इन्होंने अपने चैनल से अपने आपको हरियाणा का भावी मुख्यमंत्री घोषित कर दिया था. मात्र 500 के लगभग वोट पाने वाले अग्रवाल अब अपने औकत में आ गए हैं.

एबीपी का पंजाबी चैनल बंद हुआ, 200 बेरोजगार हुए, प्रदर्शन किया, पर ‘एबीपी न्यूज’ पर दस सकेंड की भी खबर नहीं चली

एक के बाद एक पंजाबी चैनलों के बंद होने के पीछे किसका हाथ? एबीपी चैनल सांझा ने दफ्तर बंद किया और 200 के करीब कर्मियों की छुट्टी की। उन्हें यह कहकर इस्तीफे देने का आदेश दिया कि पंजाब में केबल नेटर्वक उनका चैनल चलाने के लिए तैयार नहीं है। अगर पंजाब सरकार या केबल नेटर्वक किसी चैनल को जबरदस्ती रोकते हैं तो जिस मीडिया कंपनी का राष्ट्रीय स्तर का चैनल हो और वह अपना चैनल बंद करवाने वाले केबल नेटर्वक या सरकार के खिलाफ एक भी खबर तक न चलाए तो इस बात का क्या अर्थ निकलता है। ‘एबीपी सांझा’ बंद हुआ लेकिन एबीपी न्यूज़ (राष्ट्रीय चैनल) ने 10 सेंकड तक की भी कोई न्यूज़ नहीं चलाई। क्या विरोध केवल सरकार के खिलाफ होना चाहिए, कंपनी के खिलाफ नहीं जिसने अपनी मर्जी से प्रोजेक्ट शुरू किया और अचानक ही घाटे का सौदा बताकर बंद कर दिया।