माल्या ने मनमोहन शासनकाल में ऐसा कुछ कर दिया था जैसा पहले कभी नहीं हुआ!

Surendra Kishore : माल्या और संसद की सदस्यता… केंद्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा है कि ‘विजय माल्या ने राज्य सभा सदस्य के रूप में अपने विशेषाधिकार का गलत इस्तेमाल करके संसद भवन के गलियारे में मुझे रोक कर बात करने की कोशिश की थी।’ Share on:कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

बैंक वाले, सीबीआई और सिस्टम की कृपा से एक और छोटा-मोटा विजय माल्या जनता का धन हड़पने को तत्पर, जानिए पूरी कहानी

To,
THE EDITOR-IN-CHIEF
Bhadas4Media
India

SUBJECT : SCAM/ECONOMIC OFFENCE IN LOAN DEPARTMENT BY CONSORTIUM BANK AGAINST THE LOAN ACCOUNT OF SHREE SHYAM PULP & BOARD MILLS LIMITED

Respected Sir,

A company namely Shree Shyam Pulp & Board Mills Limited having its manufacturing plant in Kashipur (Uttarakhand) (here-in-after SSPBML) was established by Mr. Naresh Kumar Gupta and presently running by Mr. Naresh Kumar Gupta and his son Amit Kumar alias Amit Gupta. SSPBML is engaged in manufacturing of various kinds of writing and printing papers as well as cardboards, copier and other papers. During their regular course of business, SSPBML applied for loan before the consortium of bank; led by UCO Bank, 5 Sansad Marg, New Delhi, with the heading to EXPAND THEIR PLANT and on this ground the bank passed their loan application and passed their loan without the complete verification of their papers. It is pertinent to mention here that the loan which was granted is of more than Rs. 700 Crores (Seven Hundred Crores Only) but the complete worth of machines are not more than Rs. 200 crore (Rupees Two Hundred Crores) and therefore the disbursed amount is much more than the worth value of the machines.

विजय माल्या की राह पर महुआ टीवी के पीके तिवारी!

महुआ चैनल के प्रमोटर पी.के. तिवारी पर अब प्रवर्तन निदेशालय ईडी का शिकंजा कसता नजर आ रहा है। 14 राष्ट्रीय बैंकों को अरबों रुपये का चूना लगाने वाले तिवारी पर आरोप है कि चैनल के स्टूडियो बनाने के नाम पर फर्जी तरीके से पांच कंपनियां बनाकर अलग-अलग बैंकों से लोन लेकर अरबों रुपये का चूना लगाया। तिवारी के खिलाफ ईडी और सीबीआई के आलावा आयकर विभाग की भी जांच चल रही है।

माल्या जी, आपके ललका जहाज़ की सीट के पाकेट से मैं लाल रंग वाला ईयर फोन ले आया था : रवीश कुमार

माल्या का भागना, चैनलों का जागना

आनंदप्रिय विजय माल्या जी,

आमतौर पर आदरणीय का प्रयोग होता है लेकिन आपके लिए आनंदप्रिय ठीक है । इसका कत्तई मतलब नहीं कि आप आदरणीय नहीं है । आपके कैलेंडर सराहनीय हो सकते हैं तो आप आदरणीय क्यों नहीं हो सकते हैं ।आपने समाज में मनोरंजन और रसरंजन को प्रतिष्ठित किया है । आप हमारे मुल्क ( भारत नहीं लिख रहा पता नहीं कब कौन सेडिशन लगवा दे) के उदास चेहरों के बीच खिलखिलाने का ब्रांड एंबेसडर हैं । जिसे देखिये वही दुखी है । आपको देखकर लगता था कि एक है जो सबसे सुखी है । इसलिए आपको आनंदप्रिय कहा है । लोकप्रिय तो बहुत मिल जाते हैं।

एक भूतपूर्व सांसद व प्रसिद्व पत्रकार ने विजय माल्या के लिए दलाली करते हुए उनके साथ उत्तराखंड में नेताओं की बैठकें करवाई…

मालामाल माल्या की कंगाली कथा

-निरंजन परिहार-

अब आप इसे ख्याति कहें या कुख्याति, कि संसार में शराब के सबसे बड़े व्यापारियों में से एक भारत में कभी अमीरों की जमात के सरदार रहे विजय माल्या कंगाली की कगार पर देश छोड़ कर फुर्र हो गए हैं। यह जगविख्यात तत्य है कि है कि ज्ञान, चरित्र और एकता का दुनिया को पाठ पढ़ाने वाले संघ परिवार की दत्तक पार्टी भारतीय जनता पार्टी ने ही संसार में शराब के सबसे बड़े व्यापारियों में से एक माल्या को कर्नाटक से राज्यसभा में फिर से पहुंचाया था। और माल्या कभी देश की जिस संसद में बैठकर भारत के भाग्य विधाता बने हुए थे, वह संसद भी सन्न है। क्योंकि लुकआउट नोटिस के बावजूद वे गायब हो गए। पर, इस बात का क्या किया जाए कि जिस लाल रंग से माल्या को बहुत प्यार है, सरकार उस लाल रंग की झंडी किंगफिशर के कंगाल को दिखाए, उससे पहले ही विजय माल्या बचा – खुचा माल बटोरकर सर्र से सरक गए।