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वरिष्ठ पत्रकार और अधिवक्ता तिलक जी को कानपुर जर्नलिस्ट क्लब में दी गयी श्रद्धांजलि

कानपुर में कलमकारी और फौजदारी के वकीलों में चोटी पर रहे श्री तिलक (92) का मंगलवार को निधन हो गया। बुधवार को उनके निधन पर शोक व्यक्त करने के साथ ही उन्हे श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी स्मृतियों का याद किया गया।

अशोक नगर स्थित कानपुर जनर्लिस्ट क्लब मे बुधवार को श्री तिलक की श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। अध्यक्षता जर्नलिस्ट क्लब के चेयरमैन सुरेश त्रिवेदी ने की। संचालन जर्नलिस्ट क्लब के अध्यक्ष ओमबाबू मिश्रा के द्वारा किया गया। वरिष्ठ पत्रकार एवं अधिवक्ता रहे दिवंगत तिलक जी को सभी ने श्रृद्दा सुमन अर्पित करते हुए उनके बताये मार्गो पर चलने का संकल्प लिया।

कानपुर जनर्लिस्ट क्लब के चेयरमैन सुरेश त्रिवेदी* ने कहा कि दिवंगत तिलक जी का शहर के पत्रकारों से गहरा नाता था। वो पत्रकारों से सहज भाव से मिलते थे।

जर्नलिस्ट क्लब के अध्यक्ष ओमबाबू मिश्रा ने बताया कि महाराष्ट्र में जन्मे श्री तिलक का परिवार कानपुर आया, तो यहीं का होकर रह गया। साठ के दशक में श्री तिलक की गिनती शहर के बड़े पत्रकारों में होती रही। वे दो बड़े समाचारपत्रों के कानपुर में विशेष संवाददाता और ब्यूरो चीफ रहे। तथा साहित्यकार के साथ ही समाजसेवी बताया।

उन्होंने बताया कि दिवगंत तिलक बहुत ही मिलनसार थे पत्रकारिता जगत में उन्हें भीष्म पितामह माना जाता है। हाल ही में गणेशशंकर विद्यार्थी पर दूरदर्शन पर एक डॉक्यूमेंट्री प्रसारित हुई थी। जिसमें श्रीतिलक और ग्रंथ संकलन का निर्देशन करने वाले वरिष्ठ पत्रकार विष्णु त्रिपाठी के वक्तव्य आए थे।विदेशी कहानियों का अनुवाद श्री तिलक ने चीनी और रूसी कहानियों का हिंदी में अनुवाद किया। यह पुस्तक भी बाजार में उपलब्ध है।

जर्नलिस्ट क्लब के महामंत्री अभय त्रिपाठी ने बताया श्री तिलक ने 70 के दशक में उन्होंने वकालत को अपना पेशा चुना। उन्होंने अद्भुत तार्किक क्षमता से वकालत में भी झंडे गाड़ दिए। वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हुए ग्लूकोज कांड का मुकदमा श्री तिलक ने तीन दशक तक लड़ा। आरती तेजाब कांड में अभियुक्त के वकील भी श्री तिलक ही रहे। सैकड़ों मुकदमे लड़े और अधिकांश में जीत हासिल की।

उन्होंने अमर शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी के ऊपर एक ग्रंथ संकलित किया। ‘युगपुरुष गणेशशंकर विद्यार्थी-व्यक्तित्व एवं कृतित्व’ नामक यह ग्रँथ लगभग डेढ़ हजार पन्नों का है। इसमें गणेशशंकर विद्यार्थी के जीवन के लगभग हर पहलू को छुआ गया है। अपनी तरह का यह अनूठा ग्रंथ है। *इसी ग्रँथ में उन्होंने 332 नम्बर पेज में (प्रताप की अंतिम साँसे) शीर्षक में कानपुर जर्नलिस्ट क्लब के अशोक नगर स्थित हिन्दी पत्रकार भवन का भी उल्लेख किया था की किस तरह से गणेश शंकर विद्यार्थी जी के द्वारा अग्रलेख वाली फाइलों के लिए प्रयास किया था जिससे हिंदी के पत्रकार उस पर शोध कर सकें।

जर्नलिस्ट क्लब के सँयुक्त मंत्री आलोक अग्रवाल ने स्व तिलक के स्मरण सुनाए और कहा कि वह पत्रकारों के मार्गदर्शक थे।

श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने स्व. तिलक की स्मृतियों को ताजा किया। उनके योगदान के बारे में चर्चा की गई। कानपुर जर्नलिस्ट क्लब श्री तिलक की याद में हर वर्ष एक पत्रकार को श्री तिलक स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया जाएगा।

शोकसभा प्रमुख रूप से जर्नलिस्ट क्लब के चेयरमैन सुरेश त्रिवेदी, अध्यक्ष ओमबाबू मिश्रा, महामंत्री अभय त्रिपाठी, वरिष्ठ छायाकार कुमार त्रिपाठी, मंत्री विक्की रघुवंशी, संयुक्त मंत्री आलोक अग्रवाल,शैलेन्द्र मिश्र,वरिष्ठ कार्यकरणी सदस्य रितेश शुक्ला, वीरेन्द्र चतुर्वेदी,अतहर नईम,राजू खंडूजा,मदन भाटिया, बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री नरेश चन्द्र त्रिपाठी, सौरभ त्रिपाठी, मदन मोहन शुक्ला, अनिल बाजपेयी भुल्लड़, नूपुर राही, शरद अग्रवाल, संजीव गर्ग, नारायण दीक्षित, सलीम समेत तमाम लोग मौजूद रहे।

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